दंगाइयों में बच्चे महिलाएं, नौजवान और बुजुर्ग शामिल : घायल पत्रकार ने कहा- कश्मीर हो या हल्द्वानी हिंसा का एक ही पैटर्न
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दंगाइयों में बच्चे महिलाएं, नौजवान और बुजुर्ग शामिल : घायल पत्रकार ने कहा- कश्मीर हो या हल्द्वानी हिंसा का एक ही पैटर्न

पत्रकार मुकेश ने पाञ्चजन्य को बताया हल्द्वानी हिंसा का आँखों देखा खौफनाक मंजर, कहा- पुलिसकर्मियों को थी जिंदा जलाने की तैयारी, चारों तरफ से हो रहा था हमला, ईश्वर ने मुझे नवजीवन दिया,

Written byShivam DixitShivam Dixit
Feb 10, 2024, 01:12 pm IST
in भारत, उत्तराखंड
हल्द्वानी हिंसा पर पाञ्चजन्य से बात करते हुए पत्रकार मुकेश सक्सेना (बैकग्राउंड सांकेतिक)

हल्द्वानी हिंसा पर पाञ्चजन्य से बात करते हुए पत्रकार मुकेश सक्सेना (बैकग्राउंड सांकेतिक)

हल्द्वानी । जिस दिन प्रशासन और नगर निगम की टीम बनभूलपुरा क्षेत्र में सरकारी जमीन पर बने कथित मदरसे को हटाने पहुंची और उसके विरोध के नाम पर इस्लामिक कट्टरपंथियों ने जो उत्पात मचाया वह पूरे देश ने देखा। इस्लामिक दंगाइयों ने इस हमले की तैयारी पहले से ही कर रखी थी उन्होंने प्रशासन, नगर निगम और पत्रकारों को चारों तरफ से घेरकर हमला किया जिसके बाद कईयों की हालत गंभीर हो गई।

बनभूलपुरा (Banbhulpura) क्षेत्र में कट्टरपंथी दंगाइयों ने जो उपद्रव किया वह कोई अप्रत्याशित घटना नहीं थी। हल्द्वानी हिंसा (Haldwani violence) के लिए दंगाइयों ने इसकी बहुत पहले से तैयारी की हुई थी टीम पाञ्चजन्य भी घटना के तुरंत बाद हल्द्वानी के लिए रवाना हो गई और जब पाञ्चजन्य ने इस संबंध में घायल पत्रकार मुकेश सक्सेना से बातचीत की तो वह उस खौफनाक मंजर की बात करते करते भावुक हो गए और बोले की आज जो वो जिंदा खड़े हैं यह उनका पुनर्जन्म है।

पत्रकार मुकेश ने बताया की वह अतिक्रमण हटाने गई टीम के साथ कवरेज की दृष्टी से वहां पर मौजूद थे। प्रशासन और नगर निगम की टीम उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेश के बाद वहां पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करने पहुंची थीं।

लेकिन जैसे ही सरकारी भूमि पर बने कथित मदरसे को हटाना शुरू किया वहां पर सबसे पहले मुस्लिम महिलाओं ने विरोध करना शुरू कर दिया। अचानक से विरोध करते करते महिलाएं प्रशासनिक अधिकारीयों और अन्य लोगों से बत्तमीजी करने लगीं, इस दौरान इन्होने अपने साथ ढाल के रूप में बच्चे भी खड़े कर रखे थे। वहीं नगर निगम की टीम ने लगभग 4:30 बजे अवैध अतिक्रमण को ध्वस्त कर दिया गया और इधर 4:45 तक मौके पर करीब 1500-1600 लोगों की मुस्लिम भीड़ जुट गईं जिनमे महिलाएं बच्चे आगे थे उनके पीछे नौजवान और उनके पीछे बुजुर्ग  लोग मौजूद थे।

जिस हिसाब से पहले विरोध कराना फिर बत्तमीजी करना और उसके बाद हमला करना ये सब ऐसा लग रहा था की सब पहले से ही प्लान किया गया हो या ऐसा कह सकते हैं कि वह कई दिनों से इसकी तैयारी कर चुके थे।

मुकेश ने आगे बात करते हुए बताया कि मुस्लिम भीड़ ने प्रशासन, नगर निगम और पत्रकारों को चारो तरफ से घेर लिया और पथराव करना शुरू कर दिया। ये पथराव का पैटर्न ठीक वैसा था जैसा कश्मीर में जवानों के ऊपर किया जाता था। हमने उसे केवल टीवी पर देखा लेकिन उस दिन जब खुद सामने से इस प्रकार के पथराव का शिकार हुए तो महसूस किया कि ये पैटर्न सभी जगह एक जैसा बिलकुल एक ही तरह से होता है।

मुस्लिम भीड़ ने पथराव के बाद पैट्रोल बम भी फैंके हम बचने के लिए जिधर जाते उधर से ही हमला होता, हमारा कैमरा मोबाइल सब टूट गया किसी प्रकार की कोई फुटेज न रहे इसलिए उसे कट्टरपंथी भीड़ ने नष्ट कर दिया। उन लोगों के पर धारधार हथियार और अवैध तमंचे कट्टे भी धे वे अंधाधुंध फायर कर रहे थे।

हमारे साथ महिला पुलिसकर्मी भी थीं जो बचने के लिए एक घर में छिप गईं थीं लेकिन उत्पाती भीड़ ने उन्हें देख लिया और उन्हें जिंदा जलाने का प्रयास किया। जैसे तैसे उन सब ने वहां सभी भागकर अपनी जान बचाई। इधर मैं भी मौका देखकर वहां से बाहर निकल सका।

पत्रकार मुकेश ने कहा शायद ही मेरे कोई पूर्वजन्म के अच्छे कार्य या इस जन्म के पूण्य रहे होंगे जो ईश्वर ने मुझे दूसरा जीवन वरदान के रूप में दिया है।

चूँकि मुकेश कई वर्षों से स्थानीय पत्रकारिता कर रहें हैं तो हमने उनसे बनभूलपुरा के उन लोगों के बारे में जानना चाहा कि यहां इतनी घनी बसावट कैसे हो गई। ये लोग कहाँ से आएं है। तो उन्होंने बताया कि ये कहां से आएं है ये तो केवल यहीं लोग जानते हैं लेकिन अगर जांच हो तो इसमें अधिक संख्या वैध बंगलादेशी और रोहिंग्याओं की निकलेगी। इनमे से कईयों के पास कोई सत्यापन या आईडी नहीं मिलेगी। धीरे-धीरे ये लोग आते गए और बसावट बसती चली गई। ये जिस जमीन पर रह रहे हैं वह जमीन भी पंजीकृत नहीं है, इनके पास केवल मात्र 50 रुपए का पट्टा है जो इन्हें उन्ही लोगों ने उपलब्ध कराया है जिन्होंने इन्हें यहाँ लाकर बसाया हैं, वही लोग इन्हें एक कोई आईडी जैसे आधार पैन राशन या अन्य आसानी से उपलब्ध कर देते हैं। फिलहाल तो ये जमीन ही नगर निगम की है।

 

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Shivam Dixit
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अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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