लखनऊ । विगत कुछ दिनो से यूपी एसटीएफ को सूचना प्राप्त हो रही थी कि एनसीआर के जनपद गौतबुद्धनगर एवं गाजियाबाद क्षेत्र में एक गैंग सक्रिय हैं जो जनता के लोगों को अधिक धन देने का लालच देकर ठगी तथा साइबर फ्रॉड के माध्यम से व्यक्तियों के खाते में धन मंगाकर आर्थिक अपराध करने में संलिप्त है। एसटीएफ नोएडा की टीम को दिनांक 11 सितम्बर को ज्ञात हुआ कि इस गैंग के बाबा नाम के व्यक्ति द्वारा हरियाणा निवासी युनुस खान से ठगी की गयी है। काफी छानबीन करने के बाद एसटीएफ को गैंग को पकड़ने में सफलता प्राप्त हुई। एसटीएफ ने शुभम राज , प्रदीप कुमार, धीरज मिश्रा, सोनू कुमार, अमरजीत एवं अनुराग को अपराध में संलिप्तता के कारण गिरफ्तार किया।
फर्जी कूटरचित आधार कार्ड से फ्लैट किराये पर लेना
अभियुक्तों द्वारा छल करने के लिए विभिन्न सोसायटियों में फ्लैट किराये पर लिया गया था जिसमें गौर सिद्धार्थम सोसायटी, साया गोल्ड सोसायटी इन्दिरापुरम, प्रतीक सोसायटी, सिद्वार्थनगर गाजियाबाद, पंचशील ग्रीन टू ग्रेटर नोएडा वेस्ट, सूपर नोवा सुपरटेक सेक्टर 94 नोएडा तथा अंकुर विहार लोनी गाजियाबाद में फर्जी कूटरचित आधार कार्ड का प्रयोग करके फ्लैट किराये पर लिए गए थे। इन फ्लैट में लोगों को नोट बदलने के लिए बुलाया जाता था। अभियुक्त ठगी करके फ्लैट खाली करके अन्यत्र ठिकाना बदल लेते थे।
गिरफ्तार अभियुक्त शुभम राज का खुलासा
गिरफ्तार अभियुक्त शुभम राज ने पूछताछ में बताया कि उसकी उम्र लगभग 26 साल है और वह कक्षा 12 पास है। वर्ष 2019 में वह स्नातक की पढाई करने दिल्ली आया था परन्तु पढाई छोडकर प्राइवेट काम करने लगा था। वर्ष 2022 में बिहार में इसके मित्र धीरज ने इसकी मुलाकात सीतामढ़ी बिहार निवासी नसीम सिद्दीकी से कराई जो नोट बदलने के नाम पर ठगी के अपराध में संलिप्त था। अभियुक्त शुभम राज ने करीब एक वर्ष नसीम सिद्दीकी के साथ रहकर बड़े नोटों के बदले छोटे नोट ज्यादा देने का झांसा देकर ठगी करने का काम सीखा। इसके उपरान्त शुभम राज ने वर्ष 2023 में दिल्ली आकर इन्द्रमणी के साथ मिलकर एक गिरोह बनाया और भारत के विभिन्न स्थानों से झांसा देकर बड़े पैमाने पर ठगी का काम करने लगा। इस गैंग द्वारा प्रत्येक व्यक्ति से ठगी के लिए एक फ्लैट कूटरचित दस्तावेजों का प्रयोग कर किराये पर लिया जाता था और ठगी करने के पश्चात उस फ्लैट का तत्काल खाली कर देते थे।
ठगी का अनोखा तरीका और तख्त का जाल
इस गैंग द्वारा ठगी करने का एक अनोखा तरीका प्रकाश में आया। इसमें लोगों को यह कहकर लालच में फंसाया जाता था कि उनके पास 100 एवं 200 के नोट के करोड़ों रूपये हैं, उन्हें किसी राजनैतिक पार्टी को देना है, यह धन 500 के नोटों में बदलना है, अतः उनसे 500 के नोट एक निश्चित धनराशि के मंगाये जाते थे और उन्हें 100-200 के नोट उस धनराशि से डेढ गुना तक देने का लालच देकर अपने बताये फ्लैट पर बुला लिया जाता था, जहाँ पर पूर्व से नियोजित कमरे में एक तखतनुमा चौकी का प्रयोग किया जाता था जिसे बीच से काटकर एक छेद बनाया हुआ है इस तख्त को ऐसे स्थान पर रखा जाता था जहाँ तख्त के पीछे की दिवार में भी एक छेद बना लिया जाता था, एक व्यक्ति तख्त के ऊपर बैठकर बैंग में गड्डियों रखने का काम करता था तथा नोटों की असली गड्डियां चौकी के नीचे बैठे व्यक्ति को पकडा देता था तथा उससे कागज की गड्डियों लेकर बैग में रख देता था।
ग्राहकों को फंसाने की तरकीब
इस तख्त के सामने कुर्सियों पर ग्राहक को बैठाया जाता था तथा उससे मशीन से नोट गिनकर देने को कहते थे, उन्ही के आसपास 2-3 लोग उनका ध्यान भटकाने का काम करते थे। ग्राहक को बैग में नोटो की गड्डियों दिखाई जाती थी जबकि केवल ऊपरी परत पर ही असली नोट होते थे बाकी कागज की नोट के साईज की गड्डियों होती थी। इस ठगी का कार्य जादू के खेल की तरह Trick का प्रयोग कर किया जाता था जिसमें प्रत्येक व्यक्ति का हिस्सा तय होता था। लोगों को लाने वाले व्यक्ति को एजेन्ट कहते थे जो सोशल मीडिया एवं व्यक्तिगत सम्बन्धों का प्रयोग करके ग्राहक को फ्लैट पर लेकर जाते थे। इंस्ट्राग्राम, यू-ट्यूब एवं अन्य सोशल साइटों पर नोटों की गड्डियों की वीडियों डालकर नोट बदलने एवं अच्छा मुनाफा प्राप्त करने का प्रचार किया जाता था। यह ठगी का काम कैश के बदले कैश, अथवा RTGS के बदले कैश, USDT के बदले कैश के रूप में करते थे। इसके लिए बैंक के कई फर्जी एकाउन्ट प्रयोग में लाये जाते थे।
बैंक कर्मचारियों की संलिप्तता और साइबर फ्रॉड
इस गैंग के लिए बंधन बैंक, तकियापुर जनपद दानापुर बिहार के कर्मचारी तन्मय एवं एचडीएफसी बैंक, सोनपुर जनपद छपरा बिहार के कर्मचारी अमिताभ व आयुष मदद करते थे जिनको बदले में आर्थिक लाभ प्राप्त होता था। इस गैग से लगभग 100 बैंक एकाउन्ट की डिटेल प्राप्त हुई है जिन पर 25 से अधिक साइबर फ्रॉड की शिकायते होना संज्ञान में आया है, जिसमें लगभग 1 करोड़ 9 लाख 51 हजार 169 रूपयों की धोखाधडी रिपोर्ट की गयी है। इन एकाउन्ट में बहुत सारे म्यूल एकाउन्ट के रूप में लोनिंग और गैमिंग ऐप के लिए भी प्रयोग हुए हैं, जिनके बारे में गहराई से जानकारी की जा रही है। साइबर ठगी की दर्ज इन शिकायतों के निस्तारण हेतु अलग से विधिक कार्यवाही कराई जा रही है। जबकि व्यक्तिगत रूप से ठगे गये लोगों के बारे में जानकारी प्राप्त की जा रही है एंव पीड़ितों से शिकायतें प्राप्त की जा रही है।
कानूनी कार्रवाई और आगे की कार्यवाही
गिरफ्तार सभी अभियुक्तों के विरूद्ध थाना कविनगर जनपद गाजियाबाद में मु0अ0सं0 455/25 धाराा 318(4), 336(3), 338, 340(2), 3(5) 61 बी०एन०एस० एवं 3/25 शस्त्र अधिनियम का अभियोग पंजीकृत कराया गया है। इस गैंग के फरार सदस्यों के सम्बन्ध में अग्रिम वैधानिक कार्यवाही स्थानीय पुलिस द्वारा की जा रही है।

















