नई दिल्ली (हि.स.) । महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के शांतिपूर्ण गांव होंवाडज में जन्मी और पली-बढ़ी भाग्यश्री मधवराव जाधव की जीवन यात्रा अद्वितीय है। 2006 में हुए एक दुखद हादसे ने उनके जीवन को हमेशा के लिए बदल दिया, जिससे उन्हें गंभीर न्यूरोलॉजिकल चोटें लगीं। महीनों तक वेंटिलेटर पर जीवन संघर्ष करने के बाद, उन्होंने कठिन पुनर्वास प्रक्रिया से गुज़रते हुए अपनी हिम्मत को परखा।
पैरालंपिक में सफ़लता की ओर
भाग्यश्री के परिवार ने उन्हें हार मानने नहीं दिया। भाई और प्रियजनों के प्रोत्साहन से उन्होंने पैरालंपिक खेलों में कदम रखा। 2017 में पुणे में आयोजित मेयर कप में अपनी पहली प्रतियोगिता में उन्होंने दो गोल्ड और एक ब्रॉन्ज मेडल जीतकर सभी को चौंका दिया। इसके बाद वह एफ34 श्रेणी में शॉट पुट एथलीट के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने लगीं। उन्होंने 2022 एशियाई पैरागेम्स में सिल्वर मेडल जीता और टोक्यो 2020 तथा पेरिस 2024 पैरालंपिक्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया। पेरिस पैरालंपिक्स में वह देश की ध्वजवाहक भी थीं और महिलाओं की शॉट पुट एफ34 प्रतियोगिता में पांचवें स्थान पर रही।
नई दिल्ली 2025 में भाग्यश्री की तैयारी
39 साल की उम्र में भी भाग्यश्री का जोश कम नहीं हुआ है। 2025 खेलो इंडिया पैरागेम्स में शॉट पुट और जैवलिन में गोल्ड मेडल जीतने के बाद वह नई दिल्ली 2025 वर्ल्ड पैराऐथलेटिक्स चैंपियनशिप में अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। वह लगातार प्रशिक्षण ले रही हैं, अपनी स्थिरता, थ्रो तकनीक और शक्ति को सुधार रही हैं। भाग्यश्री कहती हैं कि जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम भारतीय एथलेटिक्स के लिए प्रतिष्ठित है। हर थ्रो उनके परिवार, कोच और राष्ट्र के विश्वास से प्रेरित है और वह उस विश्वास को मेडल में बदलने का लक्ष्य रखती हैं।
भाग्यश्री का लक्ष्य और दृष्टिकोण
नई दिल्ली में उनका लक्ष्य केवल जीतना नहीं है, बल्कि भारत के पैरास्पोर्ट भविष्य में आशा और गर्व की भावना जगाना है। उनकी कहानी संघर्ष और धैर्य की मिसाल है, जो यह दिखाती है कि कठिन परिस्थितियों में भी हौसला और निरंतर प्रयास से सफलता हासिल की जा सकती है। भाग्यश्री की यात्रा युवाओं और एथलीट्स के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।











