क्या सरस्वती शिशु मंदिर हाई स्कूल अल्पसंख्यक स्कूल या मदरसा हो सकता है? यह बात उन अधिकारियों के संज्ञान में आई है जो केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित स्कूलों को छात्रवृत्ति देते हैं। जिसकी सूचना मिलने पर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने विशेष सचिव अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को गहनता से जांच के आदेश दिए थे। बाद में सीएम पुष्कर धामी ने इस पर एसआईटी गठित करने के निर्देश जारी किए थे। शासन ने डीजीपी को इस बारे में अधिकारी नियुक्त करने को कहा था। जिसके बाद पुलिस महानिरीक्षक कानून व्यवस्था डॉ. नीलेश भरणे को एसआईटी का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी गई है। आईजी के साथ हर जिले के पुलिस कप्तान, पीएचक्यू से एक पुलिस उपाधीक्षक और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के एक अधिकारी की टीम बनाई गई है।
जानकारी के अनुसार हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र रावत ने भी यह मुद्दा लोकसभा में उठाया था, जिस पर अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री डॉ. किरेन रिजिजू ने कहा था कि उत्तराखंड समेत अन्य राज्यों में भी ऐसी शिकायतें मिली हैं, जिन पर राज्य सरकार के सहयोग से जांच की जा रही है। उल्लेखनीय है कि उधम सिंह नगर जिले में 2021-2022 और 2022-2023 के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर पंजीकृत अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति आवेदकों की प्रामाणिकता की जांच के लिए उधम सिंह नगर जिले के 796 बच्चों के बारे में दस्तावेजी जानकारी मांगी गई थी।
इनमें से 6 मदरसों/शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ रहे 456 बच्चों की जानकारी संदिग्ध पाई गई है। खास बात यह है कि इन विद्यालयों में सरस्वती शिशु मंदिर हाईस्कूल किच्छा का नाम भी शामिल है। जानकारी के अनुसार, इस मामले में गड़बड़झाला यहीं से सामने आया है क्योंकि पहली बात तो यह कि सरस्वती शिशु मंदिर अल्पसंख्यक विद्यालय नहीं है और दूसरी बात यह कि इसका संचालक मोहम्मद शारिक-अतीक बताया जा रहा है। राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल के अनुसार, यहां 154 मुस्लिम बच्चे पढ़ रहे हैं।
नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल पर ये नाम देखकर सरकार भी हैरान है, जिसके बाद मुख्यमंत्री धामी ने गहनता से जांच के निर्देश दिए हैं। जानकारी के अनुसार, काशीपुर के नेशनल एकेडमी जेएमवाईआईएचएस और उसके निदेशक गुलशफा अंसारी में पढ़ रहे 125 मुस्लिम बच्चों, मदरसा अल जामिया उल मदरिया और उसके निदेशक मोहम्मद फैजान के 27 बच्चों के सत्यापन के निर्देश जारी किए गए हैं। इसके अलावा मदरसा अलबिया रफीक उल उलूम घनसारा बाजपुर के संचालक जावेद अहमद और यहां के 39 बच्चों, गदरपुर के मदरसा जामिया आलिया के 24 बच्चे जो संभवतः इसी जावेद अहमद के नाम पर हैं और मदरसा जामिया रजा उल उलूम बाजपुर के संचालक 85 बच्चों और यहां के संचालक इरशाद अली के दस्तावेजों की जांच के निर्देश दिए गए हैं।
सचिव अल्पसंख्यक कल्याण द्वारा ऊधमसिंह नगर की जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी नंदिनी सिंह को इन सभी मामलों की गहनता से जांच करने की जिम्मेदारी दी गई।
क्या कहते हैं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते?
सरस्वती शिशु मंदिर के नाम पर एक विशेष समूह द्वारा अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति प्राप्त करने का मामला प्रकाश में आने के बाद, अन्य मदरसों द्वारा राष्ट्रीय छात्रवृत्ति के लिए किए गए आवेदनों पर भी संदेह उत्पन्न हो गया है। माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा इस मामले की गहन जाँच के निर्देश प्राप्त हुए हैं। पूरे प्रदेश में इस पर जाँच की जा चुकी है और साथ ही केंद्र सरकार के मंत्रालय से भी पत्राचार किया जा रहा है। अब आगे की जाँच के लिए एक एसआईटी का गठन किया गया है जिसकी ज़िम्मेदारी पुलिस महानिरीक्षक को दी गई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बयान
नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल में दी गई आवेदकों की जानकारी संदिग्ध प्रतीत हो रही है, सरस्वती शिशु मंदिर के नाम पर छात्रवृत्ति पर सवाल उठे हैं, जिसकी जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है। सरकार चाहती है कि जांच जल्द पूरी हो।

















