उच्चतम न्यायालय की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से राष्ट्रपति और राज्यपालों के समक्ष विधेयकों को प्रस्तुत करने पर संविधान के अनुच्छेद 200 के तहत संवैधानिक विकल्पों पर भेजे गए रेफरेंस पर बुधवार को दूसरे दिन की सुनवाई पूरी कर ली। सुनवाई आज यानी 21 अगस्त को भी जारी रहेगी।
बुधवार को सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने पूछा कि क्या देश संविधान निर्माताओं की इस अपेक्षा पर खरा उतरा है कि मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच आपसी समन्वय रहेगा? क्या राज्यपाल और मुख्यमंत्री विभिन्न मसलों को आपसी सामंजस्य के जरिये सुलझाते रहे हैं? उच्चतम न्यायालय
ने ये सवाल तब किया जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अपनी दलीलों के समर्थन में राज्यपाल की भूमिका को लेकर संविधान सभा की बैठक में हुई चर्चा का हवाला दिया। मेहता ने कहा कि राज्यपाल का पद कोई राजनीति से रिटायर्ड हो चुके लोगों को शरण देने के लिए बना कोई पद नहीं है बल्कि इसकी एक अपनी अहमियत है। संविधान ने राज्यपाल को कुछ विशेष शक्तियां और जिम्मेदारी दी है।
मेहता ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 200 के तहत राज्यपाल के पास चार विकल्प हैं। सहमति देना, सहमति रोक देना, विधेयक को सुरक्षित रखना और विधेयक को राष्ट्रपति के पास विचार के लिए भेज देना। अगर राज्यपाल ये कहे कि वो विधेयक को रोक रहे हैं इसका मतलब ये है कि विधेयक का वजूद खत्म हो गया। उन्होंने कहा कि अगर सहमति रोक दी गई उस स्थिति में राज्यपाल को विधेयक पर दोबारा विचार करने के लिए वापस विधानसभा भेजने की जरुरत नहीं है। तब चीफ जस्टिस ने पूछा कि अगर ऐसा होगा तब तो राज्यपाल किसी विधेयक को अनिश्चित काल के लिए रोके रख सकता है। तब मेहता ने कहा कि इस पर संविधान ने राज्यपाल को विवेक का अधिकार दिया है। तब न्यायालय ने कहा कि क्या हम राज्यपाल को पूर्ण शक्ति नहीं दे रहे हैं ताकि कोई अपील भी नहीं कर सके। क्या बहुमत से चुनी गई सरकार राज्यपाल की मनमर्जी से ही चलेगी।
उच्चतम न्यायालय ने 19 सितंबर को अटार्नी जनरल से पूछा था कि अगर राज्यपाल लंबे समय तक विथेयक को लंबित रखते हैं तो उस पर क्या होना चाहिए। उल्लेखनीय है कि, संविधान बेंच ने 22 जुलाई को केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया था। संविधान बेंच में चीफ जस्टिस के अलावा जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस एएस चंदुरकर और जस्टिस पीएस नरसिम्हा शामिल हैं।
















