अवैध अप्रवासियों के बोझ और इस्लामिक कट्टरता से जूझ रहे इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इस पर नकेल कसने के लिए बड़ा कदम उठा लिया है। उनकी सरकार ने हाल ही में एक नया बिल पेश किया गया है, जो इस्लामी चेहरे ढकने वाली चीजों जैसे बुरका और नकाब पर रोक लगाने की बात करता है। ये बिल प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की पार्टी ब्रदर्स ऑफ इटली के सांसदों ने संसद में रखा है। मकसद है “कल्चरल सेपरेटिज्म” यानी सांस्कृतिक अलगाव को रोकना, जो इस्लाम से जुड़ा बताया जा रहा है। बिल का फोकस रिलिजियस रेडिकलायजेशन और धार्मिक नफरत पर है, लेकिन ये सिर्फ मुस्लिम महिलाओं के कपड़ों तक सीमित नहीं। ये धार्मिक ग्रुप्स की फंडिंग पर भी नजर रखेगा।
बिल के मुख्य प्रावधान
रॉयटर्स की रिपोर्ट्स के अनुसार, ये बिल पूरे देश में पब्लिक जगहों पर चेहरा ढकने वाली किसी भी चीज पर रोक लगाता है। स्कूल, यूनिवर्सिटी, दुकानें, ऑफिस, समेत हर पब्लिक प्लेस में बुर्का बैन रहेगा। नियम को नहीं मानने पर 300 से 3000 यूरो (करीब 350 से 3500 डॉलर) का जुर्माना लगेगा। ये नियम “रिलिजियस रेडिकलाइजेशन और रिलिजियसली मोटिवेटेड हेट्रेड” से लड़ने के लिए है, जैसा बिल की शुरुआत में लिखा है।
इस्लामिक फंडिंग पर नकेल कसी
इस बिल के जरिए न केवल बुर्का, बल्कि ये उन रिलिजियस ऑर्गनाइजेशंस पर फाइनेंशियल ट्रांसपेरेंसी के नए नियम लाता है, जिनके पास इटली सरकार से कोई फॉर्मल एग्रीमेंट नहीं है। अभी 13 रिलिजियस ग्रुप्स को ये मान्यता मिली हुई है, लेकिन कोई भी मुस्लिम ऑर्गनाइजेशन इसमें शामिल नहीं। ऐसे ग्रुप्स को अपनी सारी फंडिंग सोर्स बतानी होगी। फंडिंग सिर्फ उन जगहों से आएगी जो स्टेट सिक्योरिटी के लिए खतरा न बनें। मतलब, मुस्लिम कम्युनिटी को अपनी फाइनेंस रिपोर्टिंग करनी पड़ेगी, जो अभी नहीं करनी पड़ती।
वर्जिनिटी टेस्ट और फोर्स्ड मैरिज
बिल में कुछ क्रिमिनल प्रोविजंस भी जोड़े गए हैं। जैसे, वर्जिनिटी टेस्टिंग पर सजा। फोर्स्ड मैरिजेस के लिए पहले से सजाएं हैं, लेकिन अब रिलिजियस कोर्सियन को भी इसमें शामिल किया गया है। यानी, अगर किसी को धार्मिक दबाव से शादी कराई जाए, तो वो क्राइम माना जाएगा।
मेलोनी की कोएलिशन का हाथ
ये बिल मेलोनी की ब्रदर्स ऑफ इटली पार्टी का है। उनकी कोएलिशन पार्टनर लीग ने इस साल चेहरे ढकने पर सीमित बिल पेश किया था, जो अभी संसद की कमिशन में अटका है। शायद दोनों को मर्ज कर दिया जाए। कोएलिशन के पास संसद में मजबूत बहुमत है, तो ये पास होने की संभावना ज्यादा है। लेकिन डिबेट का कोई तुरंत शेड्यूल नहीं बताया गया।
गौरतलब है कि यूरोपीय देशों में बुर्का बैन किए जाने की घटनाओं पर नजर डालें तो फ्रांस ने 2011 में सबसे पहले पब्लिक में बुरका बैन किया था। उसके बाद 20 से ज्यादा देशों ने ऐसा किया – ऑस्ट्रिया, ट्यूनिशिया, तुर्की, श्रीलंका और स्विट्जरलैंड समेत कई अन्य देशों ने भी बुर्का बैन किया था।












