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थरूर गाँधी परिवार के अगले शिकार

गांधी परिवार और केरल के मुख्‍यमंत्री पी विजयन के परिवारों में एक गुप्त समझौते के संकेत है, जिसमें वायनाड सीट से गाँधी परिवार का सदस्य चुनाव लड़ेगा और गाँधी परिवार के खिलाफ माकपा और एलडीएफ कमजोरी से चुनाव लड़ेगी वही विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी कमजोरी से चुनाव लड़ेगी और पी विजयन को अपने पद पर काबिज रहने में मदद करेगी।

Written byअभय कुमारअभय कुमार
Feb 26, 2025, 11:40 am IST
in भारत, विश्लेषण
शशि थरूर, सांसद

शशि थरूर, सांसद

शशि थरूर लम्बे समय से गांधी परिवार के निशाने पर हैं। शशि थरूर ने जब से कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद के लिए गाँधी परिवार के पसंदीदा मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ चुनाव लड़ा तब से वो गाँधी परिवार की आँखों में खटक रहे हैं। सोनिया गाँधी और गाँधी परिवार को इस बात की आशंका है कि आने वाले समय में जब राहुल या प्रियंका गाँधी को पार्टी सौंपने की बारी आएगी तब शशि थरूर उनके राह में रोड़ा बन सकते हैं। थरूर हर मामले में राहुल या प्रियंका गाँधी पर बीस पड़ते हैं। गाँधी परिवार उनसे जल्द से जल्द पल्ला झड़ना चाहता है। गाँधी परिवार अपने इसी योजना को अंगीकार करने को लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित कई नेताओं के लिए ऐसी स्थिति तैयार कर दिया, जिससे की उनको पार्टी छोड़ना पड़े। थरूर को संसद में बोलने का नहीं या बहुत ही कम मौका देना उनकी अहमियत को कम करना और उनको पार्टी छोड़ने का संकेत देने के जैसा ही है। कुछ इन्हीं परिस्थितियों में पूर्व में शरद पवार, स्वर्गीय  संगमा, ममता बनर्जी, जगनमोहन रेड्डी  सहित दर्जनों नेताओं को कांग्रेस पार्टी को छोड़कर अपना दल बनाना पड़ा या किसी अन्य दल में जाना पड़ा।

दूसरा गांधी परिवार और केरल के मुख्‍यमंत्री पी विजयन के परिवारों में एक गुप्त समझौते के संकेत है, जिसमें वायनाड सीट से गाँधी परिवार का सदस्य चुनाव लड़ेगा और गाँधी परिवार के खिलाफ माकपा और एलडीएफ कमजोरी से चुनाव लड़ेगी वही विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी कमजोरी से चुनाव लड़ेगी और पी विजयन को अपने पद पर काबिज रहने में मदद करेगी। गाँधी परिवार और पी विजयन के परिवारों का सबसे बड़ा ध्येय अपने परिवार को राजनीत्ति में आगे बढ़ना और राजनीतिक विरासत सौपना है। इसी योजना के तहत पी विजयन ने अपने दामाद मोहम्मद रियास को अपने मंत्रिमंडल में स्थान देने के साथ ही राज्य में माकपा और एलडीएफ का अगला मुख्यमंत्री नामांकित करना है।

इसे भी पढ़ें: शशि थरूर ने कांग्रेस पार्टी को आइना दिखाया

इसी योजना के तहत गांधी परिवार का केरल की पार्टी इकाई के प्रति कोई भी योजना नहीं दिख रही है। अब गांधी परिवार जानबूझ करके केरल में पार्टी को कमजोर स्थिति में ही रहने देगी। केरल की राजनीति में अब गांधी परिवार को केवल वायनाड से ही नाता शेष रह गया है। गाँधी परिवार की केरल की राजनीति वायनाड से शुरू होकर वही पर ख़त्म भी हो जाती है। अगर हम विगत 2021 के केरल के विधानसभा चुनाव की बात करें तो पाते हैं कि उस चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी कभी भी मजबूती से चुनाव लड़ती नहीं दिखी। ऐसा लगा कि कांग्रेस पार्टी खुद हारने और माकपा नीट लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट को चुनाव जिताने के लिए लड़ रही हो।

केरल की राजनीति में 1982 से ही माकपा नीत एलडीएफ और कांग्रेस पार्टी नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट में सीधी टक्कर की परम्परा है। 2016 तक हर चुनाव में दोनों गठबंधनों में सत्ता का अदल-बदल होता रहा, मगर 2021 में पहली बार यह परंपरा 80 के दशक के बाद टूट गई और माकपा ने दोबारा सत्ता में वापसी की।

2021 के केरल विधानसभा चुनाव में यूडीएफ में कांग्रेस पार्टी ने 93 सीटों पर चुनाव लड़ा और महज 21 सीट ही जीत सकी वही इस गठबंधन की दूसरी बड़ी दल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने 25 सीटों पर चुनाव लड़कर 15 सीट जीती। यानी यूडीएफ गठबंधन में कांग्रेस 93 सीट और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग 25 पर सीट लड़कर लगभग बराबर सीट जीतती है। यह स्पष्ट बताता है कि कांग्रेस पार्टी ने पूरी तैयारी से चुनाव नहीं लड़ा। 1982 के बाद यह कांग्रेस पार्टी का सबसे बुरा प्रदर्शन रहा था।

शशि थरूर ने यह कहकर कि कांग्रेस जिस हालात में हैं, उसमे अगले विधानसभा चुनाव 2026 में भी कांग्रेस पार्टी विपक्ष में ही बैठेगी गांधी परिवार और पी विजयन के कमजोर नस पर अपना हाथ रख दिया है। अब गाँधी परिवार ऐसी स्थिति पैदा करेगी की थरूर खुद ही पार्टी छोड़कर चले जाए। बदनामी और गुप्त सांठगांठ को छुपाने के लिए गांधी परिवार थरूर पर कोई कार्रवाई नहीं करेगी।

शशि थरूर को कांग्रेस पार्टी द्वारा अपने अनदेखी से काफी दुखी और त्रस्त हैं। चौथी बार के सांसद होने के नाते लोकसभा में थरूर को नेता या उपनेता का पद अवश्य मिलना चाहिए था। लोकसभा में कांग्रेस पार्टी के उपनेता गौरव गोगोई तीसरे बार के सांसद हैं। मगर थरूर को किनारे करने के लिए गौरव गोगोई को यह पद दिया गया है, क्योंकि वो पूर्वोत्तर इलाके से हैं। मगर कांग्रेस पार्टी इस तथ्य को दबाने का प्रयास करती हैं कि पूर्वोत्तर इलाके के असम के ही धुबड़ी लोकसभा सीट से कांग्रेस पार्टी के रकीबुल हुसैन ने देश में सर्वाधिक मतों से आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट पार्टी के सर्वेसर्वा और देश के बड़े नेता बदरुद्दीन अजमल को 10 लाख से भी अधिक मतों से हराया है, जो कांग्रेस पार्टी के एक-तिहाई से अधिक 34 सांसदों के जीत  के अंतर के बराबर है इससे यह भी स्पष्ट होता है कि कांग्रेस पार्टी कोई ख़ास मकसद से ही कई नेताओं के दावे को दरकिनार करके गौरव गोगोई को लोकसभा में उपनेता का पद दिया है।

Topics: AIUMLकांग्रेसज्योतिरादित्य सिंधियागांधी परिवारGandhi familyudfJyotiraditya ScindiaCongressShashi Tharoorशशि थरूरयूडीएफएआईयूएमल
अभय कुमार
अभय कुमार
अभय कुमार, सीएसडीएस (CSDS ), इप्सोस (IPSOS) सहित कई रिसर्च और मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। भारतीय राजनीति सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय मामलो से जुड़े मुद्दों पर खास दिलचस्पी है और इसके लिए लिखते रहते हैं। [Read more]
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