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नारी शक्ति वंदन

संसद के दोनों सदनों से पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम, जिसे महिला आरक्षण विधेयक के नाम से जाना जाता रहा था, संभवत: ऐसा पहला अधिनियम है जो न केवल देश की 50 प्रतिशत जनसंख्या को सीधे लाभान्वित करता है,

Written byPanchjanyaPanchjanya
Sep 26, 2023, 04:15 pm IST
inभारत, विश्लेषण

संसद के दोनों सदनों से पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम, जिसे महिला आरक्षण विधेयक के नाम से जाना जाता रहा था, संभवत: ऐसा पहला अधिनियम है जो न केवल देश की 50 प्रतिशत जनसंख्या को सीधे लाभान्वित करता है, बल्कि जिसके लिए भारत सरकार ने पिछले कम से कम 9 वर्ष से भारी भरकम पृष्ठभूमि तैयार कर रखी थी। यह पृष्ठभूमि थी महिला सशक्तिकरण के विभिन्न प्रयासों की।

सरकार ने बालिका के जन्म से लेकर वृद्ध माता तक, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ से लेकर सुकन्या समृद्धि योजना तक, तीन तलाक को दंडनीय बनाने से लेकर महिलाओं के प्रति अपराधों के लिए कानूनी प्रावधानों को कड़ा करने तक नारी शक्ति वंदन की पूरी शृंखला चलाकर पहले यह सुनिश्चित किया कि मिलने वाले अवसरों का लाभ उठाने के लिए महिलाएं सक्षम और समर्थ हों। सामाजिक और आर्थिक, रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं को सशक्त करने के बाद इस सारी पृष्ठभूमि पर एक ध्वज की तरह स्थापित हुआ है नारी शक्ति वंदन अधिनियम, जो महिलाओं को राजनीतिक तौर पर भी सशक्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इस अधिनियम को पुष्टि देने वाली, महिलाओं को सामाजिक, कानूनी, मनोवैज्ञानिक, आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्र में स्वावलंबी व आत्मनिर्भर बनाने वाली केंद्र सरकार योजनाएं क्या हैं- प्रस्तुत है संक्षिप्त विवरण

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ: इस योजना का उद्देश्य समाज में बेटियों के प्रति लैंगिक भेदभाव समाप्त करना, शिक्षा सुनिश्चित कराना, शोषण से बचाना और सही-गलत का ज्ञान कराने के साथ समाज में उनकी भागीदारी सुनिश्चित कराना है। इसके लिए बुनियादी स्तर पर लोगों को प्रशिक्षण देकर, उन्हें संवेदनशील और जागरूक बनाकर सामुदायिक एकजुटता के माध्यम से महिलाओं की सोच को बदलने पर जोर दिया जा रहा है।

कामकाजी महिला छात्रावास योजना: इसका उद्देश्य कामकाजी महिलाओं को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है, ताकि वे आत्मनिर्भर और सशक्त बन सकें। इसके साथ ही, कामकाजी महिलाओं को उनके बच्चों की देखभाल के लिए डे केयर सेंटर की सुविधा भी दी जाती है। योजना के तहत ग्रामीण, अर्ध-शहरी, शहरी क्षेत्रों में छात्रावास बनाए जा रहे हैं।

सखी (वन स्टॉप सेंटर): यह योजना सार्वजनिक, निजी और पारिवारिक स्थल पर किसी भी प्रकार की हिंसा की शिकार महिलाओं के लिए शुरू की गई है, जिनकी फरियाद न तो कोई सुनता है और न ही कोई नकी मदद करता है। इसके अंतर्गत पीड़ित महिलाओं और बच्चियों को चिकित्सा सुविधा, कानूनी सलाह और सहायता, मनोवैज्ञानिक-सामाजिक सलाह, आश्रय, पुलिस और वीडियो कांफ्रेंसिंग जैसी सुविधाएं एक ही छत के नीचे प्रदान की जाती हैं। देश के सभी जिलों में वन स्टॉप सेंटर चलाए जा रहे हैं, जहां न्याय मिलने तक महिलाओं को सहयोग प्रदान किया जाता है।

स्वाधार गृह योजना: इसका उद्देश्य देश की बेबस, लाचार और बेसहारा महिलाओं को आश्रय, वस्त्र, भोजन, चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराना तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। योजना के तहत महिलाओं को भावनात्मक रूप से मजबूत बनाने, रोजगार के लिए प्रशिक्षण और परिवार में रहने के लिए कानूनी मदद दी जाती है। 55 से 60 वर्ष तक की महिलाएं 1 से 3 वर्ष तक स्वाधार गृह में रह सकती हैं। इसके बाद उन्हें वृद्धाश्रम भेज दिया जाता है।

स्टेप योजना : सपोर्ट टु ट्रेनिंग एंड एम्प्लॉयमेंट प्रोग्राम फॉर वुमन यानी स्टेप योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार के लिए तैयार करना है, ताकि वे आत्मर्निभर बनें। गांवों में रहने वाली 16 वर्ष या इससे अधिक उम्र की लड़कियां और गरीब महिलाएं, जो घर से बाहर जाकर कोई प्रशिक्षण नहीं ले सकतीं, उन्हें उनके कौशल के हिसाब से प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके बाद महिलाएं कृषि, बागवानी, खाद्य प्रसंस्करण, जरी, एंब्राइडरी, हैंडीक्राफ्ट, रत्न-आभूषण, पर्यटन, आतिथ्य, कंप्यूटर आदि क्षेत्रों में नौकरी करने में सक्षम हो जाती हैं।

महिला शक्ति केंद्र : ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से सशक्त करने के लिए यह योजना शुरू की गई है। इसे महिलाओं का कौशल विकास करने, नौकरी के अवसर खोजने और उनकी डिजिटल साक्षरता में सुधार करने में मदद के लिए व्यापक सहायता-सेवाएं प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसका उद्देश्य महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में शामिल होने और सामुदायिक विकास में योगदान करने के अवसर प्रदान करके जमीनी स्तर पर सशक्त बनाना है।

सुकन्या समृद्धि योजना: यह एक छोटी बचत योजना है, जिसका उद्देश्य बेटियों का भविष्य सुरक्षित करना है। योजना के अंतर्गत माता-पिता या अभिभावक 10 वर्ष से कम उम्र की बच्चियों के नाम पर बैंक खाता खुलवा सकते हैं, जिस पर सरकार 8 प्रतिशत ब्याज देती है। खाते में न्यूनतम 250 रुपये और अधिकतम 1.50 रुपये सालाना 15 वर्ष तक जमा किए जा सकते हैं। इसके बाद अगले 6 वर्ष तक पैसा नहीं देना होगा, लेकिन ब्याज जुड़ती रहेगी। 21 वर्ष पूरी होने पर ब्याज सहित पूरी राशि खाता धारक लड़की को मिल जाती है। इस योजना में निवेश करने पर आयकर में छूट भी मिलती है।

राष्ट्रीय पोषण योजना: प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर (8 मार्च, 2018) राजस्थान के झुंझुनू से यह योजना शुरू की थी। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों और महिलाओं को कुपोषण मुक्त करना, बच्चों के ठिगनेपन, अल्प पोषाहार, खून की कमी तथा जन्म के समय बच्चे का वजन कम होने के स्तर में कमी के उपाय करना है। सरकार 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों और महिलाओं का कुपोषण कम करने के लिए और भी कई योजनाएं चला रही है।

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना: यह एक प्रत्यक्ष लाभ अंतरण योजना है, जिसमें गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के बैंक/डाकघर खाते में दो किस्तों में 5000 रुपये भेजे जाते हैं। दूसरी संतान बालिका होने पर योजना के अंतर्गत 6,000 रुपये दिए जाते हैं, ताकि स्तनपान कराने वाली माताओं की बढ़ी हुई पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा किया जा सके और वेतन हानि की आंशिक क्षतिपूर्ति की जा सके।

सुरक्षित मातृत्व योजना: इसके अंतर्गत महिला के गर्भवती होने के 6 माह से लेकर बच्चे के जन्म के 6 माह तक मुफ्त इलाज, दवाइयां और स्वास्थ्य संबंधी अन्य सुविधाएं सरकार द्वारा प्रदान की जाती हैं। इसमें गर्भवती महिला का प्रसव पूर्व चार बार मुफ्त चेकअप करा सकती है, ताकि उसे गर्भ में पल रहे बच्चे के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी मिलती रहे। यहां तक कि डिलीवरी के समय महिला को घर से अस्पताल तक ले जाने में भी कोई खर्च नहीं लगता है। योजना सभी गर्भवती महिलाओं के लिए है।

मुफ्त सिलाई मशीन योजना: महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए सरकार ने मुफ्त सिलाई मशीन योजना भी शुरू की है। इसमें ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र की जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को नि:शुल्क सिलाई मशीन दिया जाता है, ताकि वे घर बैठे रोजगार शुरू कर सकें। फिलहाल 20 से 40 वर्ष के बीच की महिलाएं इसके लिए आवेदन कर सकती हैं, बशर्ते उनके पति की आय 12,000 रुपये से अधिक न हो। विधवा और दिव्यांग महिलाएं भी इस योजना के लिए पात्र हैं।

स्टैंडअप इंडिया योजना : इस योजना भी महिलाओं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आर्थिक सशक्तिकरण और उद्यमशीलता को बढ़ावा देती है। यह योजना वंचित/कम सुविधा प्राप्त उद्यमियों को परेशानी मुक्त किफायती ऋण सुनिश्चित कर उनके जीवन को संवारने में मददगार सिद्ध हो रही है। लाभार्थियों को विनिर्माण, सेवा या व्यापार तथा कृषि से जुड़ी गतिविधियों के लिए ग्रीनफील्ड उद्यम शुरू करने में सहायता प्रदान करने के लिए यह योजना शुरू की गई है। बीते 7 वर्ष में इस योजना से 1.8 लाख से अधिक उद्यमी लाभान्वित हुए हैं, जिनमें महिलाएं 80 प्रतिशत से अधिक हैं।

समर्थ योजना: यह देश में बरोजगारी कम करने तथा औद्योगिक उत्पादन बढ़ाने के लिए चलाई जाने वाली एक कल्याणकारी योजना है। इसका उद्देश्य देश के नागरिकों में वस्त्र उद्योग से जुड़ा कौशल विकास प्रदान करना है। इस योजना के तहत खासतौर से महिलाओं को प्रशिक्षित करने पर जोर दिया जा रहा है। इसका कारण यह है कि देश में 75 प्रतिशत महिलाएं वस्त्र उद्योग से जुड़ी हुई हैं। यदि महिलाएं प्रशिक्षित होंगी तो उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा और वे आत्मनिर्भर होंगी। यह योजना देश के 18 राज्यों में चलाई जा रही है। इसे 2017 में शुरू किया गया था।

उज्ज्वला योजना: लकड़ी, कोयला, उपले जैसे पारंपरिक ईंधन पर खाना बनाना महिलाओं स्वास्थ्य के साथ पर्यावरण के लिए भी हानिकारक था। इसे देखते हुए सरकार ने उन्हें स्वच्छ ईंधन यानी एलपीजी उपलब्ध कराया है। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं के स्वास्थ्य की रक्षा करना, उन्हें सशक्त बनाना, अशुद्ध ईंधन के कारण होने वाली मौतों की संख्या में कमी लाना और वायु प्रदूषण के कारण छोटे बच्चों को सांस संबंधी बीमारियों से बचाना है।

महिला हेल्पलाइन योजना: देश में बड़ी संख्या में महिलाओं के साथ शारीरिक, भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और आर्थिक दुर्व्यवहार होते हैं। सार्वजनिक या निजी स्थानों पर हिंसा का सामना करने वाली महिलाएं टोल फ्री नंबर 181 पर कॉल (मोबाइल एप, फैक्स संदेश, एसएमएस, लैंडलाइन) और इंटरनेट (ईमेल, वेब पेज, एक्स, फेसबुक जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट) के माध्यम से तत्काल सहायता या बचाव मांग सकती हैं। उन्हें 24 घंटे तत्काल और आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

महिला पुलिस स्वयंसेवक: यह योजना देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चलाई जा रही है। यह भी केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य आपराधिक मामलों में पुलिस की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए पुलिस अधिकारियों और स्थानीय समुदायों के बीच संबंध स्थापित करना है। महिला पुलिस स्वयंसेवक बनने के लिए आवेदक की आयु 21 वर्ष और 12वीं उत्तीर्ण अनिवार्य है। साथ ही, महिला उस भौगोलिक क्षेत्र की हो, जहां वह आवेदन कर रही है, तथा उसे स्थानीय भाषा आनी चाहिए।

महिला ई-हाट: महिला उद्यमियों की जरूरतों को पूरा करने के लिए यह एक सार्थक पहल है। यह महिलाओं के लिए एक आनलाइन मार्केटिंग मंच है, जहां वे अपने उत्पादों को प्रदर्शित कर सकती हैं। यह ‘डिजिटल इंडिया’ का एक हिस्सा है और ‘स्टैंड अप इंडिया’ के रूप में देशभर में महिलाओं के लिए एक पहल है। इसका उद्देश्य महिला उद्यमियों, स्वयंसहायता समूहों की सृजनात्मकता को निरंतर सहारा और सहायता प्रदान कर उन्हें सशक्त बनाना और अर्थव्यवस्था में उनकी उनकी वित्तीय भागीदारी को सुदृढ़ करना है।

इसके अलावा, सरकार ने लैंगिक समानता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ महिलाओं के खिलाफ अपराधों से संबंधित मामलों में तेजी लाने के लिए सख्त कानूनों का कार्यान्वयन और फास्ट-ट्रैक अदालतों की स्थापना भी की है। मातृत्व अवकाश की अवधि 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह करने से जहां कामकाजी महिलाओं के जीवन संतुलन आया है, वहीं विवाह के लिए लड़कियों की उम्र 18 वर्ष से बढ़ाकर 21 वर्ष करने का प्रस्ताव है। आयुष्मान योजना का लाभ उठाते हुए 9 करोड़ महिलाओं ने सर्वाइकल कैंसर की जांच कराई। स्वच्छ भारत अभियान के तहत शौचालय बनने के बाद महिलाओं को अब न तो खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है और न ही उनकी सुरक्षा और सम्मान पर ही कोई खतरा है। यही नहीं, जल जीवन मिशन के तहत नल का कनेक्शन, पीएम आवास योजना से परिवार के मुखिया को घर, जन औषधि केंद्रों में 1 रुपये का सैनिटरी पैड और पंचायतों में आरक्षण का लाभ भी उठा रही हैं।

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