देहरादून : उत्तराखंड की धामी सरकार के अवैध मदरसों को बंद करने के अभियान को न केवल नैनीताल हाईकोर्ट ने सही ठहराया है, बल्कि मुस्लिम समुदाय द्वारा भी इसे सही कदम बताया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि धामी सरकार ने अवैध रूप से चल रहे 527 मदरसों के खिलाफ सीलिंग की कार्रवाई कर उन पर ताले लगा दिए थे। इन मदरसों को खोलने के लिए नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई हुई और उसके बाद हाईकोर्ट ने कई मदरसों की सील इस आधार पर खुलवा दी कि मदरसा संचालक पहले शपथ पत्र देगा कि वह बिना पंजीकरण के मदरसा नहीं चलाएगा।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड सरकार ने मदरसा बोर्ड में पंजीकृत 540 मदरसों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की, हालांकि उसने उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे कि यहां राष्ट्रीय पाठ्यक्रम पढ़ाया जाए। बोर्ड के अध्यक्ष शमून कासमी ने कहा कि पंजीकृत मदरसों में राष्ट्रीय पाठ्यक्रम की पुस्तकों का प्रयोग किया जा रहा है।
उधर, मदरसा बोर्ड ने भी अवैध मदरसों के खिलाफ धामी सरकार की कार्रवाई का स्वागत किया है। कासमी का कहना है कि इन अवैध मदरसों के संचालकों द्वारा एकत्र किये जा रहे चंदे से मुस्लिम समुदाय के लोग भी परेशान हो चुके हैं। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने बताया कि अवैध मदरसों के संचालकों के वित्त प्रबंधन ठीक नहीं है वो कहां से पैसा लाते हैं? कहां कितना खर्च हो रहा है किसी की जवाबदेही नहीं है। मुस्लिम समाज भी अवैध मदरसों की बढ़ती संख्या और उनकी चंदा वसूली से बेहद तकलीफ में है। उनका कहना है कि पंजीकरण अनिवार्य होना चाहिए और अवैध मदरसों को बंद किया जाना चाहिए।
बाल आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने भी हाईकोर्ट के निर्देशों का स्वागत किया है और कहा है कि अवैध मदरसों के निरीक्षण में खामियां पाई गई हैं, जो यहां पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

















