उत्तर प्रदेश में नवरात्रि 2025 : यूपी की शक्तिपीठों पर उमड़ा भक्तों का सैलाब, 2 करोड़ों से अधिक ने किए दर्शन
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उत्तर प्रदेश में नवरात्रि 2025 : यूपी की शक्तिपीठों पर उमड़ा भक्तों का सैलाब, 2 करोड़ों से अधिक ने किए दर्शन

शारदीय नवरात्रि 2025 में उत्तर प्रदेश के देवी मंदिरों में करोड़ों भक्तों ने दर्शन किए। विंध्यवासिनी धाम, शाकम्भरी धाम और देवीपाटन रहे मुख्य आकर्षण

Written byसुनील रायसुनील राय
Oct 1, 2025, 09:19 pm IST
in भारत, उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश की पावन धरती पर शारदीय नवरात्रि केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और नारी शक्ति का विराट स्वरूप बनकर उभरा है। पूर्वांचल के विंध्यवासिनी धाम से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शाकम्भरी मंदिर तक समस्त देवी मंदिरों में नवरात्रि के नौ दिनों में ही लगभग 2 करोड़ भक्तों ने मां के दरबार में हाजिरी लगाई। इनमें से केवल विंध्यवासिनी धाम में ही 50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने मां का आशीर्वाद लिया।

मीरजापुर का मां विंध्यवासिनी मंदिर

मीरजापुर स्थित मां विंध्यवासिनी का मंदिर प्रदेश का सबसे प्रमुख सिद्धपीठ माना जाता है। यहां प्रतिदिन औसतन 4 से 5 लाख श्रद्धालु पहुंचे। आम दिनों की तुलना में यह संख्या कई गुना बढ़ गई। सरकार द्वारा बनाए गए विंध्याचल कॉरिडोर ने श्रद्धालुओं को नई सहूलियत दी है। नवरात्रि के अंतिम तीन दिनों में यहां रोज़ाना 6 से 7 लाख श्रद्धालु माता की आराधना में शामिल हुए।

वाराणसी और अन्य सिद्धपीठों में श्रद्धालुओं का सैलाब

51 शक्तिपीठों में गिने जाने वाले मां विशालाक्षी मंदिर में सामान्य दिनों की तुलना में नवरात्रि पर भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ गई। सप्तमी से नवमी तक यहां 20 से 30 हजार श्रद्धालु रोज़ाना पहुंचे। वाराणसी के गायत्री शक्ति पीठ चौरा देवी मंदिर में नवमी तक 1 लाख से अधिक श्रद्धालु आए, जबकि दुर्गाकुंड स्थित मां कुष्मांडा मंदिर में नवरात्रि के नौ दिनों में 12 लाख से ज्यादा भक्त पहुंचे। यहां अंतिम तीन दिनों में प्रतिदिन करीब 2 लाख श्रद्धालु दर्शन करने आए।

सहारनपुर का शाकम्भरी धाम और त्रिपुर बाला सुंदरी मंदिर

पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सहारनपुर जिला भी आस्था से सराबोर रहा। नवरात्रि के नौ दिनों में शाकम्भरी धाम में लगभग 7 लाख और मां त्रिपुर बाला सुंदरी मंदिर में करीब 4 लाख श्रद्धालुओं ने मत्था टेका।

देवीपाटन धाम बलरामपुर

बलरामपुर स्थित मां पाटेश्वरी मंदिर में इस नवरात्रि में करीब 6.50 लाख श्रद्धालु पहुंचे। सप्तमी से नवमी तक यहां सबसे अधिक भीड़ रही। साथ ही मंदिर प्रबंधन ने 15 दिवसीय मेले का भी आयोजन किया, जिसमें आस्था और परंपरा का सुंदर संगम देखने को मिला।

प्रयागराज के शक्तिपीठ

प्रयागराज के मां अलोप शंकरी धाम में नवरात्रि के दौरान करीब 12 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। सप्तमी, अष्टमी और नवमी पर प्रतिदिन ढाई लाख तक भक्त मां के दरबार में हाजिरी लगाने आए। मां कल्याणी देवी मंदिर में लगभग 6 लाख और मां ललिता देवी मंदिर में प्रतिदिन 70 से 80 हजार श्रद्धालु पहुंचे। सरकार ने यहां लगभग 6 करोड़ रुपये की लागत से यात्री शेड, लाइटिंग और सौंदर्यीकरण के कार्य कराए हैं।

गोरखपुर के प्रमुख मंदिर

गोरखपुर स्थित तरकुलहा देवी मंदिर इस बार नवरात्रि में प्रमुख आस्था केंद्र बन गया। औसतन 50 हजार श्रद्धालु प्रतिदिन पहुंचे, जबकि नवमी पर संख्या 1 लाख पार कर गई। अबतक 5 लाख से ज्यादा श्रद्धालु यहां दर्शन कर चुके हैं। वहीं कुसम्ही जंगल स्थित बुढ़िया माई मंदिर में 5 लाख भक्त पहुंचे। यहां नवरात्रि के अंतिम तीन दिनों में रोज़ाना 1 लाख श्रद्धालुओं की भीड़ रही। सरकार ने यहां पर्यटन विकास कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च कर सुविधाएं बढ़ाई हैं।

गाजीपुर और जौनपुर

गाजीपुर के हथियाराम मठ में इस बार नवरात्रि पर लगभग 40 हजार लोग पहुंचे। वहीं कामाख्या देवी मंदिर में अबतक 1 लाख से अधिक भक्तों ने माता के चरणों में मत्था टेका। जौनपुर का मां शीतला चौकिया मंदिर नवरात्रि में भक्तों से खचाखच भरा रहा। प्रतिदिन 70 हजार और सप्तमी से नवमी तक करीब 1 लाख श्रद्धालु माता के दरबार में पहुंचे।

नैमिषारण्य की तपोभूमि

नैमिषारण्य की तपोभूमि स्थित ललिता देवी मंदिर में नवरात्रि के नौ दिनों में दो लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। महानवमी पर यहां आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।

आगरा के मंदिरों में उमड़ा जनसैलाब

आगरा का 300 साल पुराना चामुंडा देवी मंदिर नवरात्रि में विशेष आकर्षण रहा। यहां करीब 2 लाख श्रद्धालु पहुंचे। इसके साथ कैला माता मंदिर में 15 लाख, सती माता मंदिर में 2 लाख, काली माता मंदिर में 1.5 लाख और शीतला माता मंदिर में 10 लाख श्रद्धालु पहुंचे।

झांसी और अन्य जिलों के मंदिर

झांसी के पंचकुइया, कैमासन, महाकाली और लहर देवी मंदिर में नवरात्रि के नौ दिनों में 1-1 लाख से अधिक भक्त पहुंचे। यहां के मंदिरों का ऐतिहासिक महत्व और आस्था दोनों ही देखने को मिले। महराजगंज के लेहड़ा देवी मंदिर में 2 लाख श्रद्धालु पहुंचे। औरैया के 15 मंदिरों में करीब ढाई लाख लोग दर्शन को आए। हापुड़, सिद्धार्थनगर और अन्य जिलों के मंदिरों में भी लाखों की भीड़ रही।

विंध्यवासिनी धाम : उत्तर भारत का सबसे बड़ा शक्ति उपसना का केंद्र

मीरजापुर स्थित मां विंध्यवासिनी का मंदिर इस नवरात्रि पूरे उत्तर भारत का मुख्य आकर्षण बना। पहले ही दिन से यहां प्रतिदिन लगभग 4.5 लाख श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचे। जबकि सामान्य दिनों में यह संख्या केवल 1 से 1.5 लाख रहती थी। इस बार श्रद्धालुओं की भीड़ तीन गुना से अधिक हो गई। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विंध्याचल कॉरिडोर का निर्माण अंतिम चरण में है। मंदिर परिसर में परकोटा, चौड़ी परिक्रमा पथ, यात्री शेड, चौड़े मार्ग और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था ने भीड़ प्रबंधन को आसान बना दिया है। यहां भक्त बिना धक्का-मुक्की के सहज रूप से दर्शन कर पा रहे हैं। आस्था और विकास का यह मेल विंध्याचल को न केवल राष्ट्रीय, बल्कि वैश्विक तीर्थ पर्यटन के मानचित्र पर स्थापित कर रहा है।

सहारनपुर : शाकम्भरी और त्रिपुर बाला सुंदरी में श्रद्धा का अद्भुत प्रवाह

नवरात्रि के दिनों में सहारनपुर के शाकम्भरी देवी और त्रिपुर बाला सुंदरी मंदिर भक्तों के लिए आस्था के जीवंत प्रतीक बने। शाकम्भरी मंदिर में 7 लाख श्रद्धालुओं ने माता का दर्शन किया जबकि त्रिपुर बाला सुंदरी मंदिर में 4 लाख से अधिक भक्त पहुंचे। यहां सरकार ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए भव्य प्रवेश द्वार, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल और महिला सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए। महिला पुलिस की मौजूदगी और ‘मिशन शक्ति’ अभियान के तहत किए गए प्रयासों ने यहां आने वाले भक्तों को सुरक्षित वातावरण दिया।

देवीपाटन धाम : पाटेश्वरी मंदिर में आस्था और नारी शक्ति का संगम

बलरामपुर का देवीपाटन शक्तिपीठ नवरात्रि में लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा। यहां भक्तों की संख्या लगातार बढ़ती रही और पूरे नवरात्र में लगभग 6.5 लाख श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचे। मंदिर प्रशासन ने यहां 15 दिनों का भव्य मेला आयोजित किया। योगी सरकार ने देवीपाटन मंदिर के कायाकल्प के लिए बड़े स्तर पर कार्य किए हैं—जिसमें मार्ग का चौड़ीकरण, रोशनी की व्यवस्था, फसाड लाइटिंग, लेजर शो, सुरक्षा इंतजाम और श्रद्धालुओं के लिए विश्राम स्थलों का निर्माण शामिल है। इस परिवर्तन ने देवीपाटन को न सिर्फ धार्मिक स्थल, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण और नारी सशक्तिकरण का प्रतीक बना दिया है।

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