लोकसभा में गुरुवार को इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स बिल 2025 पर हुई गहन चर्चा के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने इसके प्रावधानों पर विस्तृत जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में प्रवेश के लिए वैध पासपोर्ट और वीजा अनिवार्य होगा। बिना वैध दस्तावेजों के आने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।
उन्होंने कहा कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है, जहां कोई भी व्यक्ति किसी भी उद्देश्य से आकर बस जाए। जो देश की सुरक्षा के लिए खतरा होगा, उसे रोकने का अधिकार संसद के पास है। साथ ही, यह विधेयक सुरक्षा एजेंसियों द्वारा बनाई गयी ब्लैक लिस्ट को भी कानून प्रावधान देगा।
बिल के बारे में बताते हुए गृहमंत्री ने कहा- देश की सुरक्षा, देश के अर्थतंत्र को मजबूत करने के लिए, मैन्युफेक्चरिंग और व्यापार, फिर से एक बार देश की शिक्षा प्रणाली को दुनिया में स्वीकृति देने के लिए, हमारी यूनिवर्सिटियों को वैश्विक बनाने का रास्ता प्रशस्त करने के लिए और इस देश को दुनिया में 2047 में सर्वोच्च बनाने के लिए… ये बहुत जरूरी बिल है।
ये बिल लाने का मुख्य मुद्दा वो है कि इमीग्रेशन, एक प्रकार से आइसोलेटेड मुद्दा नहीं है। देश के कई मुद्दे इसके साथ जुड़े हुए हैं। हमारे देश की सीमा में कौन आता है, कब आता है, कितनी अवधि के लिए आता है और किस उद्देश्य के लिए आता है, ये जानने का अधिकार इस देश की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है। मैं इस सदन को आश्वासन देता हूं कि इसके माध्यम से भारत में आने वाले सभी विदेशी नागरिकों का लेखा-जोखा रखने का काम होगा और इसके माध्यम से देश का विकास भी सुनिश्चित होगा।
उन्होंने कहा- भारत के शरणार्थियों के प्रति एक इतिहास रहा है कि पर्सिया से आक्रांताओं ने भागा दिया और पारसी दुनिया में कहीं नहीं गए, भारत में आए और आज भी सुरक्षित हैं। दुनिया की सबसे माइक्रो माइनोरिटी अगर विश्व में कहीं सम्मान से रहती है तो वो भारत देश में रहती है। अभी मोदी जी के कालखंड में भी आसपास के देशों से छह प्रताड़ित समुदायों के नागरिकों को भी सीएए के तहत शरण देने का काम भाजपा ने किया।
गृहमंत्री ने आगे बोलते हुए कहा- 10 साल में हमारा अर्थतंत्र 11वें नंबर से 5वें नंबर पर पहुंच गया है। पूरी दुनिया के अर्थतंत्र की सूची में भारत एक ब्राइट स्पॉट बनकर उभरा है। भारत मैन्युफेक्चरिंग का हब बनने जा रहा है। ऐसे में हमारे यहां विश्वभर से लोगों का आना बड़ा स्वाभाविक है। हमारे इमीग्रेशन का स्केल और साइज दोनों बहुत बड़ा है। इसके साथ-साथ शरण लेने की जगह अपने निहित स्वार्थ और देश को असुरक्षित करने वालों की संख्या भी बढ़ी है। ऐसे में जो लोग भारत की व्यवस्था में कंट्रिब्यूट करने के लिए आते हैं, व्यापार और शिक्षा के लिए आते हैं, ऐसे सभी लोगों का स्वागत है, लेकिन चाहे रोहिंग्या हो या बांग्लादेशी हो… अगर यहां अशांति फैलाने के लिए आते हैं तो ऐसे लोगों के साथ बड़ी कठोरता के साथ उनके साथ व्यवहार होगा।
उन्होंने कहा- 2047 के हमारे लक्ष्य के अंदर एक सशक्त अप्रवासन नीति का बहुत बड़ा महत्व है। इसलिए ये इमीग्रेशन एंड फॉरेनर्स बिल 2025, जो विधेयक है, ये हमारे प्रणाली को सिंप्लीफाई करेगा, सिस्टमेटिक बनाएगा और सिक्योर (सुरक्षित) भी करेगा। उन्होंने आगे कहा कि वीजा की प्रक्रिया बहुत पुरानी है। हम जो ये सुधार लेकर आए हैं वो कोई नया नहीं है। 2010 में 5 देशों के नागरिकों को पर्यटन वीजा ऑनलाइन देने की शुरुआत हुई। 2010-2014 के बीच में 7 देशों को बढ़ाया गया और अब ये सुविधा 169 देशों तक हमने किया है। लेकिन इसके लिए रजिस्ट्रेशन तो करना ही पड़ेगा।
गृहमंत्री ने लोकसभा में ममता सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा- बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर बीएसएफ और सेना पर सवाल उठाया जाता है। उन्होंने कहा कि भारत की 2216 किलोमीटर सीमा बांग्लादेश से सटी हुई है। उसमें से 1653 किमी बाड़ लग चुकी है। बाड़ के पास वाली सड़क भी बन चुकी है और चौकियां भी बन गई हैं। शेष फेंसिंग की लंबाई 563 किमी है और ये सीमा आज भी खुली हुई है। इसमें 112 किमी सीमा ऐसी है जहां नाले, नदी और पहाड़ियों के कारण फेंसिंग व्यावहारिक नहीं है। वहीं 450 किमी जहां फेंसिंग होता है वो बाकी है और ये इसलिए बाकी है क्योंकि बंगाल सरकार भूमि नहीं देती है, इसके लिए सात मीटिंग हो चुकी है।
अमित शाह ने कहा- “450 किलोमीटर की बाड़ लगाने का काम लंबित है क्योंकि पश्चिम बंगाल सरकार इसके लिए जमीन नहीं दे रही है। जब भी बाड़ लगाने जाते हैं, तो सत्तारूढ़ पार्टी का कैडर आकर हुड़दंग और धार्मिक नारेबाजी करता है। 450 किलोमीटर की सीमा पर बाड़बंदी का काम रुका हुआ है क्योंकि पश्चिम बंगाल सरकार की दया दृष्टि घुसपैठियों पर है।
रोहिंग्या के दिल्ली तक आने के विपक्ष के सवालों पर उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी घुसपैठिए और रोहिंग्या पहले असम से आते थे, जब वहां कांग्रेस की सरकार थी। अब टीएमसी शासित बंगाल से घुसकर आते हैं। उन्होंने ऐसे घुसपैठियों को आधार कार्ड और नागरिकता देने वालों पर सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि पकड़े गए सभी बांग्लादेशियों के पास से 24 परगना जिले का आधार कार्ड और नागरिकता का प्रमाण मिला है। ये वही आधार और वोटर कार्ड लेकर दिल्ली आते हैं। उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकर उन्हें आधार कार्ड नहीं दे तो आदमी क्या परिंदा भी पर नहीं मार पाएगा। हालांकि ये सब लंबे समय तक नहीं चलेगा। 2026 में चुनाव है और बंगाल में कमल खिलेगा और ये पूरा बंद हो जाएगा।
टिप्पणियाँ