बस्तर का दर्द : कई किलोमीटर घसीटा, नही रही चमड़ी, जिंदा बेटे को काट डाला, नक्सलियों ने उजाड़ दिया वैद्यराज का परिवार
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बस्तर का दर्द : कई किलोमीटर घसीटा, नही रही चमड़ी, जिंदा बेटे को काट डाला, नक्सलियों ने उजाड़ दिया वैद्यराज का परिवार

लंबे समय तक चले वैद्यराज के इलाज से बिक गई घर की संपत्ति, ज्ञानेंद्र सिंह की मौत के बाद उसके 2 मासूम बच्चे अनाथ हो गए, परिवार रोजमर्रा की जरूरतों के लिए प्रतिदिन संघर्ष कर रहा है।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Oct 10, 2024, 02:30 pm IST
in भारत, छत्तीसगढ़

कांकेर, छत्तीसगढ़ । नक्सलियों द्वारा किए गए अत्याचार का काला अध्याय एक बार फिर सामने आया है। कांकेर जिले के तारुकी गांव के निवासी वैद्यराज दयालु राम जैन का परिवार नक्सलियों के क्रूर प्रहार का शिकार बन गया, जिसने इस परिवार की खुशियों को हमेशा के लिए खत्म कर दिया। इस दर्दनाक घटना में न केवल एक बेटे की निर्मम हत्या की गई, बल्कि इस कांड ने एक बुजुर्ग पिता को न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से तोड़ कर रख दिया है।

खौफनाक रात: जब खुशियों पर पड़ा नक्सली प्रहार

रात के लगभग 8:00 बजे का समय था, जब वैद्यराज अपने छोटे बेटे ज्ञानेंद्र सिंह जैन (उम्र 35 वर्ष) के साथ घर पर आराम कर रहे थे। परिवार में रोज की तरह भोजन के बाद सभी लोग सोने की तैयारी कर रहे थे, तभी अचानक नक्सलियों का एक बड़ा दल उनके घर में घुस आया। बिना किसी चेतावनी के हथियारबंद नक्सलियों ने ज्ञानेंद्र पर हमला कर दिया। दयालु राम जैन इस खौफनाक घटना को याद करते हुए कहते हैं, “उन्होंने मेरे बेटे को बिना किसी दया के कुल्हाड़ियों से काटना शुरू कर दिया।”

वैद्यराज ने अपने बेटे को बचाने की कोशिश की, लेकिन नक्सलियों ने उन्हें भी बेरहमी से पीटा। नक्सलियों ने उन्हें और उनके बेटे को घर से बाहर खींचकर तीन किलोमीटर दूर सीसी रोड तक घसीटा। वैद्यराज की आंखों में आंसू भर आते हैं जब वे बताते हैं, “सीमेंट की सड़क पर घसीटने की वजह से मेरे पीठ की चमड़ी तक उतर गई थी। उन्होंने मुझे जिंदा छोड़ दिया, लेकिन मेरे बेटे को मेरी आंखों के सामने कुल्हाड़ी से काट डाला”।

अनाथ हो गए दो छोटे मासूम बच्चे

इस क्रूर घटना ने न केवल वैद्यराज के छोटे बेटे ज्ञानेंद्र सिंह जैन की जान ले ली, बल्कि उसके परिवार की खुशियों को भी छीन लिया। ज्ञानेंद्र के दो छोटे बच्चे, जो इस घटना के वक्त घर में ही थे, अब अनाथ हो गए। एक पिता, जो अपने बच्चों के भविष्य को संवारने के सपने देख रहा था, उसे नक्सलियों ने बर्बरता से खत्म कर दिया।

वैद्यराज का बड़ा बेटा अब परिवार की जिम्मेदारी उठाने के लिए संघर्ष कर रहा है। बड़े बेटे के पास अब अकेले ही पूरे परिवार का खर्च उठाने की जिम्मेदारी आ गई है, जिसमें छोटे भाई के बच्चों का पालन-पोषण भी शामिल है। दयालु राम जैन ने टूटे हुए स्वर में कहा, “मेरे छोटे बेटे के जाने से हमारे घर का सहारा छिन गया। अब घर चलाने के लिए सिर्फ बड़ा बेटा ही बचा है, और वह भी इस बड़े सदमे से उबरने की कोशिश कर रहा है।”

इलाज के लिए बिक गई संपत्ति

नक्सलियों द्वारा बेरहमी से पिटाई और सीमेंट की सड़क पर घसीटे जाने के कारण वैद्यराज की हालत गंभीर हो गई थी। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां करीब दो महीने तक इलाज चला। इस इलाज ने परिवार की आर्थिक स्थिति को और भी बदहाल कर दिया। वैद्यराज बताते हैं, “इलाज के लिए हमारी सारी संपत्ति बिक गई। हमारे पास जो थोड़ी-बहुत जमीन थी, वह भी इलाज के खर्चों को पूरा करने में चली गई। अब हमारे पास न घर चलाने के लिए पैसा है, न ही कोई संपत्ति बची है।”

वैधराज का परिवार आर्थिक तंगी और भावनात्मक आघात से जूझ रहा है। ज्ञानेंद्र की मौत ने सिर्फ उनके घर का सहारा ही नहीं छीना, बल्कि उनके सपनों को भी चकनाचूर कर दिया। उनके दोनों छोटे बच्चों का भविष्य अब अंधकारमय हो गया है, क्योंकि उनका पालन-पोषण और शिक्षा एक चुनौती बन गई है।

न्याय और पुनर्वास की गुहार

वैद्यराज दयालु राम जैन आज भी इस दर्दनाक घटना को याद कर सिहर जाते हैं। उनका कहना है कि नक्सलियों ने न केवल उनके बेटे की हत्या की, बल्कि उनके पूरे परिवार को उजाड़ दिया। वैधराज ने कहा- “नक्सलियों के कारण मेरा पूरा परिवार बर्बाद हो गया है। आज भी जब वह रात याद आती है, तो मुझे नींद नहीं आती”।

अब वैद्यराज सरकार से न्याय और पुनर्वास की गुहार लगा रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि बस्तर में शांति वापस आए। हमें न्याय मिले और सरकार हमारे पुनर्वास की व्यवस्था करे।” वैधराज का परिवार न केवल आर्थिक रूप से बर्बाद हो गया है, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी टूट चुका है।

नक्सली अत्याचार : बस्तर का कड़वा सच

वैद्यराज दयालु राम जैन का परिवार छत्तीसगढ़ के उन हजारों परिवारों में से एक है, जो नक्सली हिंसा का शिकार हुए हैं। बस्तर क्षेत्र में नक्सलियों की बर्बरता की यह घटना एक और दुखद उदाहरण है। निर्दोष नागरिकों की जान लेना, उनके परिवारों को तबाह करना और उनके बच्चों को अनाथ बनाना, नक्सलियों के क्रूर एजेंडे का हिस्सा बन चुका है।

सरकार की तरफ से नक्सलियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन इन घटनाओं से यह साफ हो जाता है कि बस्तर में आज भी आम नागरिक नक्सलियों के आतंक के साए में जीने को मजबूर हैं।

आखिर कब खत्म होगा यह खौफ.?

वैद्यराज का दर्द इस बात की गवाही देता है कि नक्सलवाद ने बस्तर क्षेत्र के लोगों को किस हद तक तबाह किया है। यह सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि उन अनगिनत परिवारों की सच्चाई है, जो नक्सली आतंक का शिकार हुए हैं।

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Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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