उत्तर प्रदेश के संभल में शाही जामा मस्जिद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई हुई। इस मामले में मुस्लिम पक्ष को सुप्रीम कोर्ट से कुछ राहत मिली है, लेकिन हिन्दू पक्ष को भी एक महत्वपूर्ण निर्णय के रूप में सकारात्मक संकेत मिला है। सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने का निर्देश देते हुए कहा कि जब तक हाईकोर्ट में इस मामले पर सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक संभल की स्थानीय अदालत कोई भी अगला कदम नहीं उठाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की बेंच ने मुस्लिम पक्ष की याचिका पर टिप्पणी किए बिना उन्हें हाईकोर्ट में अपील करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मुस्लिम पक्ष की याचिका दाखिल होने के तीन दिन के भीतर हाईकोर्ट में सुनवाई की जाएगी।
मुस्लिम पक्ष के वकील हुफेजा अहमदी ने सुप्रीम कोर्ट से सर्वे रिपोर्ट दाखिल करने पर रोक लगाने की अपील की थी। हालांकि, चीफ जस्टिस ने इस मांग को ठुकरा दिया और कहा कि सर्वे रिपोर्ट को सीलबंद और गोपनीय रखा जाएगा।
हिन्दू पक्ष के लिए सकारात्मक संकेत
सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की मांग को खारिज करते हुए सर्वे रिपोर्ट के दाखिले की अनुमति दी, जिससे हिन्दू पक्ष को राहत मिली है। हिन्दू पक्ष ने दावा किया है कि मस्जिद की भूमि पर पहले हरिहर मंदिर हुआ करता था, जिसे 1526 में बाबर ने ध्वस्त कर मस्जिद बनवाई थी।
1991 का उपासना स्थल कानून और विवाद
मुस्लिम पक्ष 1991 के उपासना स्थल कानून का हवाला दे रहा है, जिसमें यह कहा गया है कि 15 अगस्त 1947 से पहले धार्मिक स्थलों के जो स्वरूप थे, उन्हें बदला नहीं जा सकता। हिन्दू पक्ष का कहना है कि यह कानून ऐतिहासिक अन्याय को सुधारने की प्रक्रिया में बाधा नहीं बन सकता।
हिंसा और राज्य सरकार की प्रतिक्रिया
संभल कोर्ट ने 19 नवंबर को सर्वे का आदेश दिया था, जिसके बाद 24 नवंबर को हुए सर्वे के दौरान बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय सड़कों पर उतर आया। इस दौरान हिंसा हुई, जिसमें चार लोगों की जान चली गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार ने मजिस्ट्रेटी जांच के साथ न्यायिक आयोग का भी गठन किया है।
काशी मथुरा की तरह है संभल का विवाद
संभल का यह विवाद वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद जैसा ही है। धार के भोजशाला में सरस्वती मंदिर और अजमेर की दरगाह पर पहले शिव मंदिर होने के दावों जैसे मामले भी इसी श्रेणी में आते हैं।
सुप्रीम कोर्ट का रुख
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को पूरी तरह से खत्म नहीं किया है और इसे जनवरी के दूसरे सप्ताह में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट के पास लंबित विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर निर्णय लिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला हिन्दू पक्ष के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सर्वे के जरिए उनके दावों को प्रमाणित करने का मौका देता है।
शिवम् दीक्षित एक अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार हैं, जिन्होंने 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत मनसुख टाइम्स (साप्ताहिक समाचार पत्र) से की। इसके बाद वे संचार टाइम्स, समाचार प्लस, दैनिक निवाण टाइम्स, और दैनिक हिंट में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया, जिसमें रिपोर्टिंग, डिजिटल संपादन और सोशल मीडिया प्रबंधन शामिल हैं।
उन्होंने न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, जहां इंडियाज़ पेपर परियोजना का नेतृत्व करते हुए 500 वेबसाइटों का प्रबंधन किया और इस परियोजना को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान दिलाया।
वर्तमान में, शिवम् राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं।
शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं।
उनकी उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी अंसार खान की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। यह सम्मान 8 मई, 2023 को दिल्ली में इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र (IVSK) द्वारा आयोजित समारोह में दिया गया, जिसमें केन्द्रीय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल, RSS के सह-प्रचार प्रमुख नरेंद्र जी, और उदय महुरकर जैसे गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
शिवम् की लेखन शैली प्रभावशाली और पाठकों को सोचने पर मजबूर करने वाली है, और वे डिजिटल, प्रिंट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहे हैं। उनकी यात्रा भड़ास4मीडिया, लाइव हिन्दुस्तान, एनडीटीवी, और सामाचार4मीडिया जैसे मंचों पर चर्चा का विषय रही है, जो उनकी पत्रकारिता और डिजिटल रणनीति के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
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