दो महीने के अंतर पर दो बार अमेरिका बुलाए गए जिन्ना के देश का ‘फील्ड मार्शल’ असीम मुनीर शायद किसी भुलावे में आकर फर्जी तैश में आकर दिखा रहा है। उसे शायद लग रहा हो कि वह राष्ट्रपति ट्रंप का पसंदीदा हो गया है, लेकिन असल में ट्रंप की असली मंशाएं क्या हैं, यह न वह जानता है, न उसके देश के नेता। इसी तैश में मुनीर जो मुंह में आ रहा है, बोले जा रहा है। वह कभी परमाणु हमले की धमकियां दे रहा है तो कभी पाकिस्तान की तबाही पर ‘आधी दुनिया को खत्म करने’ की बहकी बातें कर रहा है। भारत द्वारा सिंधु जल संधि निरस्त किए जाने से भी जिन्ना के देश की बेचैनी बढ़ रही है, यह मुनीर की बयानबाजी से साफ पता चलता है।
पाकिस्तानी ‘फील्ड मार्शल’ असीम मुनीर द्वारा अमेरिका की धरती से भारत को दी गई परमाणु धमकी हैरान करने वाली है। यह दक्षिण एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखी ता रही है।
असीम मुनीर ने अमेरिका के टाम्पा में आयोजित एक ब्लैक-टाई डिनर में कल कहा कि यदि उनके जिन्ना के देश को भारत से अस्तित्व का खतरा महसूस हुआ, तो वह “आधी दुनिया को अपने साथ ले डूबेगा”। उनका यह बयान ऐसे वक्त पर आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव चल रहा है, जिसे शायद मुनीर अपनी कूटनीतिक जीत मान कर सीना फुला रहे हैं।

यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि पहली बार किसी देश के सेना प्रमुख ने अमेरिकी धरती से किसी तीसरे देश को परमाणु हमले की धमकी दी है। उन्होंने भारत की सिंधु जल संधि को निरस्त करने की आलोचना करते हुए कहा कि इससे पाकिस्तान के 25 करोड़ लोग भुखमरी का शिकार हो सकते हैं। साथ ही, उन्होंने भारत द्वारा बांध बनाए जाने पर उस “मिसाइलों से नष्ट करने” की धमकी दी।
इस बयान से कई कूटनीतिक संकेत उभरते हैं। पहला, अमेरिका ने इस बयान के बावजूद पाकिस्तान को “दक्षिण एशिया में परमाणु सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण साझेदार” बताया। अमेरिका का यह दोहरा मापदंड दर्शाता है कि जहां एक ओर अमेरिका भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर वह जिन्ना के देश को भी सैन्य सहयोग देने की कसमें खा रहा है।
दूसरे, भारत ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी “न्यूक्लियर ब्लैकमेल” को बर्दाश्त नहीं करेगा। ऑपरेशन सिंदूर जैसे सैन्य अभियानों से भारत ने संकेत दिया है कि वह पाकिस्तान के अंदरूनी हिस्सों तक कार्रवाई करने की क्षमता रखता है। जिन्ना के देश के अक्खड़ सेना प्रमुख मुनीर ने तुलना करते हुए भारत को “हाईवे पर दौड़ती मर्सिडीज” और पाकिस्तान को “बजरी से भरा डंप ट्रक” बताया गया। मुनीर का यह बयान पाकिस्तान की आंतरिक अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग पड़ने की चिंता को दर्शाता है।
सिंधु जल संधि की बात करें तो 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में यह संधि हुई थी। यह सिंधु नदी प्रणाली के जल के बंटवारे को लेकर है। पहलगाम हमले पर आक्रोश व्यक्त करते हुए भारत ने गत मई माह में इस संधि को स्थगित करने की घोषणा की थी और उस पर क्रियान्वयन भी शुरू हो गया है, जिससे पाकिस्तान में जल संकट की आशंका बढ़ गई है।
मुनीर ने अमेरिका में अपने भाषण में दावा किया है कि इससे जिन्ना के देश के 25 करोड़ नागरिकों को भुखमरी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, भारत का तर्क है कि वह अपने हिस्से के जल का उपयोग करने का अधिकार रखता है, और यह संधि अब भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बाधक बनती जा रही है।
इस संधि के निरस्त होने पर तैश में आए मुनीर ने भारत को परमाणु हमले की धमकी दी है। दरअसल वे शायद भूल गए हैं कि किसी देश द्वारा परमाणु हथियारों की धमकी देना अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ है, यह विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र के चार्टर और अप्रसार संधि की भावना के विरुद्ध है।
लेकिन साफतौर पर मुनीर का बयान वैश्विक परमाणु स्थिरता के लिए भी चिंताजनक है। यह बयान पाकिस्तान की परमाणु नीति की अनिश्चितता और गैर-जिम्मेदार रवैये को उजागर करता है। यह एक गहरी बौखलाहट और रणनीतिक असुरक्षा का प्रतीक भी है। इस पर अमेरिका की चुप्पी और पाकिस्तान को दी जा रही शह दक्षिण एशिया में अस्थिरता को बढ़ा सकती है।
भारत ने सिंधु जल संधि को निरस्त करके पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया है कि पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते। आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति पर चलने का भारत का संकल्प अंतरराष्ट्रीय मंच पर सराहा गया है। लेकिन पाकिस्तान को नि:संदेह अपनी करनी में बदलाव लाना होगा। आतंकवाद को पोसना उसके गले की फांस बन चुका है, यह बात वह जानकर भी अनजान बन रहा है और इसीलिए वह देश अपना नाम बदनाम कर रहा है।
















