यूके में एनएचएस अर्थात राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा की एक सिफारिश पर हंगामा हो रहा है और माफी की मांग की जा रही है। यूके में काफी समय से फर्स्ट कज़िन मेरिज अर्थात फुफेरे, मौसेरे, चचेरे, मौसेरे भाई बहनों के बीच शादी पर प्रतिबंध की मांग उठ रही है क्योंकि कई शोधों ने यह साबित किया है कि ऐसी शादियों के कारण बच्चों में कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा होती हैं और कई समस्याएं तो जन्मजात ही होती हैं।
कीर स्टार्मर सरकार का ढुलमुल रवैया
हालांकि इसे लेकर सरकार का ढुलमुल रवैया रहा था क्योंकि कीर स्टार्मर ने इस पर प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया था। दिसंबर 2024 में सांसद रिचर्ड होल्डेन ने हाउस ऑफ कॉमन्ज़ में फर्स्ट कज़िन मेरिज पर प्रतिबंध लगाने के लिए बिल प्रस्तुत किया था। अर्थात वे शादियाँ, जिनमें दादा-दादी, नाना-नानी एक ही हों। और उनकी इस घोषणा के बाद ही स्वतंत्र सांसद इकबाल मोहम्मद ऐसी शादियों के पक्ष में उतर आए थे। और उसके बाद से लगातार बहस और चर्चाएं हो रही हैं।
क्या था गाइड लाइंस में
अब एनएचएस ने अपनी गाइड लाइंस में इसके पक्ष में लिखा तो लोगों का गुस्सा फूट पड़ा था। एनएचएस की Genomics Education Programme की वेबसाइट पर गाइडलाइंस प्रकाशित हुई थी, जिनमें फर्स्ट कज़िन के बीच शादियों को फायदेमंद बताया गया था। इसमें यह बताया गया था कि फर्स्ट कज़िन शादियों में मजबूत पारिवारिक समर्थन रहता है और इसके आर्थिक लाभ होते हैं।
विवाद और स्वास्थ्य चिंताएँ
जैसे ही यह प्रकाशित हुई थी, वैसे ही इनका विरोध आरंभ हो गया था। क्योंकि ब्रिटेन में फर्स्ट कज़िन के बीच शादियाँ अधिकतर पाकिस्तानी मुस्लिमों में ही होती हैं और ऐसे परिवारों के बच्चों में कई आनुवांशिक बीमारियाँ होने की आशंका अधिक होती हैं। इसके साथ ही महिलाओं के लिए भी ये शादियाँ उत्पीड़न का कारण हैं।
पीड़ितों का विरोध
डेली मेल में एक पाकिस्तानी मूल की महिला ने इन गाइड लाइंस का विरोध किया था। उसने अपने अम्मी-अब्बू का उदाहरण दिया था। आईशा अली खान नामक महिला ने बताया कि उसके अम्मी-अब्बू फर्स्ट कज़िन्स थे और जिनके सात बच्चे हुए थे। चार बच्चे गंभीर समस्याओं के साथ पैदा हुए थे। जिनमें से तीन की मौत हो गई, जबकि एक बड़ी बहन ताहिरा की देखभाल वे खुद कर रही हैं।
एनएचएस का तर्क और आलोचना
इनका कहना है कि एनएचएस का यह तर्क कि ऐसी शादियों से आर्थिक लाभ होते हैं अर्थात परिवार की दौलत, संसाधन और विरासत में बंटवारा नहीं होता है, वह खानदान से बाहर नहीं जाता, पूरी तरह से गलत है। यह जाहीर है कि इंग्लैंड की एनएचएस मल्टीकल्चरल दिखाना चाहती है और फर्स्ट कज़िन मेरिज आइरिश ट्रैवलर्स में कुछ सीमा तक है और सबसे ज्यादा ब्रिटिश पाकिस्तानी समुदाय में है।
लोगों के प्रश्न
लोग प्रश्न उठा रहे हैं कि क्या इंग्लैंड की एनएचएस केवल इन्हीं दो समुदायों के लिए कार्य करती है या फिर वह सभी के लिए है? यदि यह सभी के लिए है, तो वह केवल एक समुदाय में सबसे ज्यादा पाए जाने वाले रिवाज को सही क्यों ठहरा रही है, जबकि उसके नुकसानों पर लगातार नई खोजें सामने आ रही हैं। तथ्य कुछ और कहते हैं और एनएचएस कुछ और ही कह रही है।
सांसदों का विरोध
इस गाइड लाइंस का विरोध सांसदों ने भी किया। टेलीग्राफ के अनुसार टोरी सांसद रिचर्ड होल्डेन ने एनएचएस की आलोचना करते हुए कहा कि हमारे एनएचएस को हानिकारक और दमनकारी तहजीबी रिवाजों के सामने आगे घुटने टेकना बंद कर देना चाहिए।
उन्होनें आगे कहा कि कंजरवेटिव इमग्रैशन के लिए बैकडोर के रूप में इस्तेमाल करने वाली फर्स्ट कज़िन मेरिज को बंद करना चाहते हैं, लेकिन लेबर इन उचित मांगों के प्रति आँखें मूँद चुके हैं। फिर उन्होनें कहा कि “सर कीर स्टारमर को महिलाओं से घृणा करने वाले कौम के नेताओं और उनके समर्थकों से डरना बंद कर देना चाहिए, जो तहजीब के प्रति पागलपने वाली मानसिकता वाले प्रोफेसर के रूप में सामने आते हैं और एक ऐसे रिवाज पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए जिसे ब्रिटेन के हर समुदाय का भारी बहुमत हमेशा के लिए समाप्त होते देखना चाहता है।”
आलोचना के बाद NHS ने गाइडलाइंस हटाईं
जब नेताओं से लेकर सोशल मीडिया पर आम लोगों ने इन गाइड लाइंस की आलोचना की और लोगों ने तथ्य भी दिए कि कैसे कज़िन मैरिज के कारण यूके में जन्म से बीमार लोगों की संख्या में वृद्धि हो रही है और कैसे पूरे-के पूरे परिवार इन बीमारियों से जूझ रहे हैं, और लोगों ने एनएचएस से माफी की मांग की, तो एनएचएस ने उन गाइड लाइंस को अपनी वेबसाइट से हटा लिया।
विशेषज्ञों की राय
रीलिजस कानून के विशेषज्ञ और ऑक्सफोर्ड स्थित फैरोस फाउंडेशन के सामाजिक विज्ञान अनुसंधान समूह के निदेशक डॉ. पैट्रिक नैश ने इन गाइड लाइंस की आलोचना करते हुए कहा कि एनएचएस से ऐसे दस्तावेज़ देखना बहुत दुखद है। उन्होनें कहा कि फर्स्ट कज़िन्स के बीच शादियाँ साफ़-साफ़, अनाचार है और इस पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की ज़रूरत है। इस तहजीबी ज़िंदगी और इससे होने वाले गंभीर जन स्वास्थ्य परिणामों के बीच कोई ‘संतुलन’ नहीं है।
उन्होनें यह भी कहा कि यह आधिकारिक लेख बेहद भ्रामक है और इसे माफ़ी मांगते हुए वापस लिया जाना चाहिए ताकि जनता को किसी भी तरह की चूक और अर्धसत्य से गुमराह न किया जाए।’
लोगों की असंतुष्टि
तमाम आलोचनाओं के बीच एनएचएस ने हालांकि इस लेख को वेबसाइट से हटा तो लिया है, परंतु लोगों को यह संतोषजनक उत्तर नहीं दिया है, कि तमाम स्वास्थ्य खतरों, और रिपोर्ट्स के बाद भी फर्स्ट कज़िन शादियों के पक्ष में क्यों लिखा गया?











