पहलगाम आतंकी हमले के बाद जब से भारत ने सिंधु जल समझौते को कैंसिल कर दिया है, तभी से पाकिस्तान की चूलें हिल गई हैं। वह कभी धमकी तो कभी कूटनीतिक तरीके से भारत से सिंधु जल समझौते पर फिर से बात करना चाहता है। उसकी बौखलाहट को इस बात से समझा जा सकता है कि अब तक वह 4 पत्र भारत को लिख चुका है। लेकिन, पीएम मोदी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि अब पाकिस्तान के साथ बातचीत केवल आतंकवाद और पीओजेके पर ही होगी।
दोबारा फैसले पर विचार करने की गुहार लगा रहा पाकिस्तान
आज तक की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने भारत सरकार को लिखे गए अपने पत्रों लगातार सिंधु जल समझौते पर फिर से विचार करने की गुहार लगा रहा है। इसमें से पहला पत्रा पाकिस्तान के जल मंत्रालय के सचिव सईद अली मुर्तजा ने मई के पहले ही सप्ताह में लिखा था। इसके बाद से वह तीन और पत्र लिख चुका है। पाकिस्तान ने भारत से गुहार लगाई है कि सिंधु जल संधि को बरकरार रखा जाए। जलशक्ति मंत्रालय ने इस पत्र को विदेश मंत्रालय को हस्तांतरित कर दिया है।
दूसरी ओर भारत सरकार ने सिंधु नदी के पानी के विवेकपूर्ण इस्तेमाल के लिए बड़ी योजनाओं पर काम भी शुरू कर दिया है। इसके अंतर्गत सरकार 130 किलोमीटर लंबी एक नहर परियोजना पर काम कर रही है, जो कि ब्यास नदी के पानी को गंगनहर से जोड़ेगी। इसके अलावा यमुना को जोड़ने के लिए भी नहर बनाने का प्रस्ताव भी है। करीब 200 किलोमीटर की ये परियोजना होगी, जिसमें 12 किलोमीटर की टनल भी रहेगी। इस परियोजना के तैयार होने के बाद उत्तर भारत के राजस्थान, पंजाब, दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्यों में सिंचाई में बड़ी सुविधा मिलेगी। माना जा रहा है कि अगले दो से तीन साल के भीतर इस परियोजना को पूरा कर लिया जाएगा।
पाकिस्तान की बेचैनी का कारण भी जान लीजिए
सिंधु जल समझौता खत्म होने के बाद अब भारत को उसका अधिकार मिल गया है। वहीं पाकिस्तान पानी की बूंद-बूंद के लिए भी तरस रहा है। इस कारण वो बौखलाया हुआ है। हाल ही में पाकिस्तान के सिंधु नदी प्रणाली प्राधिकरण (IRSA) ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि मंगला तरबेला बांध जो कि पाकिस्तान के पंजाब और सिंध प्रांत में न केवल सिंचाई बल्कि विद्युत उत्पादन में अहम स्थान रखता है, उसके जलस्तर में करीब 50 फीसदी से अधिक की गिरावट आ गई है। वहीं मंगला बांध जिसकी क्षमता 5.9 मिलियन एकड़ फीट है, उसमें केवल 2.7 मिलियन एकड़ फीट ही पानी बचा हुआ है। ऐसा ही हाल तरबेला डैम का है, जिसकी क्षमता 11.6 मिलियन एकड़ फीट से घटकर अब केवल 6 एमएफए तक ही रह गई है।
इस कारण से सिंचाई तो छोड़िए पीने के पानी की भी किल्लत आनी शुरू हो गई है। यही कारण है कि पाकिस्तान गिड़गिड़ा रही है।

















