कांग्रेस के कथित वोट चोरी के आरोपों के अभी तक केवल एनडीए ही बेबुनियाद बता रही थी, लेकिन अब तो खुद कांग्रेसी ही इस पर एकमत नहीं हैं। कांग्रेस के ही सीनियर नेताओं का मानना है कि वोट चोरी के कथित मुद्दे पर इस प्रकार की आक्रामकता दिखाकर राहुल गांधी भारतीय लोकतंत्र की वैधता को चुनौती दे रहे हैं। लेकिन ये मुद्दा अधिक देर तक टिक नहीं सकेगा।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, राहुल गांधी इस मुद्दे को बेवजह खींच रहे हैं। ऐसा करने से कांग्रेस अन्य मुद्दों से भटक जाएगी। कांग्रेस की कार्यसमिति की एक पूर्व सदस्य के हवाले से अखबार लिखता है कि आंकड़ों को में कुछ विसंगतियां होना स्वाभाविक है, लेकिन इसे राष्ट्रीय साजिश करार देकर राहुल गांधी मूल रूप से ऐसा कह रहे हैं कि भारत का लोकतंत्र धांधली और घोटाले पर ही टिका है। ये सही नहीं है।
कुछ कांग्रेसियों को तो राहुल गांधी के कथित वोट चोरी वाले इस ब्रम्हास्त्र का लक्ष्य ही नहीं पता। उनका मानना है कि राहुल गांधी इस मुद्दे को अंत तक बनाए नहीं रख पाएंगे। अखबार के अनुसार, पार्टी के कुछ पूर्व नेताओं का कहना है कि वोट चोरी के इस अभियान को आगे बढ़ाकर राहुल गांधी अपनी पार्टी की कमियों को ढंकना चाहते हैं। राहुल गांधी कर्नाटक की महादेवपुरा सीट का हवाला देते हुए एक लाख वोट चोरी होने का दावा करते हैं। लेकिन अगर उन्हीं की बातों पर कुछ देर के लिए भरोसा किया जाए तो बड़ा सवाल ये उठता है कि गड़बड़ी के दौरान उनके बूथ लेबल के कार्यकर्ता और एजेंट कहां थे। इसका एक अर्थ ये भी है कि कांग्रेस केवल कागजों पर काम करती है।
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क्या है पूरा मामला
मामला कुछ यूं है कि राहुल गांधी ने एक दिन पहले गुरुवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कथित वोट चोरी के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया और दावा किया कि उन्हें चुनाव आयोग के अंदर से ही इसकी जानकारी मिली है। लेकिन, जब पत्रकारों ने उनसे इस मामले पर कोर्ट जाने को लेकर सवाल किया तो वे बगलें झांकने लगे। कोर्ट जाने के सवाल पर राहुल गांधी कोई स्पष्ट जबाव नहीं दे सके।
उल्लेखनीय है कि कांग्रेस ने कथित वोट चोरी के इस मुद्दे को बिहार में चुनाव आयोग के द्वारा एसआईआर प्रक्रिया शुरू करने के बाद ही उठाया। इससे भी उनकी मंशा पर सवाल खड़ा होता है।












