उत्तरकाशी । भारतीय वायुसेना का चिनूक हेलीकॉप्टर उत्तराखंड में धराली आपदा बचाव अभियान में शामिल है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां बादल फटने और भूस्खलन के कारण लोग फंसे हुए हैं। चिनूक एक हेलीकॉप्टर है जो रसद पहुंचाने, चिकित्सा सहायता, खोज और बचाव, और पैराशूटिंग जैसे कार्यों में बेहद खास है। आज दोपहर में डोईवाला जॉली ग्रांट एयरपोर्ट पर “चिनूक की मौजूदगी देखी गई।
मलबे में खोज के लिए अत्याधुनिक उपकरण
सेना सूत्रों के अनुसार चिनूक के जरिए अत्याधुनिक उपकरण धराली ले जाए जा रहे हैं, जो मलबे में लापता लोगों की तलाश करेंगे। सूत्रों के मुताबिक जल प्रलय के बाद से कुछ सेना के जवान भी लापता बताए जा रहे हैं, हालांकि सेना से इस बारे में अभी तक कोई अधिकृत जानकारी नहीं दी गई है।
सीएम धामी ने सराहा सेना का साहस
उधर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि स्थानीय सेना यूनिट द्वारा तत्काल राहत के कार्य शुरू कर दिए जाने के कारण बहुत से लोगों को बचाया जा सका है। आपदा ग्रस्त क्षेत्र में सेना के जवान सबसे पहले जोखिम उठाकर पहुंचे।
घायलों के उपचार में सेना की भूमिका
सीएम धामी जब धराली पहुंचे, तब भी घटनास्थल पर सेना और आईटीबीपी के जवान लापता लोगों की खोज में काम करते दिखे। सेना के डॉक्टर्स द्वारा ही सबसे पहले घायलों का इलाज शुरू किया गया। बता दें कि धराली के आगे-पीछे दोनों तरफ सड़क गायब है, जिसकी वजह से मेडिकल सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही थीं। ऐसे में सेना ने चिकित्सा सेवा देने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी।
संचार व्यवस्था ठप्प, आईटीबीपी ने संभाला मोर्चा
धराली में टेलीकॉम व्यवस्था ठप्प है। बिजली नहीं है, मोबाइल टावर बह गए हैं। ऐसे में भारत-तिब्बत बॉर्डर पुलिस के संचार नेटवर्क के जरिए ही बाहरी दुनिया से संपर्क हो पा रहा है।
लापता लोगों की संख्या स्पष्ट नहीं
धराली में कितने लोग लापता हैं, अभी तक इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। स्थानीय लोग एक-दूसरे से पूछकर सूची बनाने में लगे हुए हैं।

















