गत दिनों जयपुर में अखंड भारत स्मृति दिवस के उपलक्ष्य में एक कार्यक्रम हुआ। इसे संबोधित करते हुए अखिल भारतीय साहित्य परिषद के सह संगठन मंत्री मनोज कुमार ने कहा कि वंदेमातरम गीत के विभाजन को स्वीकार कर भारत विभाजन की नींव रख दी गई थी, देश का विभाजन बाद में हुआ, उससे पहले विचारों में विभाजन हो गया था।
परंतु विभाजन के जितने जिम्मेदार गांधी थे, उतने ही जिम्मेदार अंग्रेज, तत्कालीन राजनीतिक नेतृत्व एवं उस समय का समाज भी था। भारत विभाजन की पृष्ठभूमि में अंग्रेजों द्वारा स्थापित तीन संस्थाएं अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, मुस्लिम लीग एवं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भी थी।
उन्होंने कहा कि पिछले पांच-छह दशक में भारत विभाजन के विषय पर पर्याप्त साहित्य सभी विधाओं में सृजित हुआ है। प्रमुख रूप से इसके तीन प्रकार हैं- एक विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित; दूसरा विभाजन के दर्द एवं पीड़ा पर आधारित एवं तीसरा विस्थापितों की सुरक्षा, सेवा व अविभाजित भारत की संभावनाओं पर, आज आवश्यकता है इस साहित्य को फिर से देखा जाए, चर्चा की जाए।
14वीं तवांग तीर्थ-यात्रा 19 से 25 नवंबर तक होगी
भारत-तिब्बत सहयोग मंच के तत्वावधान में होने वाली तवांग तीर्थ यात्रा इस वर्ष 19 से 25 नवंबर तक होगी। बता दें कि यह यात्रा 2012 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं भारत तिब्बत सहयोग मंच के मार्गदर्शक श्री इन्द्रेश कुमार ने शुरू की थी।
तवांग तीर्थ-यात्रा के संबंध में भारत—तिब्बत सहयोग मंच के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री एवं तवांग तीर्थयात्रा समिति के संयोजक पंकज गोयल का कहना है कि यह कोई सामान्य यात्रा नहीं है, बल्कि यह एक विशेष यात्रा है। इस यात्रा में भारत की आत्मा रची-बसी हुई है।
यह यात्रा राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, राष्ट्रीय एकता-अखंडता, सनातन बौद्ध समन्वय एवं देशभक्ति से ओतप्रोत है या यूं कहें कि समग्र दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।
इस यात्रा के माध्यम से संपूर्ण भारत के लोगों को पूर्वोत्तर भारत को जानने एवं समझने का अवसर प्राप्त होता है। अरुणाचल प्रदेश के अंतिम जिले तवांग में बुमला सीमा पर तीर्थयात्री जाते हैं और वहां पहुंच कर स्थानीय लोगों के साथ मिलकर भारत मां यानी भारत भूमि का पूजन एवं वंदन करते हैं।

















