1971 : मित्रता, वीरता और साझा इतिहास की विजय
June 4, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

1971 : मित्रता, वीरता और साझा इतिहास की विजय

1971 के युद्ध में भारत तब उतरा, जब वहां पाकिस्तानी सेना ने बंगाली हिंदुओं और बंगाली अभिजात वर्ग के खिलाफ व्यापक हिंसा और अत्याचार किए, बांग्लादेश में 30 लाख से ज्यादा हिंदुओं का नरसंहार किया और मुक्ति बाहिनी ने भारत से मदद मांगी

Written byPanchjanyaPanchjanya
Dec 16, 2023, 03:40 pm IST
in भारत
16 दिसंबर, 1971 को समर्पण दस्तावेज पर हस्ताक्षर करते पाकिस्तान के ले.जनरल ए.ए.के. नियाजी

16 दिसंबर, 1971 को समर्पण दस्तावेज पर हस्ताक्षर करते पाकिस्तान के ले.जनरल ए.ए.के. नियाजी

सत्ता के ढांचे पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए बहुसंख्यक पंजाबी सुन्नी आबादी को हर तरह की दुस्साहसी हरकतों के लिए प्रोत्साहित करती रहती है। पंजाबी सुन्नी सेना ने सत्ता पर पकड़ बनाए रखने की चाहत में भारत से खतरे का हौव्वा रचा।

पाकिस्तान की पंजाबी प्रभुत्व वाली सेना अपनी झूठी शुद्धता के स्वांग के बचाव के लिए और सत्ता के ढांचे पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए बहुसंख्यक पंजाबी सुन्नी आबादी को हर तरह की दुस्साहसी हरकतों के लिए प्रोत्साहित करती रहती है। पंजाबी सुन्नी सेना ने सत्ता पर पकड़ बनाए रखने की चाहत में भारत से खतरे का हौव्वा रचा। इसी उद्देश्य से उसने स्कूलों और मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को भारत, भारतीयों और हिन्दुओं से नफरत करने की शिक्षा दी। लेकिन उसके यह हथकंडे उसी पर भारी पड़ चुके हैं और भविष्य में भी पड़ते रहेंगे। इसी कारण पाकिस्तान को उन खतरों का सामना करना पड़ता है, जिनकी उत्पत्ति खरतनाक ढंग से तैयार की गई मानसिकता में निहित है।

पाकिस्तान को पहला बड़ा झटका अपनी स्थापना के 24 साल बाद तब लगा जब उसे पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में अपनी 55% आबादी और अपना लगभग आधा क्षेत्र खोना पड़ा। पाकिस्तान की पंजाबी सेना ने अपने अतृप्त लालच के कारण, पूर्वी विंग के साथ वैध सत्ता साझा करने से इनकार कर दिया और मजहब के नाम पर उसे जोड़े रखना संभव नहीं रहा। बांग्लादेश के पृथक होने के लिए इस्लामाबाद बहुत आसानी से नई दिल्ली को दोषी ठहरा देता है, लेकिन तथ्यों की बारीकी से जांच करने पर कुछ और ही पता चलता है।

1971 के युद्ध में भारत की रणनीति संभवत: बांग्लादेश की स्वतंत्रता को सुरक्षित करने और क्षेत्र में भारत के अपने हितों की रक्षा के लिए एक त्वरित और निर्णायक जीत हासिल करने पर केंद्रित थी। 16 दिसंबर को मनाया जाने वाला विजय दिवस, 1971 के युद्ध में भारत की जीत और एक स्वतंत्र देश के रूप में बांग्लादेश के निर्माण का प्रतीक है। इस दिन भारत अपने देश की रक्षा करने वाले सभी सैनिकों को श्रद्धांजलि देता है।

1947 और 1970 के बीच, जब भी पाकिस्तान ने भारत पर हमला करने का फैसला किया, भारत के लिए रणनीतिक रूप से सरल विकल्प पूर्वी पाकिस्तान पर कब्जा करना हो सकता था, जिसका प्रभावी ढंग से बचाव करने की स्थिति में इस्लामाबाद कभी भी नहीं था। कारण यह कि पूर्वी विंग और इस्लामाबाद के बीच भारी भरकम भौगोलिक दूरी है और इसके परिणामस्वरूप वह न तो भारी सैन्य बल वहां ले जा सकता था और न रसद। लेकिन भारत ने कभी भी पश्चिम में पाकिस्तानी हरकतों का जवाब पूर्वी सीमा पर नहीं दिया। नई दिल्ली ने पाकिस्तान के हमलों को पश्चिमी मोर्चे पर ही सीमित रखा, चाहे वह कश्मीर पर हमला रहा हो, या 1965 का युद्ध।

1971 में लाखों शरणार्थियों के भारत आने से इस्लामाबाद ने पूर्वी पाकिस्तान में अपनी स्थिति और कमजोर कर ली और भारत को सकारात्मक कार्रवाई शुरू करने के लिए मजबूर होना पड़ा। तब भी, चूंकि क्षेत्र पर कब्जा करना भारत का मकसद नहीं था, इसलिए भारतीय सेना पाकिस्तान के पूर्वी हिस्से को पश्चिमी हिस्से द्वारा अपने ही लोगों पर किए जा रहे कष्टों और अत्याचारों से मुक्त कराने के बाद तुरंत पीछे हट गई।

बांग्लादेश में 1971 का युद्ध 3 दिसंबर 1971 को शुरू हुआ, जब पाकिस्तानी सेना ने पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) में बंगाली नागरिकों, छात्रों, बुद्धिजीवियों और सशस्त्र कर्मियों के खिलाफ नृशंस कार्रवाई शुरू की। आपरेशन सर्चलाइट के नाम से की गई इस कार्रवाई के तहत बंगाली हिंदुओं और बंगाली अभिजात वर्ग के खिलाफ व्यापक हिंसा और अत्याचार किए गए और बांग्लादेश में 30 लाख से ज्यादा हिंदुओं का नरसंहार हुआ। यह संघर्ष तेजी से पाकिस्तानी सेना और भारत समर्थित बंगाली बलों के बीच पूर्ण पैमाने पर गृह युद्ध में बदल गया। बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में भारत का प्रवेश पूर्वी पाकिस्तान की सरकार से सैन्य सहायता के अनुरोध के बाद हुआ और भारत ने 3 दिसंबर, 1971 को युद्ध में प्रवेश किया।

कठिन संघर्ष के अंत और एक नए राष्ट्र के जन्म का प्रतीक होने के नाते विजय दिवस भारत और बांग्लादेश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण दिन है। यह युद्ध में लड़ने और मरने वालों के बलिदान और उपलब्धियों को याद करने और भारत और बांग्लादेश के बीच दोस्ती और सहयोग का सम्मान करने का दिन है। यह भारत और बांग्लादेश के साझा इतिहास का भी प्रतीक है। 

युद्ध में भारत के प्रवेश के बाद हुए संघर्ष में भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना को परास्त कर दिया और 16 दिसंबर, 1971 तक पाकिस्तानी सेना ने आत्मसमर्पण कर दिया और वह एक स्वतंत्र बांग्लादेश के गठन के लिए सहमत हो गई। 16 दिसंबर 1971 को भारत की जीत और एक स्वतंत्र देश के रूप में बांग्लादेश के निर्माण के साथ युद्ध आधिकारिक तौर पर समाप्त हो गया।

भारत ने यह युद्ध बेहतर सैन्य रणनीति और पूर्वी पाकिस्तान में बंगाली सेनाओं के समर्थन के बूते जीता था। भारत ने युद्ध में विजय प्राप्त करने के लिए हवाई हमलों, नौसैनिक नाकेबंदी और जमीनी हमलों सहित सैन्य रणनीतियों का प्रयोग किया था। भारतीय सेना अपने बेहतर प्रशिक्षण और अनुभव के कारण संघर्ष में शीघ्रता से बढ़त हासिल करसकीं। भारतीय सेना और बंगाली योद्धा का समन्वय भी बहुत प्रभावी था।

माना जाता है कि 1971 के युद्ध में भारत की रणनीति संभवत: बांग्लादेश की स्वतंत्रता को सुरक्षित करने और क्षेत्र में भारत के अपने हितों की रक्षा के लिए एक त्वरित और निर्णायक जीत हासिल करने पर केंद्रित थी। 16 दिसंबर को मनाया जाने वाला विजय दिवस, 1971 के युद्ध में भारत की जीत और एक स्वतंत्र देश के रूप में बांग्लादेश के निर्माण का प्रतीक है। इस दिन भारत अपने देश की रक्षा करने वाले सभी सैनिकों को श्रद्धांजलि देता है।

एक लंबे और कठिन संघर्ष के अंत और एक नए राष्ट्र के जन्म का प्रतीक होने के नाते विजय दिवस भारत और बांग्लादेश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण दिन है। यह युद्ध में लड़ने और मरने वालों के बलिदान और उपलब्धियों को याद करने और भारत और बांग्लादेश के बीच दोस्ती और सहयोग का सम्मान करने का दिन है। यह भारत और बांग्लादेश के साझा इतिहास का भी प्रतीक है।

Topics: विजय दिवस भारत और बांग्लादेशपाकिस्तानी सेनापूर्वी पाकिस्तानवर्तमान बांग्लादेशपाकिस्तान की पंजाबी सेनामदरसों में पढ़ने वाले बच्चेंभारत और बांग्लादेश के साझा इतिहास
Share1TweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

BLA Kidnapped Pakistan ASF officer

BLA ने पाकिस्तान को दिया बड़ा झटका: एयरपोर्ट सिक्योरिटी फोर्स के वरिष्ठ अधिकारी को उठाया

ऑपरेशन सर्चलाइट: अमेरिका में बंगाली हिंदुओं पर अत्याचार को नरसंहार घोषित करने की मांग

असम में पकड़े गए बांग्लादेशी घुसपैठिए (फाइल चित्र)

असम : घुसपैठियों के पीछे कांग्रेस का हाथ!

असम में अवैध घुसपैठ का इतिहास : जानिए नेहरु और Congress की वोट बैंक की नीति और उसके Side Effect

दहाड़े मार कर रो रहे पाकिस्तानी सैनिक : अपने ही जवानों से मुंह फेर रहा पाकिस्तान, BLA ने वीडियो किया जारी

हथियार लहराते बलूच लड़ाके (फाइल चित्र)

बलूचिस्तान डायरी : खरान में खतरनाक प्रयोग

Load More

ताज़ा समाचार

दिल्ली अग्निकांड: होटल मालिक लवकेश बजाज 4 दिन की पुलिस रिमांड पर…

CM Yogi Gyan Bharatam Mission UP Tourism Policy Neem Karoli Baba Circuit

नीम करोली बाबा सर्किट से शिवाजी महाराज म्यूजियम तक! CM योगी का बड़ा ऐलान, UP में दिखेगा सांस्कृतिक पुनर्जागरण

dehradun administration removes illegal prasad shops outside fri rangers colony mazar

देहरादून: FRI रेंजर्स कॉलोनी के बाहर विवादित मजार पर प्रशासन का एक्शन, हटाई गईं अवैध दुकानें

ऑटो में हिंदू लड़की को छेड़ना… GYM को शरीयत नियमों से चलाना- ये कैसी जिहादी मानसिकता?

Cockroach

घर का अनचाहा ‘मेहमान’ है कॉकरोच, इसे दूर करना है जरूरी

कोच्चि IPL विवाद: ललित मोदी बोले-‘मिला था सोनिया गांधी का संरक्षण’

केरल में ‘ओनली फॉर मुस्लिम’ जिम पर बवाल: हिजाब में वर्कआउट, शरीयत कानून और इस्लामिक ड्रेस…

Thiland Pattaya Indian army beaten by trans pib fact check

थाईलैंड में भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल को पीटने का वीडियो वायरल: PIB Fact check ने बताया फर्जी

हर बार आग नई, लापरवाही की कहानी वही, ऐसी ही लपटों में दर्ज है ‘अशोक वडेरा’ की बलिदान गाथा

राहुल गांधी

विशेष रिपोर्ट : बोलने से पहले इतिहास पढ़ें ‘राहुल’

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies