1950 : दिल्ली पैक्ट : नेहरू-लियाकत का हिन्दू विरोधी करार
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1950 : दिल्ली पैक्ट : नेहरू-लियाकत का हिन्दू विरोधी करार

1950 : दिल्ली पैक्ट : नेहरू-लियाकत का हिन्दू विरोधी करारबंटवारे से आहत हिन्दुओं के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया था नेहरू सरकार ने

Written byPanchjanyaPanchjanya
Aug 13, 2023, 10:11 am IST
inभारत
‘दिल्ली पैक्ट’ पर हस्ताक्षर करते हुए जवाहरलाल नेहरू और लियाकत अली (फाइल चित्र)

‘दिल्ली पैक्ट’ पर हस्ताक्षर करते हुए जवाहरलाल नेहरू और लियाकत अली (फाइल चित्र)

‘दिल्ली पैक्ट’ के नाम से जाना जाता है। यही वह करार था जिसके विरोध में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने नेहरू सरकार में उद्योग मंत्री के अपने पद से इस्तीफा दिया था।

भारत विभाजन के दौरान जबरदस्त दंगे हुए थे। बंटवारे की विभीषिका ऐसी थी कि सीमा पार करके भारत जिंदा बचकर आने वालों को कई दिन तक यह भरोसा ही नहीं हुआ था कि वे बच गए थे। अप्रैल, 1950 में दिल्ली स्थित गवर्नमेंट हाउस में इसी बंटवारे को लेकर भारत-पाकिस्तान के बीच एक समझौता हुआ था। इसी समझौते को ‘दिल्ली पैक्ट’ के नाम से जाना जाता है। यही वह करार था जिसके विरोध में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने नेहरू सरकार में उद्योग मंत्री के अपने पद से इस्तीफा दिया था।

दिल्ली पैक्ट भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री लियाकत अली खान के बीच हुआ था। बंटवारे के दौरान दोनों और के लाखों लोग अपना घर-बार छोड़कर सीमा पार अपने-अपने देश गए थे। माना जाता है कि लगभग 72 लाख लोग हिंदुस्थान से पाकिस्तान गए थे। इनमें अधिकांशत: मुस्लिम थे। इसी तरह लगभग 73 लाख लोग पाकिस्तान से पलायन करके हिंदुस्थान आए थे, जिनमें ज्यादातर हिंदू और सिख थे। इन लोगों की बहुत खराब हालत थी। वे तो और भी खतरे में थे जो बंटवारा होने पर भी अपने पुरखों की मिट्टी को छोड़कर नहीं आए थे।

‘अल्पसंख्यकों’ को लेकर मची हिंसा तथा बंटवारे के बाद के हालात से निपटने के लिए जवाहरलाल नेहरू और लियाकत अली की दिल्ली में वार्ता हुई। उस मौके पर दोनों के बीच हुए दिल्ली पैक्ट में प्रमुख बिन्दु इस प्रकार हैं—

  •  दूसरी तरफ से आने वालों को ट्रांजिट के बीच सुरक्षा दी जाए। वे अपनी पीछे छूटी संपत्ति को बेचने के लिए सुरक्षित लौटकर आ सकते हैं।
  •  जिन महिलाओं को अपहृत किया गया था, उन्हें उनके परिवारों के पास वापस भेजा जाए। अवैध रूप से कब्जाई गई ‘अल्पसंख्यकों की संपत्ति’ उन्हें लौटा दी जाए।

  • जबरन कन्वर्जन अवैध माना जाएगा, अल्पसंख्यकों को बराबरी तथा सुरक्षा के अधिकार दिए जाएंगे। दोनों देशों में अल्पसंख्यकों के विरुद्ध किसी भी तरह का दुष्प्रचार चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

  • भारत और पाकिस्तान, दोनों युद्ध भड़ाकाने वाले तथा दूसरे देश की अखंडता पर प्रश्नचिन्ह लगाने वाले दुष्प्रचार को शह नहीं देंगे।

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का मानना था कि इस पैक्ट की शर्तें मुस्लिम तुष्टीकरण की बानगी ही हैं। इससे पाकिस्तान में हिंदुओं पर और खतरा पैदा हो जाएगा। इस पैक्ट से हिन्दुओं का कोई भला नहीं होने वाला है। पैक्ट को लेकर डॉ. मुखर्जी नाराज थे। वे अखंड भारत की बात बढ़-चढ़कर करते रहे थे। आखिर में पैक्ट से व्यथित होकर इसे हिन्दू विरोधी बताते हुए डॉ. मुखर्जी ने इस्तीफा दे दिया। उन्होंने साफ कहा कि ‘नेहरू की नीतियां गलत हैं। वक्त बता देगा कि उन्होंने हिन्दुओं से छल किया है’। दिल्ली पैक्ट होने के एक साल के अंदर पाकिस्तान में लियाकत अली की हत्या हो गई थी।

Topics: प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरूPrime Minister Jawaharlal Nehruअल्पसंख्यकदिल्ली पैक्टहिंदुस्थान से पाकिस्तानDelhi PactDr. Syama Prasad Mookerjeeडॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जीHindustan to PakistanminoritiesPartition of Indiaभारत विभाजन
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