सभी को वक्फ संशोधनों का समर्थन क्यों करना चाहिए.?
June 23, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम विश्लेषण

सभी को वक्फ संशोधन बिल का समर्थन क्यों करना चाहिए.?

क्या कांग्रेस प्रशासन द्वारा वक्फ बोर्ड का गठन, साथ ही 1954, 1995 और 2013 में किए गए बदलावों का मतलब यह है कि वे डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान में विश्वास नहीं करते?

Written byडॉ. पंकज जगन्नाथ जयस्वालडॉ. पंकज जगन्नाथ जयस्वाल
Apr 3, 2025, 07:27 pm IST
in विश्लेषण
वक्फ बोर्ड

वक्फ बोर्ड

वक्फ एक इस्लामी संपत्ति है जिसका उपयोग मुख्य रूप से मजहबी, परोपकारी या सामाजिक कारणों से किया जाता है। वक्फ के रूप में वर्गीकृत संपत्ति को स्थायी रूप से पवित्र माना जाता है और इसे बेचा, विरासत में नहीं लिया जा सकता है या हस्तांतरित नहीं किया जा सकता है। वक्फ संपत्तियों से होने वाली आय का उपयोग मस्जिदों, स्कूलों, अस्पतालों और अनाथालयों जैसी सार्वजनिक कल्याण परियोजनाओं के लिए किया जाना उद्देश्य है, लेकिन हकीकत में ऐसा दिखाई नहीं देता है।

23 राज्यों और 7 संघ राज्य क्षेत्रों में 32 वक्फ बोर्ड हैं, जिनमें बिहार और उत्तर प्रदेश में अलग-अलग शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड हैं। वक्फ भारतीय वक्फ परिसंपत्ति प्रबंधन प्रणाली (WAMSI) पोर्टल के अनुसार, वर्तमान में 8.72 लाख पंजीकृत वक्फ संपत्तियां हैं, जो 37.39 लाख एकड़ क्षेत्र में फैली हुई हैं। भारत में वक्फ संस्थाओं में ऐतिहासिक रूप से समावेशिता का अभाव रहा है, जिससे वंचित मुस्लिम समुदायों जैसे आगाखानी, बोहरा, पिछड़े मुस्लिम वर्ग, महिलाओं और गैर-मुसलमानों जैसे प्रमुख हितधारकों की भागीदारी सीमित रही है। इस बहिष्कार ने वक्फ संपत्तियों को उनके इच्छित उद्देश्य—वंचित समुदायों और गरीबों के कल्याण और उत्थान को पूरा करने से रोक दिया है। वक्फ संपत्तियों की दक्षता, जवाबदेही और न्यायसंगत उपयोग सुनिश्चित करने और अवैध तरीके से संपत्तियों पर कब्जा करने से रोकने के लिए एक संशोधित शासन मॉडल आवश्यक है।

क्या कांग्रेस प्रशासन द्वारा वक्फ बोर्ड का गठन, साथ ही 1954, 1995 और 2013 में किए गए बदलावों का मतलब यह है कि वे डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान में विश्वास नहीं करते? स्वार्थ के सबसे बुरे रूपों ने न केवल हिंदुओं, सिखों, जैनियों और बौद्धों को बल्कि बहुसंख्यक मुसलमानों और ईसाइयों को भी नुकसान पहुंचाया है। मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों को यह समझना चाहिए कि वंशवादी राजनीतिक दल किस तरह से अल्पसंख्यकों के तुष्टीकरण का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करते हैं। बहुसंख्यक मुसलमानों की धार्मिक मान्यताओं का इस्तेमाल हिंदुओं और राष्ट्र के खिलाफ उनके दिमाग में ज़हर घोलने के लिए किया गया है ताकि राजनीतिक लाभ प्राप्त किया जा सके और सत्ता बरकरार रखी जा सके।

वक्फ बोर्ड से संबंधित मुद्दे क्या हैं?

1. वक्फ संपत्तियों की अपरिवर्तनीयता

“एक बार वक्फ, हमेशा वक्फ” के सिद्धांत ने विवादों को जन्म दिया है, जैसे कि बेट द्वारका में द्वीपों पर दावे, जिन्हें अदालतों ने भी उलझन भरा माना है।

2. कानूनी विवाद और कुप्रबंधन: वक्फ अधिनियम, 1995 और इसका 2013 का संशोधन प्रभावकारी नहीं रहा है। कुछ समस्याओं में शामिल हैं:

• वक्फ भूमि पर अवैध कब्जा

• कुप्रबंधन और स्वामित्व विवाद

• संपत्ति पंजीकरण और सर्वेक्षण में देरी

• बड़े पैमाने पर मुकदमे और मंत्रालय को शिकायतें

3. कोई न्यायिक निगरानी नहीं

वक्फ न्यायाधिकरणों द्वारा लिए गए निर्णयों को उच्च न्यायालयों में चुनौती नहीं दी जा सकती।

इससे वक्फ प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही कम हो जाती है।

4. वक्फ संपत्तियों का अधूरा सर्वेक्षण

सर्वेक्षण आयुक्त का काम खराब रहा है, जिससे देरी हुई है।

गुजरात और उत्तराखंड जैसे राज्यों में अभी तक सर्वेक्षण शुरू नहीं हुआ है।

उत्तर प्रदेश में 2014 में आदेशित सर्वेक्षण अभी भी लंबित है।

विशेषज्ञता की कमी और राजस्व विभाग के साथ खराब समन्वय ने पंजीकरण प्रक्रिया को धीमा कर दिया है।

5. वक्फ कानूनों का दुरुपयोग

कुछ राज्य वक्फ बोर्डों ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया है, जिसकी वजह से सामुदायिक तनाव पैदा हुआ है।

निजी संपत्तियों को वक्फ संपत्ति घोषित करने के लिए वक्फ अधिनियम की धारा 40 का व्यापक रूप से दुरुपयोग किया गया है, जिससे कानूनी लड़ाई और अशांति पैदा हुई है।

30 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, केवल 8 राज्यों द्वारा डेटा दिया गया, जहां धारा 40 के तहत 515 संपत्तियों को वक्फ घोषित किया गया है।

7. विधेयक पेश करने से पहले मंत्रालय ने क्या कदम उठाए और हितधारकों से क्या परामर्श किया.?

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने विभिन्न हितधारकों से परामर्श किया, जिसमें सच्चर समिति की रिपोर्ट, जन प्रतिनिधियों, मीडिया और आम जनता द्वारा कुप्रबंधन, वक्फ अधिनियम की शक्तियों के दुरुपयोग और वक्फ संस्थाओं द्वारा वक्फ संपत्तियों के कम उपयोग के बारे में उठाई गई चिंताएं शामिल हैं। मंत्रालय ने राज्य वक्फ बोर्डों से भी परामर्श किया।

मंत्रालय ने वक्फ अधिनियम, 1995 के प्रावधानों की समीक्षा की प्रक्रिया शुरू की और हितधारकों के साथ परामर्श किया। दो बैठकें आयोजित की गईं—एक 24.07.2023 को लखनऊ में और दूसरी 20.07.2023 को नई दिल्ली में, जिसमें निम्नलिखित मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रभावित हितधारकों की समस्याओं को हल करने के लिए इस अधिनियम में उपयुक्त संशोधन करने के लिए आम सहमति बनी।

  • सीडब्ल्यूसी (केंद्रीय वक्फ परिषद) और एसडब्ल्यूबी (राज्य वक्फ बोर्ड) की संरचना का आधार बढ़ाना
  • मुतवल्लियों की भूमिका और जिम्मेदारियां
  • न्यायाधिकरणों का पुनर्गठन
  • पंजीकरण की प्रक्रिया में सुधार
  • टाइटल्स की घोषणा
  • वक्फ संपत्तियों का सर्वेक्षण
  • वक्फ संपत्तियों का म्यूटेशन
  • मुतवल्लियों द्वारा खातों की फाइलिंग
  • वार्षिक खाता फाइलिंग में सुधार
  • निष्क्रांत संपत्तियों/परिसीमा अधिनियम से संबंधित प्रावधानों की समीक्षा

वक्फ संपत्तियों का वैज्ञानिक प्रबंधन

इसके अलावा, मंत्रालय ने सऊदी अरब, मिस्र, कुवैत, ओमान, पाकिस्तान, बांग्लादेश और तुर्की जैसे अन्य देशों में वक्फ प्रबंधन पर अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं का भी विश्लेषण किया है और पाया है कि वक्फ संपत्तियों को आम तौर पर सरकार द्वारा स्थापित कानूनों और संस्थानों द्वारा विनियमित किया जाता है।

26 फरवरी, 2025 को भारत सरकार ने संसदीय पैनल द्वारा हाल ही में सुझाए गए बदलावों को शामिल करते हुए वक्फ (संशोधन) विधेयक में प्रस्तावित संशोधनों को मंजूरी दे दी।

मीडिया रिपोर्टों ने वक्फ बोर्ड को अतिक्रमण से बचाने में असमर्थता, भूमि विवाद और वक्फ बोर्डों में पक्षपात को उजागर किया है, जिससे उनकी विश्वसनीयता कम हुई है।

जून 2024, भोपाल (म. प्र) : दैनिक भास्कर इनवेस्टिगेशन: वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड में 124 कब्रिस्तान, लेकिन सिर्फ 24 जगह कब्रिस्तान मिले, कब्जा करने वाले मुस्लिम समुदाय से ही।

जून 2022, पुणे (महा) : कोंढवा इलाके में आलमगीर मस्जिद की 45 एकड़ भूमि को मुस्लिम भू-माफियाओं द्वारा बिल्डर को बेचा गया। वक्फ बोर्ड के अधिकारी जब नोटिस लगाने वहाँ पहुँचे तो सलमान काजी, शोएब काजी समेत अन्य 7 लोगों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी।

अगस्त 2024, बीड (महा) : अंबाजोगाई तहसील में संगीन मस्जिद की 276 एकड़ जमीन, इसमें से कई एकड़ जमीन वक्फ बोर्ड सदस्य समीर काजी ने अपने नाम कर ली और उसको अवैध तरीके से बेचा। वक्फ सेवा मंच के आरिफ अली द्वारा हाई कोर्ट में पिटिशन दायर।

अक्टूबर 2018, (मुरादाबाद, उ. प्र) : IAS अफसर और मुरादाबाद के पूर्व डी. एम. जुहैर बिन सगीर ने मूंढापांडे थाना क्षेत्र में वक्फ की करोड़ों रुपये की जमीन को पद का दुरुपयोग करते हुए करीबियों के नाम करवा दिया था। बदले में वक्फ को काफी सस्ती जमीन दूसरी जगह दिलवा दी।

सितंबर 2015, ऑल इंडिया उलमा व मशाइख़ बोर्ड (सूफी संगठन) :

प्रेस : वक्फ संपत्ति पर कट्टरपंथी काबिज, उन्हें सूफियों के हाथ में सौंपा जाए।

भारत में जो भी वक्फ संपत्तियाँ हैं, वो सभी सुन्नी सूफी विचारधारा के लोगों द्वारा ही वक्फ की गई हैं। लेकिन उन पर आज कट्टरपंथी विचारधारा से संबंधित लोग काबिज हैं। जबकि कट्टरपंथी विचारधारा इस देश में 1855 में आई है। उससे पूर्व देश में मुसलमानों में दो ही (सुन्नी सूफी, शिया) विचारधारा के लोग मौजूद थे। वक्फ संपत्तियाँ उन्हीं के द्वारा ही वक्फ की गई हैं। इसी लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड और शिया वक्फ बोर्ड के नाम से दो बोर्ड बनाए गए। शिया वक्फ बोर्ड पर तो शिया काबिज हैं पर सुन्नी वक्फ बोर्ड पर 1919 के बाद से कट्टरपंथी विचारधारा के लोग काबिज होते चले गए और आज चपरासी से लेकर चेयरमैन तक लगभग इसी विचारधारा के लोग पाए जाते हैं। जबकि 1919 से पूर्व सुन्नी वक्फ बोर्ड और उससे जुड़ी हुई तमाम संपत्तियों, मस्जिदों, मदरसों और ख़ानक़ाहों का संचालन सिर्फ सुन्नी सूफी मुसलमान ही करता रहा है। अतः बोर्ड मांग करता है कि 1919 के बाद कट्टरपंथी विचारधारा द्वारा वक्फ की गई संपत्तियों को अलग करके उनका अलग बोर्ड बना दिया जाए और पूर्व की भांति सुन्नी वक्फ बोर्ड को सुन्नी सूफी मुसलमानों के हवाले किया जाए।

दिसंबर 2020, प्रयागराज (उ. प्र) : शिया इमामबाड़ा ध्वस्त कर कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाने के पीछे अतीक अहमद मास्टरमाइंड। प्रयागराज के बहादुरगंज इलाके की बताशा मंडी में दो सौ साल से पुराना इमामबाड़ा हैदर रज़ा स्थित है। साल 2015 में इस इमामबाड़े का मुतवल्ली अतीक अहमद के दोस्त वकार रिज़वी को बनाया गया था। वकार की नियुक्ति के कुछ दिन बाद ही इमामबाड़े की बिल्डिंग को गिराया जाने लगा। लोगों ने विरोध किया तो इमामबाड़े की बिल्डिंग जर्जर होने की वजह से उसका जीर्णोद्धार किया जा रहा है ऐसा बताया गया। इसके बाद भी विरोध जारी रहा तो पुलिस का इस्तेमाल कर प्रदर्शन करने वालों पर लाठियां चलवाई गईं और साथ ही मुकदमा भी दर्ज हुआ। यूपी में उस वक्त अखिलेश यादव की सरकार थी और अतीक अहमद समाजवादी पार्टी में ही थे। बहरहाल बिल्डिंग गिरने के बाद इमामबाड़े वाली जगह पर एक कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बना दिया गया। चौक से सटा इलाका होने की वजह से इन दुकानों को मुंहमांगी कीमत पर व्यापारियों को दिया गया। कॉम्प्लेक्स की पहली मंज़िल के छोटे से हिस्से में इमामबाड़े को सीमित कर दिया गया।

अन्य यूरोपीय देशों (जैसे फ्रांस, जर्मनी और यूनाइटेड किंगडम) में मुस्लिम समुदायों के पास धार्मिक संपत्तियाँ हैं, लेकिन उन्हें औपचारिक रूप से “वक्फ बोर्ड” के रूप में स्थापित नहीं किया गया है। अधिकांश संपत्तियाँ मुस्लिम चैरिटी ट्रस्ट या इस्लामिक फाउंडेशन के नाम से पंजीकृत हैं।

दो उदाहरण-

देश : सऊदी अरब

वक्फ स्थिति : सऊदी अरब में, वक्फ का संचालन जनरल अथॉरिटी फॉर अवाक्फ (GAA) द्वारा किया जाता है, जिसकी स्थापना 2016 में शाही फरमान द्वारा की गई थी। GAA वित्तीय और प्रशासनिक स्वतंत्रता वाली एक सार्वजनिक एजेंसी है जो सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करती है। सऊदी अरब वक्फ प्रबंधन को आधुनिक बनाने और इसे राष्ट्रीय विकास में शामिल करने पर ध्यान केंद्रित करता है।

देश : संयुक्त अरब अमीरात (यूएई)

वक्फ स्थिति : इस्लामिक मामलों और बंदोबस्ती का सामान्य प्राधिकरण यूएई में वक्फ संपत्तियों का प्रभारी है, जो संघीय कानूनों द्वारा शासित हैं। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में, इस्लामिक मामलों और बंदोबस्ती का सामान्य प्राधिकरण (GAIAE), जिसे अक्सर अवाकफ के नाम से जाना जाता है, एक सरकारी संगठन है जो वक्फ संपत्तियों का प्रभारी है, जो इस्लामी कानून के तहत मजहबी बंदोबस्ती हैं।

निष्कर्ष

देश की अखंडता को बनाए रखने की कुंजी संविधान का सम्मान करना है। सभी को, चाहे वे किसी भी धर्म के हों, स्वार्थी राजनीतिक एजेंडों के ख़िलाफ़ एक साहसिक कदम उठाना चाहिए। अन्यथा, भारत को तोड़ने वाली ताकतें तोड़ने में सफल होंगी, देश को सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से और कमजोर करेंगी। आइए हम दिल से राष्ट्र के साथ एकजुट हों।

Topics: land disputeWakf Land Encroachmentसरकारी जमीनकुप्रबंधनWaqf Amendmentसंशोधन विधेयकवक्फ संपत्ति विवादइस्लामी संपत्तिवक्फ संपत्तिवक्फ अधिनियम 1995वक्फ संशोधन विधेयक 2025वक्फ बोर्ड अतिक्रमणSunni Waqf BoardShia Waqf Propertyवक्फ बोर्डWaqf Property Scam Indiawaqf boardWaqf Survey Report
डॉ. पंकज जगन्नाथ जयस्वाल
डॉ. पंकज जगन्नाथ जयस्वाल
डॉ पंकज जगन्नाथ जयस्वाल, शिक्षाविद्, लेखक और स्तंभकार हैं [Read more]
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

अवैध मस्जिद को हटाने के लिए पुलिस ने मौलवी को दिया नोटिस

मेरठ : थाने की जमीन पर बनाई अवैध मस्जिद, वक्फ संपत्ति भी घोषित कर दिया, पुलिस ने दिया नोटिस

हिमंत बिस्व सरमा, मुख्यमंत्री, असम

असम : 5 साल में अवैध कब्जे से 200 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा जमीन मुक्त 

वक्फ संपत्तियों पर एक्शन

उत्तर प्रदेश में वक्फ संपत्तियों पर बड़ा एक्शन, 31 हजार से अधिक का रजिस्ट्रेशन रद

प्रतीकात्मक तस्वीर

हरिद्वार में फिर शुरू हुआ ‘250 फीट मीनार’ वाली मस्जिद का निर्माण! प्रशासन की रोक के बावजूद क्यों जारी है काम?

वक्फ मनमानी पर लगेगा ब्रेक: देहरादून में 70+ कब्जाधारियों को नोटिस, अवैध कब्जे हटेंगे

Waqf Board

देवरिया में 205 वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण निरस्त, कब्रिस्तान, मजार, दरगाह, मदरसा, ईदगाह और मस्जिद शामिल

Load More

ताज़ा समाचार

आप विधायक चैतर बसावा

गुजरात: AAP विधायक को 7 साल की सजा, बने कैदी नंबर 90888, नहीं लड़ पाएंगे 6 साल तक चुनाव

भगवंत मान, मुख्यमंत्री, पंजाब

भगवंत मान के वीडियो को फर्जी साबित करने के लिए 10 लाख रुपए में बनी थी फोरेंसिक रिपोर्ट, 2 आरोपी गिरफ्तार

Shyama Prasad Mukherjee की मौत की जांच से Nehru क्यों डरे?

dr Shyama prasad Mukharjee mystirious death

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की रहस्यमयी मौत की अबूझ पहेली

गिरफ्तारी, अत्याचार और भय के माहौल में गुजरती थी रातें – hitler gandhi

महबूबा मुफ्ती

खीर भवानी मंदिर में महबूबा मुफ्ती: क्या उन कुछ लोगों के नाम बताएंगी,  जिन्होंने हिंदुओं के खिलाफ मस्जिदों से नारे लगवाए

gyan bharatam mission tikamgarh ancient manuscripts jambudweep map found

टीकमगढ़ : सामने आईं 825 प्राचीन पांडुलिपियां, ब्रह्मांड विज्ञान और ‘जम्बूद्वीप’ के नक्शे ने विशेषज्ञों को चौंकाया

delhi sikh delegation meets cm pushkar-singh dhami chamoli police action investigation

देहरादून: दिल्ली सिख प्रतिनिधिमंडल ने की CM धामी से मुलाकात, चमोली घटना पर की चर्चा, DIG को सौंपी जांच

श्री मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

‘राष्ट्र अपने वास्तविक नायकों को कभी नहीं भूलता’

Pakistan Mardan Sikh Couple Murder Gurdwara Security Police Constable Arrested JIT Investigation

पाकिस्तान के गुरुद्वारे में सिख दम्पत्ति की हत्या: सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात कॉन्स्टेबल शेरशाह मुख्य आरोपी

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies