तमिलनाडु के करूर में 27 सितंबर 2025 को एक्टर और तमिलागा वेत्री कझागम (टीवीके) के चीफ जोसेफ विजय की रैली के दौरान हुई भगदड़ में 41 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना को लेकर सैकड़ों लेखक, कवि, बुद्धिजीवी, एक्टिविस्ट और पत्रकारों ने मिलकर एक जॉइंट स्टेटमेंट जारी करते हुए विजय के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने तमिलनाडु सरकार से गुजारिश की कि विजय पर कानूनी कार्रवाई हो, सिक्योरिटी की चूक की जांच हो और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के कदम उठाए जाएं। इन सभी का कहना है कि ये सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि लापरवाही का नतीजा है।
बुद्धिजीवियों का गुस्सा: क्या लगाव लगाया स्टेटमेंट में?
स्टेटमेंट में साफ कहा गया, “हादसा विजय की आंखों के सामने हुआ, लेकिन उन्होंने कंट्रोल करने की कोशिश नहीं की और भाग निकले। दो दिन चुप्पी के बाद वीडियो जारी किया, जो कांस्पिरेसी थ्योरी से भरा था।” फैंस ने डिसइनफॉर्मेशन फैलाई, कांस्पिरेसी का रोना रोया और विजय को क्लीन चिट देने की कोशिश की। बीजेपी-एनडीए का एक डेलिगेशन भी करूर गया था। बुद्धिजीवी कहते हैं, विजय अब राइट विंग से चिपकने को तैयार हैं, जिन्हें पहले दुश्मन बताते थे, बस बचने के लिए।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
ये पहली बार नहीं था। तिरुचि, अरियालुर, नागापट्टिनम, विक्किरावंडी और मदुरै में विजय की पिछली रैलियों में भी यही हाल था। पार्टी के कैडर ट्रैफिक रूल्स तोड़ते, लोगों को डराते, पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाते। लोग पेड़ों पर, बिजली के खंभों पर, इमारतों पर चढ़ जाते। लेकिन किसी ने सुध न ली। स्टेटमेंट में कहा गया, “विजय ने अपने फैंस की इन हरकतों को कभी रोका नहीं, बल्कि नॉर्मलाइज कर दिया, जो इस त्रासदी का कारण बना।” वो कहते हैं, विजय पावर के भूखे हैं, लेकिन मेहनत, समाज की फिक्र या ईमानदारी के बिना।
सख्ती से कानूनी कार्रवाई की मांग
जोसेफ विजय के खिलाफ करीब 300 से ज्यादा लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं। इन लोगों ने सरकार से विजय को कोर्ट तक लाने की मांग की है। सिक्योरिटी लैप्स की जांच की मांग की गई है।
हस्ताक्षर करने वालों में कौन
हस्ताक्षर करने वालों में रिटायर्ड मद्रास हाईकोर्ट जज जस्टिस के चंद्रू, रिटायर्ड आईएएस एमजी देवसाहायम, ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट हेनरी टिफेन, लेखक वन्नधासन, पोनलीन, कलाप्रिया, पेरुमल मुरुगन, इमयम, बामा, कवि युगभारती, सुगिरथारानी, कुट्टी रेवती जैसे बड़े नाम शामिल हैं। ये सब मिलकर कह रहे हैं, समाज को बचाना हमारी जिम्मेदारी है।














