नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने NXT Conclave 2025 में ‘लुटियंस जमात’ और ‘खान मार्केट गैंग’ पर करारा हमला बोलते हुए उनकी दोहरी मानसिकता को उजागर किया। उन्होंने सवाल उठाया कि ये लोग दशकों तक औपनिवेशिक कानूनों पर चुप क्यों थे, जो आज़ादी के बाद भी भारतीयों को गुलाम बनाए रखने का काम कर रहे थे?
जो खुद को स्वतंत्रता के ठेकेदार बताते हैं, वे इतने सालों तक चुप क्यों थे..?
PM मोदी ने बिना किसी लाग-लपेट के उन बुद्धिजीवियों, एक्टिविस्ट्स और ‘PIL गैंग’ पर निशाना साधते हुए कहा- जो आए दिन लोकतंत्र और स्वतंत्रता की दुहाई देते हैं, लेकिन ब्रिटिश काल के दमनकारी कानूनों को हटाने के लिए कभी आवाज़ नहीं उठाई। उन्होंने कहा “मुझे हैरानी होती है कि ‘लुटियंस जमात’ और ‘खान मार्केट गैंग’ जो हमें आज़ादी का पाठ पढ़ाते हैं, वे इतने सालों तक चुप क्यों रहे? जो लोग PIL लेकर कोर्ट भागते रहते हैं, वे गुलामी के इन कानूनों के खिलाफ कभी क्यों नहीं लड़े?”
#WATCH | Delhi | “…I am surprised by the ‘Lutyens’ Jamaat’ and ‘Khan Market Gang’ that they have been silent for this many years. The people who are the ‘thekedaar’ of PIL, those who visit Courts every now and then, why they weren’t worried about the Liberty back then…” says… pic.twitter.com/smXZjhDiux
— ANI (@ANI) March 1, 2025
PM मोदी ने साफ कहा कि इन लोगों ने दशकों तक न सिर्फ इन औपनिवेशिक कानूनों को जिंदा रखा, बल्कि जब हमारी सरकार ने इन्हें हटाने की पहल की, तो यही लोग विरोध पर उतर आए।
150 साल तक क्यों नहीं उठे सवाल..?
PM मोदी ने ‘ड्रैमेटिक परफॉर्मेंस एक्ट’ का उदाहरण दिया, जिसे अंग्रेजों ने 150 साल पहले भारतीयों की सांस्कृतिक और राजनीतिक अभिव्यक्ति पर रोक लगाने के लिए लागू किया था। उन्होंने कहा- “ब्रिटिश हुकूमत ने 150 साल पहले एक कानून बनाया – ड्रैमेटिक परफॉर्मेंस एक्ट। लेकिन क्या आपको पता है कि यह 75 साल बाद भी भारत में लागू था..? इस कानून के तहत अगर किसी शादी में 10 से ज्यादा लोग नाच रहे हों, तो पुलिस दूल्हे को गिरफ्तार कर सकती थी”
PM मोदी ने तंज कसते हुए कहा कि अगर उनकी सरकार आज ऐसा कानून लाती, तो यही बुद्धिजीवी ‘आग लगा देते, मोदी के बाल नोच लेते’।
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने इस कानून को खत्म कर दिया, लेकिन जिन लोगों को जनता की आज़ादी की इतनी चिंता होती है, उन्होंने इसे हटाने के लिए कभी PIL क्यों नहीं डाली..?
बांस काटने पर जेल? कांग्रेस सरकार ने क्यों नहीं हटाया कानून..?
PM मोदी ने बांस को पेड़ मानने वाले एक अजीबोगरीब कानून का भी जिक्र किया, जिसके कारण किसान और ग्रामीण अगर अपने खेत में उगे बांस को काटते थे, तो उन्हें जेल हो सकती थी। उन्होंने कहा- “पहले बांस को पेड़ माना जाता था, और अगर कोई उसे काटता था, तो उसे जेल हो सकती थी। हमारी सरकार ने इस बेवजह के कानून को खत्म किया। लेकिन इससे पहले किसी ने इसे हटाने की सोची भी नहीं।”
भारत अब ‘बैक ऑफिस’ नहीं, ‘ग्लोबल फैक्ट्री’ बन रहा है
PM मोदी ने इस अवसर पर भारत की वैश्विक पहचान को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एक समय दुनिया भारत को सिर्फ ‘बैक ऑफिस’ समझती थी, लेकिन अब भारत वैश्विक फैक्ट्री बनने की राह पर है। उन्होंने भारत की बढ़ती कूटनीतिक और आर्थिक ताकत का उल्लेख करते हुए कहा- भारत अब बड़े वैश्विक सम्मेलनों की अगुवाई कर रहा है। हमने G20 की सफलता से दुनिया को दिखाया कि हम केवल ‘बैक ऑफिस’ नहीं हैं, बल्कि हम दुनिया की सबसे बड़ी फैक्ट्री बन रहे हैं।
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फ्रांस में आयोजित AI समिट में भारत सह-आयोजक रहा, जल्द ही भारत में इसकी मेजबानी होगी।
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G20 शिखर सम्मेलन की ऐतिहासिक सफलता और भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEEC) की पहल।
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ग्लोबल साउथ को ताकत देने के लिए G20 में अफ्रीकन यूनियन को शामिल करने का फैसला।
प्रयागराज महाकुंभ से दुनिया हुई भारत की आयोजन शक्ति की मुरीद
PM मोदी ने हाल ही में संपन्न हुए महाकुंभ 2025 का जिक्र करते हुए कहा कि इस आयोजन ने दुनिया को दिखा दिया कि भारत किस तरह बड़े से बड़े इवेंट का प्रबंधन कर सकता है। उन्होंने कहा- “26 फरवरी को प्रयागराज में महाकुंभ समाप्त हुआ। दुनिया सोच रही है कि कैसे करोड़ों लोग एक अस्थायी शहर में आते हैं, डुबकी लगाते हैं और वापस चले जाते हैं? पूरी दुनिया हमारी आयोजन क्षमता और इनोवेटिव सोच से प्रभावित है।”
उन्होंने कहा कि दुनिया भारत को अब एक नई दृष्टि से देखना चाहती है और उसे विस्तार से जानना चाहती है।
PM मोदी की राजनीतिक भाषा से बेनकाब हुए विरोधी
PM मोदी के इस भाषण ने न सिर्फ लुटियंस गैंग और खान मार्केट क्लब के पाखंड को उजागर किया, बल्कि यह भी दिखाया कि उनकी सरकार ने कैसे दशकों पुराने औपनिवेशिक कानूनों को हटाकर देश को सही मायने में स्वतंत्र बनाने का काम किया। उन्होंने कहा- “इन बुद्धिजीवियों ने आज तक सिर्फ अपने हितों के लिए PIL डालीं। लेकिन जब बात सच में जनता की आज़ादी की आई, तो ये चुप रहे।”
PM मोदी के इस संबोधन ने साफ कर दिया कि उनका मिशन केवल चुनावी जीत नहीं है, बल्कि भारत को औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त करना भी है।
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