देश के नए उप राष्ट्रपति चुने गए सीपी राधाकृष्णन (67) ने अपने पद और गोपनीयता की शपथ ले ली है। उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में शपथ दिलाई। उपराष्ट्रपति बनने से पहले वह महाराष्ट्र के राज्यपाल थे। मंगलवार को इसके लिए हुई वोटिंग में उन्होंने विपक्ष के उम्मीदवार पूर्व न्यायधीश बी सुदर्शन रेड्डी को 152 वोटों से मात दी थी।
रिपोर्ट्स के अनुसार, चुनाव के दौरान कुल 788 सदस्यों में से 767 ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। इस दौरान एनडीए के कैंडिडेट को 452 वोट मिले, जबकि बी सुदर्शन रेड्डी को केवल 300 वोट ही हासिल हुए थे। इस तरह भाजपा समर्थित राधाकृष्णन ने जीत दर्ज की।
चुनाव की कहानी
राधाकृष्णन का रास्ता आसान नहीं था, लेकिन बीजेपी-नीत एनडीए की ताकत ने उन्हें मजबूती दी। उपराष्ट्रपति चुनाव जुलाई में जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद हुआ। राधाकृष्णन ने 452 वोट हासिल किए, जबकि विपक्ष के उम्मीदवार और पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज बी सुधर्शन रेड्डी को 300 वोट मिले। एनडीए के 427 सांसदों के अलावा वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के 11 सांसदों और कुछ छोटे दलों का समर्थन मिला, जो आधे से ज्यादा बहुमत (377) पार कर गया। यहां तक कि कुछ क्रॉस-वोटिंग की भी खबरें आईं। ये जीत राधाकृष्णन की लंबी राजनीतिक यात्रा का नतीजा लगी।
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कौन-कौन पहुंचे
शपथ ग्रहण समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खास तौर पर मौजूद थे, जो राधाकृष्णन को बधाई देते नजर आए। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और एम वेंकैया नायडू भी वहां थे, जो पुरानी यादें ताजा कर रहे थे। पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की मौजूदगी ने समारोह को और महत्वपूर्ण बना दिया। केंद्रीय मंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी जैसे बड़े नेता भी शामिल हुए। पूरा माहौल उत्साह भरा था, जहां हर कोई नए उपराष्ट्रपति की जिम्मेदारियों पर नजरें गड़ाए था।
संघ प्रचारक से उपराष्ट्रपति तक
राधाकृष्णन की कहानी संघ की जड़ों से शुरू होती है। तमिलनाडु के एक वेटरन बीजेपी नेता, वो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े रहे। उन्होंने कोयंबटूर से दो बार सांसद का चुनाव लड़ा। पहले जनसंघ में थे, फिर बीजेपी में आए और तमिलनाडु इकाई के प्रमुख भी बने। हाल ही में वो महाराष्ट्र के राज्यपाल थे। गुरुवार को उन्होंने राज्यपाल पद से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति मुर्मू ने गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को महाराष्ट्र का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया, जब तक नया अपॉइंटमेंट न हो।
















