भारतीयों ने सूरीनाम को बसाया,  क्या है Suriname का अर्थ, श्रीराम से कनेक्शन
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होम भारत

भारत हमारे पूर्वजों की भूमि, भारतीयों ने ही सूरीनाम को बसाया, सुनैना ने बताया Suriname का मतलब, श्रीराम से कनेक्शन 

सूरीनाम दूतावास की द्वितीय सचिव सुनैना पी.आर. मोहन ने भारतीय संस्कृति और संस्कारों की महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि उज्जैन आकर उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे वे अपने ही घर में हों।

Written byPanchjanyaPanchjanya
Mar 25, 2025, 10:34 am IST
in भारत
सुनैना

सुनैना

उज्जैन, (हि.स.)। विक्रमोत्सव 2025 अंतर्गत पौराणिक फिल्मों का अंतरराष्ट्रीय महोत्सव (आईएफएफएएस) के चौथे दिन सोमवार की शाम सूरीनाम व दक्षिण अफ्रीका के राजनीयिकों ने अपनी भागीदारी दर्ज की। इस मौके पर सूरीनाम दूतावास की द्वितीय सचिव सुनैना पी.आर. मोहन ने भारतीय संस्कृति और संस्कारों की महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि उज्जैन आकर उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे वे अपने ही घर में हों। भारत उनके पूर्वजों की भूमि है और यहीं से उनके पूर्वजों ने जाकर सूरीनाम जैसे देश को बसाया।

सुनैना ने गर्वपूर्वक कहा कि उनके पुरखों ने भारतीय संस्कृति, भाषा, वेशभूषा, भजन-भावना और धार्मिक आचार-विचार जैसी परंपराओं को सहेजकर रखा है। उन्होंने विशेष रूप से भारतीय युवाओं को संदेश दिया कि वे अपनी संस्कृति और संस्कारों को कभी न भूलें।

अपने हिंदी उद्बोधन के दौरान उन्होंने भगवान शिव को समर्पित एक भावपूर्ण भजन भी प्रस्तुत किया, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने ‘सूरीनाम’ शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि यह मूल रूप से ‘श्री राम’ से उत्पन्न हुआ है। जब उनके पूर्वज भारत से वहाँ गए थे, तो उन्होंने इसे ‘श्री राम की भूमि’ कहा था, जो कालांतर में सूरीनाम बना।

भारत-दक्षिण अफ्रीका के संबंध बहुत पुराने और ऐतिहासिक: खाथुतशेलो

समारोह में दक्षिण अफ्रीका उच्चायोग के प्रथम सचिव खाथुतशेलो थगवाना ने कहा कि भारत और दक्षिण अफ्रीका के संबंध बहुत पुराने और ऐतिहासिक है गांधी जी ने दक्षिण अफ्रीका में रहकर जो काम किया है उससे पूरी दुनिया परिचित हैं। फिल्म, कला, संस्कृति, खेल, व्यापार के माध्यम से हम एक-दूसरे की संस्कृतियों को साझा करते हैं। वर्तमान में फिल्म जैसा माध्यम दोनों देशों के लोगों को और करीब लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उज्जैन में आयोजित इस अंतर्राष्ट्रीय पौराणिक फिल्म समारोह में आकर मुझे बेहद खुशी है।

भारत ने ज्ञान के बल पर पहचान बनाई

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार एवं महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृति हजारों वर्षों से पूरे विश्व में अपनी पहचान बना रही है। भारत ने तलवार के बल पर नहीं, बल्कि अपने ज्ञान और परंपराओं के माध्यम से वैश्विक मंच पर अपना स्थान सुनिश्चित किया है। इस अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्स्व का उद्देश्य विभिन्न संस्कृतियों और परंपराओं को एक मंच पर लाकर उन्हें समझना और संजोना है। इससे पहले, समारोह में विक्रम विश्वविद्यालय के कुलगुरु अर्पण भार्गव ने अतिथियों का स्वागत किया।

इन फिल्मों का प्रदर्शन

महोत्सव के पाँचवें दिन नौ फिल्मों का प्रदर्शन होगा जिसमें भारतीय भाषाओं में ‘गोपाल कृष्णा’, ‘भगवान श्रीकृष्ण’, ‘श्रीकृष्ण अर्जुन युद्दम (तेलगू), ‘मीरा रो गिरधा (राजस्थानी)’, ‘भगवान श्रीकृष्ण छतम्या (बंगाली)’, ‘श्रीकृष्णा लीला (तमिल)’ व ‘भक्त नान्शई यो (गुजराती)’ आदि शामिल है।

Topics: भारतश्रीरामसूरीनामसुनैनासूरीनाम का अर्थश्रीराम की भूमिविक्रमोत्सव 2025खाथुतशेलो थगवाना
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