मुस्लिम बहुल सेक्युलर देश किर्गिस्तान अब अपने यहाँ बढ़ते कट्टरपंथ को लेकर बहुत परेशान है। वहाँ पर सरकार ने कठोर कदम उठाते हुए मजहब पर कड़े नियंत्रण के कदम उठाए हैं। 31 अगस्त 1991 को किर्गिस्तान को आजादी मिली थी और उसके बाद लागू हुए संविधान में उसे एक सेक्युलर देश घोषित किया गया था। वहाँ पर लगभग 90-91 प्रतिशत आबादी मुस्लिमों की है और उनमें भी सुन्नी मुस्लिम अधिक हैं।
वहाँ का संविधान धर्म की आजादी देता है। मगर सरकार ने उन सभी कट्टरपंथी इस्लामिक समूहों पर प्रतिबंध लगा रखा है, जिन्हें वह समाज के लिए खतरा मानती है। संविधान धर्म और सरकार दोनों को अलग-अलग करता है।
किर्गिस्तान के संविधान के अनुसार सभी धर्म और धार्मिक समूह एक समान हैं। यहाँ का संविधान उन सभी कदमों पर रोक लगाता है, जो एक धार्मिक समूह को जबरन दूसरे समूह में मतांतरण के लिए उकसाते हैं और अवैध धर्मांतरण करते हैं। वहाँ पर अभिभावकों की लिखित अनुमति के बिना बच्चों को धार्मिक समूहों में नहीं जोड़ा जा सकता है। वहाँ के कानून के अनुसार, किसी भी सार्वजनिक स्थान पर किसी भी प्रकार के धार्मिक साहित्य, फिर चाहे वह प्रिंटेड हो, ऑडियो हो या फिर वीडियो, का वितरण नहीं किया जा सकता है। इनमें सड़क, अपार्टमेंट बिल्डिंग्स, बच्चों के संस्थान और स्कूल भी शामिल हैं।
इन कदमों से ऐसा प्रतीत होता है कि किर्गिस्तान इस्लामिक देश होते हुए भी उस कट्टरता से बचा हुआ है, जिसने अधिकांश मुस्लिम देशों को अपनी गिरफ्त में ले रखा है। पाकिस्तान, अफगानिस्तान और अब बांग्लादेश भी इस्लामी कट्टरता से भरे हुए देश हो गए हैं। ईरान, इराक, कतर, फिलिस्तीन आदि देश भी कट्टरता को ही आगे बढ़ाते हैं। ऐसा लगता है जैसे कई इस्लामिक देशों में यह होड़ लगी है कि कौन कितना कट्टर है। किर्गिस्तान ने हालांकि, अपने देश में कई वर्ष पहले से ही यह कदम उठाने आरंभ कर दिए थे, जिससे उसके सेक्युलर मूल्य सुरक्षित रह सकें।
उसने इस्लामी चरमपंथ फैलाने वाले कई संगठनों को प्रतिबंधित कर दिया था। जैसे Yakyn Inkar समूह। यह ऐसा कट्टरपंथी इस्लामी समूह है, जिस पर किर्गिस्तान और कज़ाकिस्तान में वर्ष 2017 और 2018 से प्रतिबंध है। यह समूह सेक्युलर शिक्षा का विरोध करता है और अपने अनुयाइयों से आह्वान करता है कि वह राजनीति और टीकाकरण से दूर रहें।
हालांकि, वर्ष 2022 की एक रिपोर्ट के अनुसार, किर्गिस सुरक्षा संस्थानों का यह कहना है कि प्रतिबंधित Yakyn Inkar समूह देश में प्रतिबंध के बावजूद सक्रिय है। वर्ष 2022 में ही सरकार ने यह कहा था कि इस्लामी कट्टरपंथी समूह वहाँ की सेक्युलर सरकार को गिराना चाहती है और इस्लामी खिलाफत लागू करना चाहते हैं। वर्ष 2022 में रेडियोफ्रीयूरोपरेडियोलिबर्टी की एक रिपोर्ट के अनुसार किर्गिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों ने कहा था कि वहाँ पर उस समय Yakyn Inkar के कम से कम 50 सक्रिय सदस्य थे।
वर्ष 2019 में द डिप्लोमैट में भी यह रिपोर्ट थी कि किर्गिस्तान में सरकार के उन कदमों के विषय में रिपोर्ट प्रकाशित की थी जो सरकार द्वारा कट्टरपंथ को काबू करने के प्रयासों के विषय में बात करती थी। इसमें लिखा गया है कि किर्गिस्तान ने वर्ष 2014 में एक नीति को पनए था, जो धर्म के क्षेत्र में सार्वजनिक नीति का मार्गदर्शन करती है। यह रिपोर्ट बताती है कि किर्गिस्तान स्थानीय इस्लाम को आइसोलेट करना चाहता है। या यह कहा जाए कि किर्गिस्तान अपने देश का अलग इस्लाम बनाना चाहता है, तभी उसने कट्टरपंथी समूहों को प्रतिबंधित कर दिया था, मगर क्या ये प्रतिबंध प्रभावी हुए हैं। यदि हालिया दो दिन पहले के सरकार के एक और निर्णय की बात की जाए, तो यह पता चलेगा कि प्रतिबंध से समूहों की स्वीकार्यता ही बढ़ी है, कम नहीं हुई है।
मंगलवार को किर्गिस्तान में नेताओं ने सरकार के नए प्रस्तावों को अपना समर्थन प्रदान किया है, जिसमें सरकार धर्म पर और भी कड़े नियंत्रण की बात कर रही है। सरकार ने यह कदम केन्द्रीय एशिया में बढ़ते चरमपंथ को देखते हुए उठाया है। बिश्केक के अधिकारी इस्लामवादी कट्टरपंथियों पर कड़े और महत्वपूर्ण कदमों के अंतर्गत “धर्म और धार्मिक संघों की स्वतंत्रता” पर कानून में संशोधन करना चाहते हैं। संसद में पहली बार पारित किए गए संशोधनों में धार्मिक आधार पर राजनीतिक दल बनाने और घर-घर जाकर प्रचार करने वाली गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाना शामिल है।
वहीं सरकार ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि ऐसे केन्द्रीय निकाय बनाए जाएं, जो धार्मिक संगठनों को नियमित करें और यदि कोई विदेश में धार्मिक शिक्षा प्राप्त करना चाहता है तो देश के बाहर से “विनाशकारी प्रभाव” को रोकने के लिए पूर्वानुमति लेने की आवश्यकता है। dawn के अनुसार, हाल ही में कई ऐसी रिपोर्ट्स आई थीं, जिनके अनुसार किर्गिस्तान के कई युवक सीरिया में उन इस्लामिस्ट समूहों का हिस्सा हैं, जिन्होनें बशर-अल-असद की सरकार को गिराने में सहायता की है। वहीं, पिछले ही महीने किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव ने देश के प्रमुख मजहबी नेताओं से “कट्टरपंथी तत्वों के खिलाफ लड़ने” और “उन लोगों का मार्गदर्शन करने” का आग्रह किया जो सही रास्ते से भटक गए हैं।
मगर यह देखना होगा कि क्या किर्गिस्तान के यह कदम प्रभावी हो सकते हैं क्योंकि ऐसा देखा गया है कि इस्लाम में किसी ने भी उदार रुख अपनाने का प्रयास किया है तो उसे विरोध का सामना करना पड़ा है। भारत के ही इतिहास में झाँके तो दराशिकोंह जैसे उदार चेहरे के स्थान पर औरंगजेब को अधिक महान बताया जाता है और वर्तमान में मिसाइल मैन श्री एपीजे अब्दुल कलाम के प्रति भी एक बहुत बड़े वर्ग की उपेक्षा से यह समझ में आता है कि कट्टरपंथी वर्ग कभी भी उस चेहरे को स्वीकार्यता नहीं देता है, जो सभी के आदर की बात करता है।

















