येरुशलेम में हुए आतंकी हमले पर मूक बने बैठे हॉलीवुड कलाकारों ने अपने दोहरे चेहरे को सामने रखते हुए बड़ा कदम उठाया है। करीब 1800 से अधिक कलाकारों और फिल्म निर्माताओं ने इजरायली फिल्म उद्योग का बहिष्कार करने का ऐलान किया है। इन सभी का आरोप है कि इजरायली फिल्म इंडस्ट्री गाजा में “नरसंहार और रंगभेद” में शामिल है। अपने इस ऐलान को लेकर एक खुला पत्र भी जारी किया गया है। इसमें ऑलिविया कोलमैन, मार्क रफालो, एवा डुवर्ने, टिल्डा स्विंटन, और जेवियर बार्डेम जैसी हॉलीवुड हस्तियां शामिल हैं।
द गॉर्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, इन कलाकारों ने साफ कहा कि वे उन इजरायली फिल्म संस्थानों—जैसे फिल्म फेस्टिवल, सिनेमाघर, प्रसारणकर्ता और प्रोडक्शन कंपनियों—के साथ काम नहीं करेंगे, जो उनके अनुसार “फिलिस्तीनी लोगों के खिलाफ नरसंहार और रंगभेद” में शामिल हैं। इस पहल को 1980 के दशक में दक्षिण अफ्रीका के रंगभेद के खिलाफ चली फिल्ममेकर्स यूनाइटेड अगेंस्ट अपार्थाइड नामक मुहिम से प्रेरणा मिली है, जिसमें मार्टिन स्कॉर्सेसी और जोनाथन डेम जैसे फिल्म निर्माताओं ने दक्षिण अफ्रीका में अपनी फिल्में दिखाने से मना कर दिया था।
फिलिस्तीन समर्थक इन अभिनेताओं ने पत्र में लिखा, “इस संकट के समय में, जब कई सरकारें गाजा में हो रही तबाही को बढ़ावा दे रही हैं, हमें अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी और इस भयावहता में शामिल होने से बचना होगा।”
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हस्ताक्षर करने वाली प्रमुख हस्तियाँ
इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में कई बड़े नाम शामिल हैं। ब्रिटिश सितारे जैसे ऑलिविया कोलमैन, रिज अहमद, टिल्डा स्विंटन, जो आल्विन, और एमी लू वुड ने इसमें हिस्सा लिया। अमेरिकी एक्टर मार्क रफालो, आयो एडेबिरी, सिन्थिया निक्सन, और एमा स्टोन भी इस सूची में हैं। इसके अलावा, स्पेनिश एक्टर जेवियर बार्डेम, मैक्सिकन फिल्म निर्माता गार्सिया बर्नाल, और निर्देशक केन लोच, योर्गोस लैंथिमोस, और एवा डुवर्ने जैसे नाम भी शामिल हैं। इन सभी ने मिलकर यह संदेश दिया कि सिनेमा की ताकत को लोगों की सोच बदलने में इस्तेमाल करना चाहिए।
बहिष्कार का दायरा
यह बहिष्कार खास तौर पर उन इजरायली संस्थानों पर केंद्रित है, जो कथित तौर पर मानवाधिकार उल्लंघन में शामिल हैं। इसमें जेरूसलम फिल्म फेस्टिवल, हाइफा इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, डोकाविव, और TLVfest जैसे प्रमुख आयोजन शामिल हैं। पत्र में यह भी साफ किया गया कि यह बहिष्कार इजरायली व्यक्तियों को नहीं, बल्कि उन संस्थानों को निशाना बनाता है, जो “नरसंहार को सही ठहराने या उसका समर्थन करने” में शामिल हैं।
इस पत्र में यह भी दावा किया गया है कि गाजा में 23 महीनों से इजरायल की सैन्य कार्रवाई में 64,500 से ज्यादा लोग मारे गए हैं, जिनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे हैं। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने भी माना है कि गाजा में नरसंहार का खतरा “विश्वसनीय” है और इजरायल का फिलिस्तीनी क्षेत्रों पर कब्जा अवैध है।

















