बंगाल में टीएमसी के विधायक मनोरंजन ब्यापारी को लेकर बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन ने बहुत ही चौंकाने वाला पोस्ट किया है। एक्स पर अपनी एक पोस्ट में उन्होंने लिखा कि पश्चिम बंगाल से एक विधायक मनोरंजन ब्यापारी ने कहा कि बांग्लादेश से हिन्दू इसलिए नहीं भागते हैं कि मुस्लिम उनका उत्पीड़न या शोषण कर रहे हैं, बल्कि वे इसलिए भारत आते हैं क्योंकि वे बांग्लादेश में अपराध करके भागते हैं।
उन्होंने पूछा कि आखिर विधायक ने इतना बड़ा झूठ क्यों बोला? क्या इसका मतलब यह है कि वे अक्सर झूठ बोलते रहते हैं? उन्होंने कहा कि विधायक दावा करते हैं कि उन्होंने जेल में अक्षर ज्ञान लिया और फिर दर्जन भर किताबें लिखीं।
Manoranjan Byapari, an MLA from West Bengal, has said that Hindus do not flee to India from Bangladesh due to persecution by Muslims; rather, according to him, they escape to India under the cover of darkness after committing crimes in Bangladesh. Why did he utter such a blatant…
— taslima nasreen (@taslimanasreen) September 1, 2025
गौरतलब है कि मनोरंजन ब्यापारी एक लेखक हैं और अक्सर उनके बयान वायरल होते रहते हैं। ममता बनर्जी के वे बहुत निकट हैं और उनके कई वीडियोज़ वायरल होते रहते हैं। वर्ष 2023 में उनका एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वे कहते हुए नजर आ रहे हैं कि “एक बिहारी सौ बीमारी” और उस वीडियो को पोस्ट करने वाला का दावा था कि विधायक यह कह रहे हैं कि जो भी लोग बंगाल से प्यार करते हैं, उन्हें बिहारियों की बीमारी से राज्य को आजाद करवाना चाहिए।
What is hate speech?
This was TMC MLA Manoranjan Byapari
He said "Ek Bihari 100 Bimari"
He said that those who love Bengal should free the state from the "disease" of Biharis
He ended his speech with "Jai Mamata"
Do you remember any media outrage back then? pic.twitter.com/u7gcpFhAIQ
— Abhishek (@AbhishBanerj) September 24, 2023
बंगाल के लिए अलग झंडे की कर चुके हैं मांग
इसके साथ ही इस वर्ष फरवरी में उन्होनें बंगाल के लिए एक अलग झंडे की मांग की थी। इसे लेकर भी काफी हंगामा हुआ था।
तस्लीमा ने अपनी पोस्ट में लिखा कि हालांकि लोग विधायक के इस दावे पर विश्वास नहीं करते हैं कि उन्होंने जेल में ही पढ़ाई की थी तो क्या उनकी यह सूचना भी गलत है? उन्होनें आगे लिखा “मैं उनसे एक बार मिली हूँ। उन्होंने (विधायक) बताया कि जब से उन्होंने “आमार मेयेबेला” (my girlhood) पढ़ी है, तब से वे मुखर होकर और निडर होकर लिख रहे हैं? क्या यह निडर होने का उदाहरण हैं? क्या उनमें बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के बारे में कटु सत्य कहने का साहस नहीं था?”
पहले भी रहे हैं चर्चा में
विधायक मनोरंजन ब्यापारी को लेकर वर्ष 2023 में चर्चाओं का बाजार गरम हो गया था, जब उन्होनें एक फ़ेसबुक पोस्ट में यह कहा था कि राजनीति में आना उनकी गलती थी, क्योंकि वे जनता की सेवा नहीं कर पा रहे थे। हालांकि, बाद में उन्होनें यह भी कहा था कि बंगाल की मुख्यमंत्री ने लोगों की पीड़ा को दूर करने के लिए अनेक मानवीय कदम उठाए हैं।
बांग्लादेश के हिंदुओं के अत्याचारों पर बात कहने या लिखने का साहस लेखकों ने नहीं दिखाया है: यह बात पूरी तरह से सत्य है कि बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रहे अत्याचारों को लेकर कथित प्रगतिशील लेखक वर्ग पूरी तरह से उदासीन है। उसने पहले तो इसे नकारने का प्रयास किया। फिर जब लगा कि ऐसा नहीं हो पाएगा कि वे इस तथ्य को नकार दें कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर लगातार हमले हो रहे हैं, मंदिरों को तोड़ा जा रहा है और साथ ही हिन्दू ही नहीं बल्कि मुस्लिम लड़कियों को भी यौन हिंसा का सही बनाया जा रहा है, तो उन्होंने दबे स्वरों में यह स्वीकारना आरंभ किया कि हिंदुओं पर अत्याचार हो तो रहे हैं, मगर ये अत्याचार धार्मिक पहचान के आधार पर नहीं हो रहे हैं, अपितु यह राजनीतिक हैं, क्योंकि हिन्दू अवामी लीग के समर्थक माने जाते हैं।
और यह जो भी कुछ हो रहा है, वह और कुछ नहीं बल्कि राजनीतिक बदला है, लोग शेख हसीना से नाराज हैं और इसलिए वे उनके समर्थकों से बदला ले रहे हैं।
हालांकि, यह तर्क देने वाले यह बताने मे विफल रहे कि यदि हिन्दू मंदिरों पर राजनीतिक प्रतिशोध के चलते हमले हो रहे हैं, तो फिर अवामी लीग के मुस्लिम कार्यकर्ताओं पर तो हमले हुए मगर उनके मजहबी स्थलों पर नहीं?
हिन्दी और बंगाली सहित किसी भी भाषा के लेखक ने बांग्लादेशी हिंदुओं के साथ हुए इतने वर्षों से चले आ रहे अत्याचारों पर मुंह नहीं खोला है।

















