बुरे फंसे Trump, अब Britain के पूर्व विदेश मंत्री बोले-India पर इतना टैरिफ लगाना America की भूल!
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बुरे फंसे Trump, अब Britain के पूर्व विदेश मंत्री बोले-India पर इतना टैरिफ लगाना America की भूल!

भारत पर टैरिफ लगाना न केवल व्यापार की दृष्टि से अनुचित है, बल्कि यह अमेरिका की वैश्विक छवि को भी नुकसान पहुंचाता है। विलियम हेग जैसे वरिष्ठ राजनेता की आलोचना इस बात का संकेत है कि पश्चिमी देशों में भी ट्रंप की नीति को लेकर असहमति है

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Sep 4, 2025, 12:18 pm IST
in विश्व, विश्लेषण
राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (File Photo)

राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (File Photo)

भारत जैसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक और सभ्य देश पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाकर उसे अपने दबाव में लेने की अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चाल अब उनके ही गले की फांस बनती जा रही है। पश्चिम के ही कई ताकतवर देश भारत के प्रति अपना समर्थन जता रहे हैं और ट्रंप की ऐसी नीति की जमकर आलोचना कर रहे हैं। इस कड़ी में नए जुड़े हैं ब्रिटेन के पूर्व विदेश मंत्री विलियम हेग। उन्होंने कहा है कि ट्रंप का भारत पर यह टैरिफ लगाना किसी दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता है। इतना ही नहीं ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति की जर्मनी, फ्रांस और रूस सहित अनेक देश भर्त्सना कर रहे हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा भारत पर 25 से 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की घोषणा ने वैश्विक व्यापार जगत में हलचल मचा रखी है। ट्रंप का तर्क था कि भारत अमेरिका से अधिक टैरिफ वसूलता है और यह असंतुलन अब स्वीकार्य नहीं है। साथ ही, यूक्रेन युद्ध के बहाने उन्होंने भारत और रूस में दरार डालने का भी इस रास्ते प्रयास किया था जो हाल में चीन की एससीओ बैठक में औंधे मुंह जा गिरा दिखता है। रूस और भारत ही नहीं, अब चीन भी नई संभावनाओं पर आगे बढ़ने के लिए साथ आ मिला है। ट्रंप के उक्त कदम को खुद ​पश्चिमी देश एकतरफा और भेदभावपूर्ण बता रहे हैं।

ब्रिटेन के पूर्व विदेश मंत्री विलियम हेग

जर्मनी के मशहूर अखबार Frankfurter Allgemeine Zeitung ने हाल में एक रिपोर्ट में खुलासा किया था कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चार बार फोन किया, लेकिन मोदी ने उनसे बात करने से इनकार कर दिया। अखबार ने ट्रंप की टैरिफ नीति को ‘शर्मनाक दबाव’ करार देते हुए छापा कि अमेरिका भारत को अपनी अर्थव्यवस्था खोलने के लिए मजबूर कर रहा है, जो एक स्वतंत्र राष्ट्र के लिए किसी तरह उचित नहीं है। ट्रंप ने पहले मोदी को ‘महान नेता’ कहा, लेकिन बाद में भारत को ‘मृत अर्थव्यवस्था’ कहकर अपमानित किया। यह भाषा जर्मन विश्लेषकों को अस्वीकार्य लगी और उन्होंने इसे अमेरिका की रणनीतिक विफलता बताया है।

भारत एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक राष्ट्र है, जिसे टैरिफ के जरिए दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि भारत एक महान सभ्यता है और उसके साथ समानता के आधार पर व्यवहार किया जाना उचित है यानी ट्रंप को इस पर थानेदारी नहीं दिखानी चाहिए।
— विलियम हेग, ब्रिटेन के पूर्व विदेश मंत्री

उधर यूरोपीय संघ के व्यापारिक गलियारों में यह चर्चा चल रही है कि ट्रंप की टैरिफ नीति भारत जैसे लोकतांत्रिक साझेदार के साथ किसी तरह सही नहीं कही जा सकती। फ्रांस के कुछ विश्लेषकों ने यह संकेत दिया है कि भारत पर टैरिफ लगाने से अमेरिका की हिन्द—प्रशांत रणनीति कमजोर पड़ सकती है, क्योंकि भारत फ्रांस का भी एक प्रमुख रक्षा और व्यापारिक सहयोगी है। भारत पर टैरिफ लगाने को यूरोपीय विश्लेषकों ने भूराजनीतिक भूल बताया है, जिससे अमेरिका एशिया में अपने सहयोगियों को खो सकता है।

ब्रिटेन के पूर्व विदेश मंत्री विलियम हेग ने तो ट्रंप की नीति की तीखी आलोचना करते हुए कहा है कि भारत एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक राष्ट्र है, जिसे टैरिफ के जरिए दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि भारत एक महान सभ्यता है और उसके साथ समानता के आधार पर व्यवहार किया जाना उचित है यानी ट्रंप को इस पर थानेदारी नहीं दिखानी चाहिए। हेग ने​ सावधान किया है कि इस तरह की धमकी भारत को पीछे हटने के बजाय वैकल्पिक साझेदारों की ओर मोड़ सकती है, जिससे अमेरिका की रणनीतिक स्थिति कमजोर हो सकती है। और चीन की एससीओ बैठक में ठीक यही देखने में आया है।

ट्रंप की टैरिफ नीति का असर केवल भारत तक सीमित नहीं रहा है। जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन और इटली जैसे देशों ने भी अमेरिका के लिए डाक सेवाएं अस्थायी रूप से बंद की हुई हैं।यह कदम अमेरिकी टैरिफ नियमों के विरोध में ही उठाया गया, जिसमें 800 डॉलर तक के सामान पर मिलने वाली छूट को समाप्त कर दिया गया है। यूरोप की प्रमुख शिपिंग कंपनियों, जैसे डीएचएल ने भी अमेरिका को पार्सल भेजना बंद कर दिया है, जिससे यह साफ हो गया है कि ट्रंप की नीति को वैश्विक समर्थन नहीं मिल रहा है।

चूंकि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप को नोबुल सम्मान के लिए नामांकित नहीं किया इसलिए ट्रंप भारत को टैरिफ बढ़ाकर भयातुर करना चाहते हैं। – रो खन्ना, अमेरिकी सांसद

भारत अमेरिका को दवाएं, ऑटो पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और आभूषण जैसे उत्पाद निर्यात करता है। अमेरिका द्वारा इन पर टैरिफ बढ़ाने से ये भारतीय उत्पाद अमेरिका में महंगे हो जाएंगे। इतना ही नहीं, वियतनाम, इंडोनेशिया जैसे देश प्रतिस्पर्धा में आगे निकल सकते हैं। अमेरिकी कंपनियों के ऑर्डर अनिश्चितता के कारण ‘होल्ड’ पर चले गए हैं। इससे भारत की अर्थव्यवस्था पर कुछ मात्रा में उलटा असर पड़ सकता है, लेकिन मोदी सरकार की तैयारी और कदमों को देखते हुए लगता नहीं कि भारत इससे विशेष प्रभावित होगा।

भारत रूस और चीन के साथ एक समान स्तर पर आकर संबंधों को आगे ले जा रहा (File Photo)

पूर्व ब्रिटिश मंत्री हेग ने यह भी संकेत दिया है कि ट्रंप की पाकिस्तान से बढ़ती नजदीकी भारत को अमेरिका से दूर कर सकती है। यदि भारत को अमेरिका से समान व्यवहार नहीं मिलता, तो वह चीन या रूस जैसे देशों की ओर झुक सकता है, जिससे पश्चिमी देशों की सामरिक स्थिति कमजोर होगी। लेकिन यहां हेग कुछ अंश में सही इसलिए नहीं हैं, क्योंकि भारत रूस और चीन की ओर झुक नहीं रहा है, बल्कि एक समान स्तर पर आकर संबंधों को आगे ले जा रहा है।

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है, लेकिन कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सहमति नहीं बन पा रही है। भारत ने कोटा आधारित प्रणाली का प्रस्ताव दिया है, जो ब्रिटेन के साथ हुए समझौते की तर्ज पर ही है। यह दिखाता है कि भारत बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन दबाव की राजनीति स्वीकार नहीं करेगा।

भारत पर टैरिफ लगाना न केवल व्यापार के नजरिए से अनुचित है, बल्कि यह अमेरिका की वैश्विक छवि को भी नुकसान पहुंचाता है। विलियम हेग जैसे वरिष्ठ राजनेता की आलोचना इस बात का संकेत है कि पश्चिमी देशों में भी ट्रंप की नीति को लेकर असहमति है। जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों की प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि एकतरफा टैरिफ नीतियां वैश्विक सहयोग को कमजोर करती हैं।

यहां अमेरिकी सांसद रो खन्ना की टिप्पणी भी गौर करने लायक है। उन्होंने कहा कि ‘चूंकि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप को नोबुल सम्मान के लिए नामांकित नहीं किया इसलिए ट्रंप भारत को टैरिफ बढ़ाकर भयातुर करना चाहते हैं।’ लेकिन आज भारत एक लोकतांत्रिक, स्वतंत्र और उभरती हुई वैश्विक शक्ति है। उसके साथ सम्मानजनक और समानता पर आधारित व्यवहार ही दीर्घकालिक साझेदारी की नींव रख सकता है। टैरिफ के ज़रिए दबाव बनाना न केवल ट्रंप प्रशासन की एक असफल रणनीति साबित हो चुकी है, बल्कि यह निकट भविष्य में अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग भी करती दिख रही है।

Topics: trumpgermanyIndiaमोदीट्रंपटैरिफamerican tariffभारतbritainModiFrance
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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