कांग्रेस की सोच ही डराने वाली है!
October 6, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम सम्पादकीय

कांग्रेस की सोच ही डराने वाली है!

वामपंथी विचार एक उन्माद, एक जुनून की तरह दिमाग पर चढ़ता है, मगर जैसे ही भान होता है कि यह तूफान सब तहस-नहस कर देगा तो समाज इसे उतार फेंकता है। पूरी दुनिया में इस विचारधारा की उठान, उत्पात और उन्मूलन को इसी तरह देखा गया है।

Written byहितेश शंकरहितेश शंकर
Apr 29, 2024, 06:32 am IST
inसम्पादकीय
2012 में तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने विरासत टैक्स लाने की बहस शुरू कर थी

2012 में तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने विरासत टैक्स लाने की बहस शुरू कर थी

पिछले अनेक चुनावों में देश के सबसे बुजुर्ग राजनीतिक दल को लोग मूर्खता का पिटारा मान नकार चुके थे। कांग्रेस ने अनजाने में ही सही, जनता की समझदारी पर आम चुनाव से पहले ही अपनी मुहर लगा दी है।
राहुल गांधी द्वारा सत्ता में आने पर वित्तीय सर्वेक्षण कराए जाने का बयान देने के बाद कांग्रेस बचाव की मुद्रा में थी, तो अब इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष और राहुल गांधी के सलाहकार सैम पित्रोदा ने भारत में विरासत पर टैक्स लगाए जाने की वकालत कर दी है।

हितेश शंकर

पित्रोदा के बयान के बाद कांग्रेस नेताओं ने उनसे पल्ला झाड़ लिया, लेकिन वे यह भूल गए कि इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष के नाते जिस व्यक्ति के पास विदेश में रहने वाले भारतीयों को कांग्रेस और उसके विचार से जोड़ने की जिम्मेदारी है, वे चाह कर भी उसके बयान से पल्ला नहीं झाड़ सकते।

सैम पित्रोदा का बयान तो अभी आया है, लेकिन इससे पहले 2012 में तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने इस टैक्स को लाने की बहस शुरू कर थी। हालांकि कारोबारी जगत के भारी विरोध जताने पर ऐसा नहीं हो पाया। इन दोनों बयानों के परिप्रेक्ष्य में देखें तो इसका यही अर्थ निकलता है कि कांग्रेस की ऐसी मंशा पहले से ही थी। यदि 2014 में कांग्रेस सत्ता में आ गई होती तो अपने राजनीतिक एजेंडा को आगे बढ़ाते हुए बहुसंख्यक लोगों की संपत्ति को, उनकी जीवनभर की पूंजी को अभी तक सम्भवत: हड़प चुकी होती।

हम भारतीयों के लिए पूंजी क्या है, बचत क्या है, पिता के ऋण को संतान द्वारा चुकाने की सोच क्या है या कहिए अर्थ के लिए धर्म आधारित ‘अर्थपूर्ण’ संकल्पना क्या है! यह कांग्रेस भला कैसे समझेगी! राम से तार जुड़ना और रोम से तार जुड़ना दो अलग बातें हैं।

चार पुरुषार्थ (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) का आधार और संतुलन सामान्य भारतीय भले सहजता से आत्मसात करता हो, किन्तु अपना नाम (सत्यनारायण गंगाराम) तक छोड़ बैठे ‘सैम’ के लिए भारतीयता के सूत्रों को समझना कठिन है।
भारत की राजनीति को भारतीयता की दृष्टि से देखने वाले लोगों की मंशा ऐसी हो ही नहीं सकती। आयातित विचारों के साथ भारत में राजनीति की नाव को खेने की कोशिश करने वाले लोग, जिनकी दृष्टि दूसरों की संपत्ति पर हो, वे ही ऐसा विचार पाल सकते हैं।

ऐसे आयातित अभारतीय विचार वामपंथी राजनीति की विशेष पहचान रहे हैं। मॉस्को में बारिश होने पर दिल्ली में छाता तान लेने वाले वामपंथी रूस के बाद भारत (बंगाल) में दशकों तक बड़ा प्रभुत्व रखते थे, किन्तु एकाएक मिट्टी में मिल गए। क्यों? क्योंकि सामाजिक स्वभाव और स्वदेशी दर्शन को नकार कर थोपे गए विचार कभी इस देश में राजनीतिक पूंजी हो ही नहीं हो सकते।

वामपंथी विचार एक उन्माद, एक जुनून की तरह दिमाग पर चढ़ता है, मगर जैसे ही भान होता है कि यह तूफान सब तहस-नहस कर देगा तो समाज इसे उतार फेंकता है। पूरी दुनिया में इस विचारधारा की उठान, उत्पात और उन्मूलन को इसी तरह देखा गया है।

वास्तव में वामपंथी विचार की अंतर्निहित वृत्ति हिंसा ही है। अपने विचारों को मूर्त रूप देने का कोई आदर्श तरीका या ‘मॉडल’ वामपंथियों के पास नहीं है। इस कारण वामपंथ भारत ही नहीं, धीरे—धीरे दुनियाभर में खत्म होता जा रहा है।

दुनिया और भारत के सभी राज्यों में राजनीतिक आधार खो चुके और अपने आखिरी गढ़ों में अंतिम सांस गिन रहे वामपंथियों का राजनीतिक दिवालियापन और बौद्धिक उजड्डता आज कांग्रेस के कंधों पर सवार होकर कांग्रेस को ही खा रही है।
जिंदा और प्रासंगिक रहने के लिए भले यह वामपंथ की चाल है, किन्तु इसमें कांग्रेस भी बराबर की साझेदार है। वैसे भी समाजवादी मॉडल के तौर पर हमेशा से कांग्रेस को ‘क्रांति और साम्यवादी’ विचार आकर्षित करते रहे हैं। इसी कारण वामपंथी खेमे ने सत्ता के माध्यम से अपनी (कथित) बुद्धिजीवी छवि और अकड़ कायम रखने के लिए हमेशा अपनी जगह कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल में बनाए रखी।

आज राजनीतिक सत्ता की छीजन के साथ वामपंथी तो खत्म होने के कगार पर हैं, लेकिन कांग्रेस इसका आकलन अभी तक नहीं कर पाई कि उसकी सत्ता का पतन क्यों हुआ? कांग्रेस ने देश में अपना जनाधार क्यों खोया?
वास्तव में अंग्रेजी राज के ‘तंत्र और व्यवस्था’ को 1857 जैसे स्वतंत्रता आंदोलन की आंधी से बचाने के लिए अंग्रेजों द्वारा ही कांग्रेस को जन्म दिया गया था। स्वतंत्रता पूर्व कुछ समय तक यह राष्ट्रीय विचारों का अखिल भारतीय मंच रही। बाद में अंग्रेजों की ही तर्ज पर ‘बांटो और राज करो’ की नीति को आत्मसात करते हुए परिवारवादी तत्वों ने इस पर मानो कब्जा ही कर लिया। ऐसे में देश की सबसे बड़ी और पुरानी होने का दम भरने वाली कांग्रेस जनता के मन से उतरती गई।

आज कांग्रेस फिर से ऐसा ही प्रयास कर रही है। उसकी मंशा फिर से ‘बांटो और राज करो’ की है। जैसे—जैसे कांग्रेस परिवार केंद्रित हुई, राष्ट्र से विमुख हुई, तो राष्ट्र के मन से भी उतर गई। इसीलिए जनता ने लोकतंत्र के आंगन से उसे बुहार कर बाहर कर दिया। कांग्रेस राष्ट्रीय विचार से कटने और बहुसंख्यक समाज के प्रति घृणा पालने के कारण हुई अपनी इस दुर्दशा को नहीं समझ पाई (हालांकि चिंतन शिविरों में ए.के. एंटनी जैसे नेताओं ने पार्टी को चेताया भी)। ऐसे में अपना हाल भूल बैठी कांग्रेस वामपंथी चाल का आकलन कैसे कर पाती?
हां, वामपंथी यह जरूर समझ गए कि अगर टूटे पैरों के बावजूद चलना है तो यह कांग्रेस ही है, जिसके कंधों पर सवारी की जा सकती है।

हार की आशंका या सत्ता की छटपटाहट, कांग्रेस ज्वर से तपते रोगी की तरह अनर्गल प्रलाप कर रही है। नाम भले कांग्रेसी नेताओं के हों, किन्तु वित्तीय सर्वेक्षण कराने या विरासत टैक्स की बात जैसे सभी विचार वामपंथी प्रभाव और ताप से आ रहे हैं।

बहरहाल, कांग्रेसी मूर्खताओं के पीछे वामपंथ की हिंसक धूर्तता छिपी है। इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। कांग्रेस एक खतरनाक मंसूबे के साथ आगे बढ़ रही है। आपकी मेहनत, आपकी कमाई, आपकी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य… सब कुछ उनके निशाने पर है।
ऐसी राजनीति से सतर्क, बहुत सतर्क रहने की आवश्यकता है।

@hiteshshankar

Topics: पाञ्चजन्य विशेषक्रांति और साम्यवादीसमाजवादी मॉडलवामपंथ की हिंसक धूर्तताअभारतीय विचार वामपंथी राजनीतिRevolution and CommunismSocialist ModelDivide and RuleViolent Cunning of LeftUn-Indian Thoughts Left Politics‘बांटो और राज करो’
हितेश शंकर
हितेश शंकर
हितेश शंकर पत्रकारिता का जाना-पहचाना नाम, वर्तमान में पाञ्चजन्य के सम्पादक [Read more]
Share14
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा

‘सुशासन का अर्थ-विश्वास, सहभागिता और अंत्योदय’

दीप प्रज्ज्वलित कर संवाद का उद्घाटन करते श्री वी. भागैय्या। साथ में हैं (बाएं से) डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी, स्वामी निजामृतानंद पुरी, श्री अरुण गोयल, डॉ. आशीष गौतम और श्री हितेश शंकर

छत्रपति संवाद : संकल्प से सिद्धि तक

श्री वी. भागैय्या से बातचीत करते श्री हितेश शंकर

‘विषमता-मुक्त और एकात्मता-युक्त समाज के निर्माण में लगा है संघ’

एनसीईआरटी ने सिलेबस में किया बदलाव। दिल्ली सल्तनत और मुगलों की जगह भारतीय नायकों को दिया स्थान।

NCERT में दिल्ली सल्तनत और मुगलों का इतिहास घटा, भारतीय स्वाभिमान बढ़ा: क्यों तिलमिलाया लेफ्ट-लिबरल इकोसिस्टम?

कैप्टन स्मित मछार

कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी पर दुनिया कर रही सलाम, फिर भारत का लेफ्ट-लिबरल इकोसिस्टम चुप क्यों ?

आज का श्लोक : नेतृत्व और टीम भावना का सूत्र, श्लोक में छिपी है सफलता की 3 मुख्य शर्तें

Load More

ताज़ा समाचार

Haldwani Police Arrested Fake Pehlwan Naeem Woman Death Case Panchjanya News

इलाज के नाम पर मरोड़ी महिला की गर्दन: हल्द्वानी में फर्जी पहलवान नईम गिरफ्तार, महिला की मौत के बाद भेजा गया जेल

CM Pushkar Singh Dhami Meets ABVP Newly Elected Office Bearers Dehradun Panchjanya

“युवा बनें फ्यूचर रेडी”: सीएम धामी से मिले ABVP के नवनिर्वाचित पदाधिकारी, मिला तकनीक व AI से जुड़ने का मंत्र

Love jihad with hindu girl

ग्रेटर नोएडा से पीलीभीत तक लव जिहाद: कन्वर्जन पीड़िता का फिर अपहरण, मिसरयार व शहरयार खां पर FIR दर्ज

श्री मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

कारंजा में ‘बालासाहेब देवरस नेत्रालय’ का लोकार्पण करेंगे डॉ. मोहन भागवत जी: मप्र-महाराष्ट्र के इन जिलों को बड़ी सौगात

US Ohio Swaminarayan Temple Attack VHP National Spokesperson Vinod Bansal Panchjanya

अमेरिका में फिर स्वामीनारायण मंदिर पर हमला: VHP प्रवक्ता विनोद बंसल ने अमेरिका व USCIRF से पूछे 3 तीखे सवाल!

Ashok Singhal Birth Centenary Vishisht Jan Sammelan Kurnool Koteshwar Sharma VHP

“अशोक सिंहल जी ने दूर कीं सामाजिक कुरीतियां”: कुरनूल में बोले कोटेश्वर शर्मा

महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा

‘सुशासन का अर्थ-विश्वास, सहभागिता और अंत्योदय’

Ashok Singhal Birth Centenary Youth Sammelan Mumbai Shanmukhananda Hall Arun Kumar

अशोक सिंहल जन्मशताब्दी: मुंबई में गूंजा राष्ट्रनिर्माण का संकल्प, 4 हजार युवाओं ने लिया राष्ट्रनिर्माण का संकल्प

50 एकल बच्चों ने किए महाप्रभु जगन्नाथ के भव्य दर्शन, गांव से जगन्नाथ धाम तक आस्था का सेतु

कल का मौसम: 6 अक्टूबर को फिर से 24 राज्यों में ‘मूसलाधार बारिश’, IMD ने जारी किया अलर्ट

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies