पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू कश्मीर में मौजूद आतंकवादी ठिकानों को नेस्तोनाबूद करने वाले सफल आपरेशन सिंदूर को लेकर दुनिया के लगभग सभी देश भारत के पक्ष में थे। यह सनसनीखेज जानकारी भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने लोकसभा में आपरेशन सिंदूर पर विशेष बहस में भाग लेते हुए दी। भारत की आतंकवाद के खिलाफ इस निर्णायक सैन्य कार्रवाई के पीछे वजह थी गत 22 अप्रैल को पहलगाम में हुआ आतंकी हमला, जिसमें 26 निर्दोषों की जान गई थी। जयशंकर ने कहा कि इस ऑपरेशन ने न केवल भारत की सैन्य क्षमता को दर्शाया, बल्कि उसकी कूटनीतिक ताकत को भी उजागर किया। विदेश मंत्री ने जब लोकसभा में अपने भाषण में यह बताया कि संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों में से केवल तीन देशों—पाकिस्तान के अलावा चीन, तुर्की और ईरान—ने विरोध किया था तब पूरा सदन तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा था।
जयशंकर ने आगे बताया कि ऑपरेशन से पहले भारत ने 32 देशों में anticipatory diplomacy की थी। प्रधानमंत्री मोदी और जयशंकर ने मिलकर लगभग 47 उच्चस्तरीय फोन कॉल किए और 35 से अधिक समर्थन पत्र प्राप्त किए थे। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 25 अप्रैल को एक बयान जारी कर पहलगाम आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की थी और दोषियों को न्याय के कठघरे में लाने की मांग की थी।
जयशंंकर ने सदन में कहा कि जिन्ना के देश में पल रहे लश्करे तैयबा के खड़े किए जिहादी गुट The Resistance Front को अमेरिका ने वैश्विक आतंकी संगठन घोषित किया है, जो भारत की कूटनीतिक सफलता का प्रमाण है। भारत को अमेरिका, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और इस्राएल जैसे देशों से इस आपरेशन के लिए खुला समर्थन मिला था। भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया के समूह क्वाड ने आतंकवाद की निंदा करते हुए भारत के आत्मरक्षा के अधिकार को स्वीकार किया था।

चीन की सहभागिता वाले BRICS संगठन ने भी आतंकवाद के खिलाफ बयान दिया था, हालांकि चीन ने संयुक्त राष्ट्र में इसके प्रति विरोध दर्ज कराया था। पाकिस्तान के रणनीतिक सहयोगी चीन ने TRF का बचाव किया और ऑपरेशन के खिलाफ UN में आपत्ति जताई थी। इस आपरेशन का विरोध करने वाले तुर्की ने तो हाल के वर्षों में भारत के खिलाफ कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान का समर्थन किया ही है। शिया देश ईरान भारत के साथ ऐतिहासिक संबंधों की दुहाई तो देता है लेकिन इसके बावजूद इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के पक्ष में खड़ा हुआ था। इन तीन देशों के विरोध के पीछे राजनीतिक, मजहबी और क्षेत्रीय समीकरण हैं, जो भारत की आतंकवाद विरोधी नीति से मेल नहीं खाते।
लोकसभा में अपने भाषण में विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत की आतंकवाद विरोधी 5 सूत्रीय नीति प्रस्तुत की। ये पांच सूत्र हैं— 1. आतंकवादियों को अब “प्रॉक्सी” नहीं माना जाएगा। 2. सीमा पार आतंकवाद का जवाब दिया जाएगा। 3. पाकिस्तान से कोई बातचीत नहीं होगी, सिवाय आतंकवाद के मुद्दे पर। 4. परमाणु ब्लैकमेल को स्वीकार नहीं किया जाएगा। और 5. “खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते”—अर्थात आतंकवाद और अच्छे पड़ोसी वाले संबंध साथ नहीं चल सकते।
इस मौके पर जयशंकर ने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि “आप में से किसने कभी सोचा था कि बहावलपुर और मुरिदके जैसे आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है?” उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ सिर्फ बयान नहीं देता, बल्कि ठोस कार्रवाई करता है। आपरेशन सिंदूर भारत की आतंकवाद के खिलाफ नीति में एक निर्णायक मोड़ है। वैश्विक समर्थन ने भारत की कूटनीतिक ताकत को साबित किया है, जबकि विरोध करने वाले देशों की संख्या न के बराबर रही। लोकसभा में कल जयशंकर का यह भाषण न केवल भारत की विदेश नीति की सफलता को दर्शाता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ ”न्यू नार्मल” गढ़ चुका है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी जयशंकर के इस सारगर्भित भाषण की खुलकर प्रशंसा की है।

















