अमेरिका ने हाल ही में ईरान के तेल और लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) एक्सपोर्ट में हाथ बंटाने वालों पर जोरदार सैंक्शन्स ठोक दिए हैं। ये प्रतिबंध 50 से ज्यादा लोगों, कंपनियों और जहाजों पर लगे हैं, और इसमें तीन भारतीय नागरिक भी फंस गए हैं। अमेरिका किसी भी सूरत में ईरान की कमाई के रास्ते बंद करना चाहता है, ताकि वो आतंकी ग्रुप्स को पैसे न दे सके जो अमेरिका को धमकी देते रहते हैं।
ईरान की एनर्जी एक्सपोर्ट को ध्वस्त करना चाहता है अमेरिका
ये सब ट्रंप प्रशासन की बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जो ईरान के एनर्जी एक्सपोर्ट नेटवर्क को तोड़ने पर तुला हुआ है। गुरुवार को यूएस ट्रेजरी डिपार्टमेंट के ऑफिस ऑफ फॉरेन असेट्स कंट्रोल (ओएफएसी) ने ये ऐलान किया। उसके मुताबिक, ये लोग और कंपनियां अरबों डॉलर के पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट करने में मदद कर रहे थे, जो ईरान के लिए जानलेवा कमाई का जरिया बन गया था। ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेन्ट ने कहा, “ट्रंप के नेतृत्व में हम ईरान के एनर्जी मशीन को खराब कर रहे हैं, ताकि वो आतंकवाद फंड न कर सके।”
चीन पर करारा वॉर
अमेरिका ने जिन कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया है, उनमें करीब दो दर्जन ‘शैडो फ्लीट’ जहाज, चीन का एक क्रूड ऑयल टर्मिनल, एक स्वतंत्र रिफाइनरी और शिपिंग कंपनियां शामिल हैं, जो सैकड़ों मिलियन डॉलर के ईरानी एलपीजी को इधर-उधर ले जाती थीं।
ईरान के तेल और एलपीजी एक्सपोर्ट का बैकग्राउंड
ईरान का तेल और एलपीजी एक्सपोर्ट उसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। ये दोनों सेक्टर मिलकर अरबों डॉलर की कमाई देश को देते हैं। लेकिन अमेरिका के सैंक्शन्स की वजह से ईरान को चालाकी से ये सामान बेचना पड़ता है। वो ‘शैडो फ्लीट’ जहाजों का इस्तेमाल करता है – यानी ऐसे जहाज जो ट्रैकिंग से बचते हैं और प्रतिबंध तोड़ते हैं। ये जहाज ईरानी तेल को चीन, पाकिस्तान जैसे देशों तक पहुंचाते हैं। अमेरिका का कहना है कि ये कमाई आतंकी ग्रुप्स को फंड करती है, जो यूएस को निशाना बनाते हैं। इसलिए, ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने ईरान के इस ‘एनर्जी एक्सपोर्ट मशीन’ के मुख्य पुर्जों को निशाना बनाया है।
ईरानी कैश फ्लो को कम करना चाहता है अमेरिका
ये सैंक्शन्स एक्जीक्यूटिव ऑर्डर 13902 के तहत लगाए गए हैं। अमेरिका का लक्ष्य ईरान की कैश फ्लो को कमजोर करना है, ताकि वो अपना रवैया बदले। सैंक्शंड लोगों या कंपनियां लिस्ट से हटने के लिए लीगल प्रोसीजर फॉलो कर सकती हैं। ये कदम ईरान को कथित तौर पर आतंकवाद फंडिंग से रोकने के लिए हैं, और ट्रंप प्रशासन इसे अपनी बड़ी जीत मान रहा है।
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सैंक्शन्स की डिटेल्स
सैंक्शन्स के तहत, इन इकाइयों की अमेरिका में मौजूद सारी प्रॉपर्टी और इंटरेस्ट फ्रीज हो जाते हैं। अगर कोई ब्लॉक्ड पर्सन की 50% या ज्यादा ओनरशिप वाली कंपनी है, तो वो भी प्रभावित होती है। यूएस पर्सन्स या अमेरिका में कोई ट्रांजेक्शन बैन है, जब तक स्पेशल परमिशन न हो। जिन कंपनियों पर ये बैन लगाया गया है, उनमें सिंगापुर, हॉन्गकॉन्ग, चीन, यूएई और दूसरी जगहों की कई कंपनियां शामिल हैं।
किन भारतीयों पर गिरी गाज
इस प्रतिबंध के शिकार कुछ भारतीय टाइकून भी बने बने हैं, उनमें वरुण पुला, सोनिया श्रेष्ठा और इयप्पन राजा के नाम प्रमुख हैं। ये तीनों एक्जीक्यूटिव ऑर्डर 13902 के तहत डेजिग्नेटेड हैं, क्योंकि उन्होंने ईरानी पेट्रोलियम और एलपीजी ट्रांसपोर्ट करने वाली फर्म्स के लिए काम किया। इन तीनों के डिटेल्स कुछ इस प्रकार हैं।
वरुण पुला: ये मार्शल आइलैंड्स बेस्ड बर्था शिपिंग इंक के मालिक हैं। उनकी कंपनी कोमोरोस फ्लैग्ड जहाज पामिर (आईएमओ 9208239) चलाती है। ये जहाज जुलाई 2024 से चीन को लगभग 40 लाख बैरल ईरानी एलपीजी डिलीवर कर चुका है।
इयप्पन राजा: इवी लाइन्स इंक के ओनर, जो मार्शल आइलैंड्स में है। ये पनामा फ्लैग्ड जहाज सैफायर गैस (आईएमओ 9320738) ऑपरेट करते हैं। अप्रैल 2025 से ये चीन को 10 लाख से ज्यादा बैरल ईरानी एलपीजी ले जा चुका है।
सोनिया श्रेष्ठा: इंडिया बेस्ड वेगा स्टार शिप मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड की मालकिन हैं। उनकी कंपनी कोमोरोस फ्लैग्ड नेप्टा (आईएमओ 9013701) चलाती है, जो जनवरी 2025 से पाकिस्तान को ईरानी एलपीजी पहुंचा रही है। सैंक्शन्स ने उनकी कंपनी को भी ब्लॉक कर दिया।











