ट्रंप का अमेरिका को फिर से महान बनाने का नारा तो सुना ही होगा। वो कहते हैं कि दूसरे देशों पर भारी टैरिफ लगाकर अमेरिकी सरकार की कमाई बढ़ेगी और आम लोग खुशहाल होंगे। लेकिन येल यूनिवर्सिटी की एक रिपोर्ट कहती है कि ये टैरिफ अमेरिका में ही 9 लाख लोगों को गरीबी की चपेट में धकेल सकते हैं। ये बातें सुनकर लगता है जैसे ट्रंप की नीतियां उल्टी काम कर रही हों। अब सवाल ये है कि इसका भारत पर क्या असर पड़ेगा?
अमेरिका में टैरिफ का बुरा असर
ट्रंप ने कई देशों से आने वाले सामान पर ऊंचे टैरिफ लगाए हैं। उनका दावा है कि इससे अमेरिकी उद्योग मजबूत होंगे। लेकिन येल यूनिवर्सिटी के बजट लैब की रिपोर्ट चेतावनी देती है कि 2026 तक अमेरिका में गरीबी की रेखा से नीचे 8.75 लाख और लोग चले जाएंगे। ये आंकड़ा डराने वाला है ना? टैरिफ से सामान महंगा हो जाता है, जिससे आम अमेरिकी परिवारों का खर्चा बढ़ जाता है। नौकरियां तो बचानी थीं, लेकिन गरीबी बढ़ रही है। ट्रंप की ये नीति अमेरिका की अपनी अर्थव्यवस्था को ही नुकसान पहुंचा रही लगती है।
भारत पर टैरिफ का सीधा झटका
भारत के लिए अमेरिका का बाजार बड़ा है, लेकिन एक्सपोर्ट सिर्फ जीडीपी का 2 फीसदी ही है। फिर भी, ट्रंप ने भारत से आने वाले सामान पर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया है। इसमें रूस से तेल खरीदने के लिए 25 फीसदी अतिरिक्त चार्ज भी जोड़ दिया। इससे भारत के एक्सपोर्टरों को मुश्किल हो गई। खासकर सूरत जैसे शहरों में हीरा-ज्वेलरी, सीफूड और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 1.35 लाख नौकरियां चली गईं। कल्पना कीजिए, इतने परिवारों का क्या हाल होगा? ये लोग रोजगार खोकर परेशान हैं।
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निवेश पर अनिश्चितता का साया
ग्लोबल रेटिंग एजेंसी फिच ने भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.5 से बढ़ाकर 6.9 फीसदी कर दिया। उनका कहना है कि टैरिफ का सीधा असर कम है। लेकिन अनिश्चितता से निवेशक डर जाते हैं। भारत में विदेशी निवेश रुक सकता है, क्योंकि कोई नहीं जानता कि ट्रंप की नीतियां कब बदलेंगी। ये बाजार की स्थिरता को हिला देता है।
थरूर का तीखा कमेंट
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने ट्रंप को अस्थिर बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति को इतनी ताकत देकर गलती की। पिछले 44-45 राष्ट्र-presidents में कोई ऐसा नहीं था। थरूर ने CREDAI के कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत को एक्सपोर्ट मार्केट डाइवर्सिफाई करने की जरूरत है। यानी अमेरिका पर निर्भरता कम करो, दूसरे देशों की ओर रुख करो। फिच भी मानता है कि अनिश्चितता निवेश को प्रभावित करेगी।
















