उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले से एक चिंताजनक खबर सामने आई है, जहां एक इमाम द्वारा राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगे) के अपमान का मामला प्रकाश में आया है। बताया जा रहा है कि संदीपन घाट थाना क्षेत्र के मीनारा मस्जिद की छत पर तिरंगे से ऊपर इस्लामी झंडा फहराया गया। 31 अगस्त को चायल क्षेत्राधिकारी अभिषेक सिंह और मूरतगंज चौकी प्रभारी अजीत सिंह गश्त पर थे। इस दौरान उन्होंने देखा कि मीनारा मस्जिद की छत पर इस्लामी झंडा राष्ट्रीय ध्वज से ऊंचा लगाया गया है।
भारतीय ध्वज संहिता के अनुसार, किसी भी अन्य झंडे को राष्ट्रीय ध्वज से ऊपर फहराना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। यह तिरंगे के सम्मान और गौरव के खिलाफ माना जाता है।
पुलिस की कार्रवाई- पुलिस अधिकारियों ने तुरंत इस्लामी झंडे को मस्जिद की छत से हटवा दिया। चौकी प्रभारी की ओर से दी गई तहरीर के आधार पर संदीपन घाट थाने में मस्जिद के इमाम इम्तियाज अहमद के खिलाफ राष्ट्र गौरव अपमान-निवारण अधिनियम, 1971 की धारा 2 के तहत मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल इमाम फरार हैं और पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई है। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। वे तिरंगे का अपमान करने वाले दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह इस प्रकार का पांचवां मामला है। इससे पहले भी कौशांबी जिले के पश्चिम शरीरा के जाफरपुर महावां में इसी तरह की घटना सामने आ चुकी है।
लखीमपुर खीरी में फलस्तीन का झंडा फहराने का मामला- एक अन्य गंभीर मामला उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के फूल बेहड़ थाना क्षेत्र से आया है। आरोप है कि लखहा अलीगंज गांव में स्थित एक सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय की छत से राष्ट्रीय ध्वज को हटाकर वहां कथित रूप से फलस्तीन का झंडा फहराया गया। इस घटना में पुलिस ने सद्दाम, बऊरा और अनन्ने नाम के युवकों सहित कुल सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। सभी आरोपी फरार बताए जा रहे हैं। मामले की जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। तिरंगा सिर्फ कपड़ा नहीं, यह हमारे देश की पहचान, एकता और आज़ादी का प्रतीक है। इसका अपमान संविधान और देश दोनों का अपमान है। संविधान के अनुच्छेद 51A के अनुसार, हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करे। राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने पर भारतीय कानून में कड़ी सजा का प्रावधान है। राष्ट्र गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की सजा या जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
















