खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद से कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो का खालिस्तान प्रेम इस कदर उमड़ पड़ा कि उन्होंने भारत के साथ अपने रिश्तों को पूरी तरह से बिगाड़ दिया है। खालिस्तानी आतंकियों के उनके इसी प्रेम के कारण वहां पर भारतीय समुदाय पर कट्टरपंथियों के हमले बढ़े हैं। भारत लगातार खालिस्तानी कट्टरपंथ को लेकर कनाडा से कहता रहा है, लेकिन अब कनाडाई पत्रकार टेरी मिलवस्की ने भी अपने देश की आलोचना की है।
मिलवस्की ने खालिस्तानी अलगाववाद से निपटने के मुद्दे पर कनाडा द्वारा हालिया वर्षों में अपनाए गए दृष्टिकोण पर चिंता जाहिर करते हुए इसे दिखावा, पाखंड और राष्ट्रीय अपमान करार दिया। अपनी चिंता जाहिर करते हुए पत्रकार ने कहा कि मैं पिछले 20 साल से ये कह रहा हूं कि पिछले कई सालों से खालिस्तानी खतरे को नजरअंदाज करना और उसके प्रति सरकार का जो रवैया रहा है, ‘राष्ट्रीय अपमान’ है।
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मंदिर पर हमले की आलोचना की
समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए पत्रकार टेरी मिलवस्की ने ये बातें कही। इसके साथ ही उन्होंने ब्रैम्पटन में हिन्दू मंदिर पर किए गए हमले की निंदा की। पत्रकार मिलवस्की कनाडा में खालिस्तानी चरमपंथ और हिंसक वारदातों को पिछले 40 वर्षों के दौरान कनाडाई राजनेताओं की विफलता करार देते हैं। उनका कहना है कि ये बहुत ही परेशान करने वाला है। ये सब कनाडाई राजनेताओं की मूर्खता के कारण हो रहा है। मिलवस्की ने ब्रैम्पटन में हिन्दू सभा मंदिर पर खालिस्तानियों के हमले को चिंताजनक घटना करार दिया है।
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दावा-ऑस्ट्रेलिया टुडे को बैन नहीं किया
इसके साथ ही मिलवस्की ने ऑस्ट्रेलिया टुडे को बैन किए जाने की खबरों को बकवास करार दिया। पत्रकार ने दावा किया कि यह शुरू से ही ब्लॉक नहीं है। पत्रकार का दावा है कि कनाडाई नियामकों और फेसबुक के बीच मतभेद है। ये लंबे वक्त से चली आ रही व्यवसायिक बातचीत है, जिसके तहत जोर दिया जा रहा है कि कंटेट क्रिएटर को भुगतान करना होगा।

















