उत्तराखंड में आ रहा है 'कॉमन सिविल कोड' बिल, आजादी के बाद का अधूरा काम होगा पूरा
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उत्तराखंड में आ रहा है ‘कॉमन सिविल कोड’ बिल, आजादी के बाद का अधूरा काम होगा पूरा

अब राम राज्य की कल्पना होगी साकार, जानिए क्यों खास है ये बिल..?

Written byदिनेश मानसेरादिनेश मानसेरा
Feb 2, 2024, 04:35 pm IST
in उत्तराखंड

देहरादून । उत्तराखण्ड में कॉमन सिविल कोड के लिये सेवानिवृत्त न्यायाधीश श रंजना प्रकाश देसाई के नेतृत्व में बनी समिति ने शुक्रवार को ड्राफ्ट मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी को सौंपा दिया है। उम्मीद की जा रही है जो काम जनसंघ की स्थापना के समय से अधूरा छूटा हुआ था वो अगले कुछ दिनों में पूरा होने जा रहा है और देवभूमि उत्तराखंड इसका साक्षी बनेगा।

उत्तराखंड विधान सभा चुनाव 2022 से पूर्व  बीजेपी ने उत्तराखण्ड राज्य की जनता से भारतीय जनता पार्टी के संकल्प के अनुरूप उत्तराखंड में कॉमन सिविल कोड लाने का वायदा किया था। वायदे के मुताबिक उत्तराखंड की धामी सरकार गठन के तुरंत बाद ही पहली कैबिनेट की बैठक में ही समान नागरिक संहिता बनाने के लिए एक विशेषज्ञ समिति के गठन का निर्णय लिया और 27 मई 2022 को उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई के नेतृत्व में पांच सदस्यीय समिति गठित की गई। समिति में सिक्किम उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश प्रमोद कोहली, उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह, दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो० सुरेखा डंगवाल एवं समाजसेवी मनु गौड़ को सम्मिलित किया गया।

समिति द्वारा दो उप समितियों का गठन भी किया गया। जिसमें से एक उपसमिति का कार्य “संहिता“ का प्रारूप तैयार करने का था। दूसरी उपसमिति का कार्य प्रदेश के निवासियों से सुझाव आमंत्रित करने के साथ ही संवाद स्थापित करना था। समिति द्वारा देश के प्रथम गांव माणा से जनसंवाद कार्यक्रम की शुरूआत करते हुए प्रदेश के सभी जनपदों में सभी वर्ग के लोगों से सुझाव प्राप्त किये गये। इस दौरान कुल 43 जनसंवाद कार्यक्रम किये गये और प्रवासी उत्तराखंडी भाई-बहनों के साथ 14 जून 2023 को नई दिल्ली में चर्चा के साथ ही संवाद कार्यक्रम पूर्ण किया गया।

पूर्व जस्टिस रंजना देसाई समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिये समाज के हर वर्ग से सुझाव आमंत्रित करने के लिये 08 सितम्बर 2022 को एक वेब पोर्टल लॉन्च करने के साथ ही राज्य के सभी नागरिकों से एसएमएस और वाट्सअप मैसेज द्वारा सुझाव आमंत्रित किये गये। समिति को विभिन्न माध्यमों से दो लाख बत्तीस हजार नौ सौ इक्सठ (2,32,961) सुझाव प्राप्त हुए। जो कि प्रदेश के लगभग 10 प्रतिशत परिवारों के बराबर है। लगभग 10 हजार लोगों से संवाद एवं प्राप्त लगभग 02 लाख 33 हजार सुझावों का अध्ययन करने हेतु समिति की 72 बैठकें आहूत की गई। मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी द्वारा समिति से रिपोर्ट प्राप्त कर राज्य की  जनता से किए वायदे की तरफ दूसरा कदम बढ़ाया।

उत्तराखंड सरकार इस रिपोर्ट का अध्ययन और परीक्षण कर यथाशीघ्र उत्तराखंड राज्य के लिये कॉमन सिविल कोड कानून का प्रारूप तैयार कर संबंधित विधेयक को आगामी विधान सभा के विशेष सत्र में रखेगी। इस कानून को लागू करने की दिशा में सरकार तेजी से आगे बढ़ेगी।

कॉमन सिविल कोड को लागू करने का साहस पुष्कर सिंह धामी ने दिखाया है, उल्लेखनीय है कॉमन सिविल कोड का बिल आजादी के बाद संसद में भीं पास हो गया था किंतु कांग्रेस की नेहरू सरकार ने इसे लागू नही होने दिया। जबकि डॉ. भीम राव अम्बेडकर, सरदार पटेल, श्यामा प्रसाद मुखर्जी इसके पक्ष में थे।

1956 में जनसंघ बना तब भी पार्टी के नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं. दीन दयाल उपाध्याय, अटल बिहारी बाजपेयी ने इस अपने विजन डैक्यूमेंट का हिस्सा बनाया, बाद में भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ तब भी कॉमन सिविल कोड पार्टी के राष्ट्रीय एजेंडे में शामील था,  कई पारिवारिक मुद्दो पर सुप्रीम कोर्ट  ने जब जब कोई बड़े फैसले लिए तब तब केंद्र और राज्य सरकारों को ये निर्देशित किया गया कि वो समान नागरिक संहिता को लागू करें। लेकिन वोट बैंक की राजनीति ने ऐसा होने नही दिया।

दशकों के इंतजार के बाद उत्तराखंड सरकार ने जब इसे लागू करने ले लिए ठोस पहल की तब से देश में इस चर्चा को जन्म दे दिया कि कॉमन सिविल कोड क्या अब और राज्य भी उत्तराखंड की देखा देखी लागू करेंगे?

बरहाल 6 फरवरी का इंतजार है जब उत्तराखंड सरकार इसे विधेयक के रूप में लाकर सदन के पटल पर रखेगी और इस पर चर्चा कर अपने पर्याप्त बहुमत से पास कर लेजाएगी। जिसके बाद इसे राज्यपाल और जरूरी हुआ तो राष्ट्रपति के पास भी मंजूरी के लिए  भेजा जा सकता है। ऐसा भी आभास होने लगा है कि उत्तराखंड के बाद अन्य बीजेपी शासित राज्य भी इसे लागू करने की बात करेंगे और ऐसे में उत्तराखंड सिविल कोड बिल उन राज्यों के लिए एक नजीर बन जाएगा और लोक सभा चुनावों तक ये एक बड़ा राष्ट्रीय मुद्दा भी बन जाएगा।

राम राज्य की कल्पना होगी साकार : अश्वनी उपाध्याय

भारत में सबसे पहले समानता का अधिकार राम राज्य में मिला, इसी लिए लोग आदर्श राज्य के रूप में राम राज्य का उदाहरण देते है, कॉमन सिविल कोड लागू होने से राम राज्य आएगा। उत्तराखंड की धामी सरकार ने पीएम मोदी के निर्देशन में दशकों से अधूरा और रुका हुआ कार्य पूरा किया है।

 

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