फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ आज देशभर के 4500 से ज्यादा सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। यह फिल्म 28 जून 2022 को उदयपुर में हुई दर्जी कन्हैयालाल साहू की हत्या पर आधारित है। दिनदहाड़े दुकान में हुई इस दर्दनाक घटना को फिल्म के जरिए दिखाया गया है।
बेटों का दर्द- फिल्म की रिलीज के मौके पर कन्हैयालाल के दोनों बेटे यश और तरुण उदयपुर के अरबन स्क्वायर मॉल में फिल्म देखने पहुंचे। जब फिल्म में उनके पिता की हत्या का दृश्य आया, तो दोनों भाई फूट-फूट कर रो पड़े। वह पल उनके लिए बेहद भावुक और तकलीफ भरा था, क्योंकि उन्होंने अपने पिता को इतने क्रूर तरीके से खोया था। यश तेली, जो कन्हैयालाल के बेटे हैं, उन्होंने बताया कि इस फिल्म को जनता तक पहुंचाने के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा। कई जगहों पर फिल्म को कानूनी चुनौती दी गई। यह मामला हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। अंत में सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने फिल्म को देखा और यह तय किया कि यह फिल्म किसी भी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं है। इसलिए सरकार ने इसे रिलीज करने की अनुमति दी।
तीन साल से न्याय की मांग- यश ने कहा कि यह फिल्म उनके परिवार की तीन साल से चल रही न्याय की लड़ाई को दिखाती है। उनका कहना है कि उनका परिवार लगातार दोषियों को सजा दिलाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अब तक पूरा न्याय नहीं मिला। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे न्याय की लड़ाई में उनका साथ दें। यश तेली ने बताया कि इस फिल्म का उद्देश्य किसी धर्म या समुदाय की भावना को ठेस पहुंचाना नहीं है। यह फिल्म केवल इस बात को दिखाती है कि उनके पिता की हत्या कैसे की गई और इसके पीछे आतंकी मानसिकता रखने वाले लोग कैसे काम करते हैं। उन्होंने कहा कि यह फिल्म समाज को जागरूक करने के लिए बनाई गई है।
फिल्म की रिलीज के मौके पर यश ने कहा, “यह फिल्म सिर्फ हमारे पिता की कहानी नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के लिए एक संदेश है। यह बताती है कि देश में आतंकवाद की जड़ें किस तरह फैल रही हैं और आम नागरिक कैसे उसका शिकार बन सकते हैं।” उन्होंने कहा कि यह फिल्म धार्मिक विरोध या नफरत फैलाने के लिए नहीं बनी है। बल्कि इसका मकसद है कि देश की जनता को सच दिखाया जाए और उन्हें बताया जाए कि आतंकवाद समाज के लिए कितना खतरनाक है। यश साहू ने देश के लोगों से भावुक अपील करते हुए कहा, “मैं हर नागरिक से निवेदन करता हूं कि वह यह फिल्म जरूर देखें। यह फिल्म किसी धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसका मकसद है कि लोग सच्चाई को जानें और आतंकवाद के असली चेहरे को समझें।”
















