फ्रैंज काफ्का कहते थे- हमें ऐसी किताबें पढ़नी चाहिए, जो कुल्हाड़ी की तरह हमारे अंदर के जमे समंदर के ऊपर पड़ें, घायल कर दें
August 17, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

फ्रैंज काफ्का कहते थे- हमें ऐसी किताबें पढ़नी चाहिए, जो कुल्हाड़ी की तरह हमारे अंदर के जमे समंदर के ऊपर पड़ें, घायल कर दें

इतिहास के पन्नों में 3 जुलाई- फ्रैंज काफ्का को बीसवीं सदी का सर्वाधिक प्रभावशाली कथाकार और सांस्कृतिक रूप से समझदार लेखक माना जाता है।

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jul 3, 2023, 08:35 am IST
inभारत

देश-दुनिया के इतिहास में 3 जुलाई की तारीख तमाम अहम वजह से दर्ज है। यह तारीख विश्व साहित्य के लिए भी अनमोल है। दरअसल जर्मन लेखक फ्रैंज काफ्का का जन्म प्राग के एक मध्यमवर्गीय जर्मन भाषी बोहेमियन यहूदी परिवार में तीन जुलाई, 1883 को हुआ था। उन्हें बीसवीं सदी का सर्वाधिक प्रभावशाली कथाकार और सांस्कृतिक रूप से समझदार लेखक माना जाता है। उन्होंने तत्कालीन पीढ़ी को प्रभावित किया। उनकी रचनाओं के अनुवाद पूरी दुनिया में हुए। इनमें भारतीय भाषाएं और प्रमुख रूप से हिंदी भी शामिल है। उनकी लघु कथा, कहानियां और उपन्यास कालजयी हैं।

फ्रैंज काफ्का कहते थे- ‘हमें ऐसी किताबें पढ़नी चाहिए, जो कुल्हाड़ी की तरह हमारे अंदर के जमे समंदर के ऊपर पड़ें। हमें चोट पहुंचा दें। घायल कर दें। उन किताबों को पढ़ने के बाद हम पहले जैसे बिल्कुल न रहें। काफ्का को कम शब्दों में अपनी बात कहने में महारथ हासिल थी। खास बात यह कि वह हर हाल में संघर्षरत मनुष्य के पक्ष में थे। तमाम अवसरों के बावजूद काफ्का ने अपनी तमाम जिंदगी अकेलेपन, आंतरिक संघर्ष और विश्वास की तलाश में गुजार दी। उनकी ‘दिशा’ नामक इस लघु कथा को पढ़कर यह महसूस किया जा सकता है। इसका अनुवाद सुकेश साहनी ने किया है- ‘बहुत दुख की बात है,’ चूहे ने कहा, ‘दुनिया दिन प्रतिदिन छोटी होती जा रही है। पहले यह इतनी बड़ी थी कि मुझे बहुत डर लगता था। मैं दौड़ता ही रहा था और जब आखिर में मुझे अपने दाएं-बाएं दीवारें दिखाई देने लगीं थीं तो मुझे खुशी हुई थी। पर यह लंबी दीवारें इतनी तेजी से एक दूसरे की तरफ बढ़ रही हैं कि मैं पलक झपकते ही आखिर छोर पर आ पहुंचा हूं, जहां कोने में वह चूहेदानी रखी है और मैं उसकी ओर बढ़ता जा रहा हूं। जहां दिशा बदलने की जरूरत है, बस., बिल्ली ने कहा, और उसे खा गई।’

समझ सकते हैं कि उनकी लघु कहानियों ने किस तरह से समूची दुनिया में अपना डंका बजाया। उनकी रचनाएं आधुनिक समाज के व्यग्र इंसान, उसकी हड़बड़ी और अलगाव की अभिव्यक्ति हैं। न्यूयॉर्कर ने एक लेख में काफ्का के साहित्यिक और सामाजिक अवदान को दार्शनिक अंदाज में प्रस्तुत किया है। इस लेख के कुछ अंश-“जब काफ्का का जन्म हुआ, तब उस सदी के आधुनिक विचारों ने पनपना आरंभ किया। जैसे कि सदियों के बीच में एक नई आत्मचेतना। अपनी मृत्यु के इतने साल बाद भी काफ्का आधुनिक विचारधारा के एक पहलू के प्रतीक हैं।

काफ्का की ‘खिड़की’ नामक इस लघुकथा में समूचा जीवन दर्शन शामिल है। ‘खिड़की’ का अनुवाद यूं है- जीवन में अलग-थलग रहते हुए भी कोई व्यक्ति जब-तब कहीं-कहीं किसी हद तक जुड़ना चाहेगा। दिन के अलग-अलग समय, मौसम, काम-धंधे की दशा आदि में उसे कम से कम एक ऐसी स्नेहिल बांह की ओर खुलने वाली खिड़की के बगैर बहुत अधिक समय तक नहीं रह सकेगा। कुछ भी न करने की मनःस्थिति के बावजूद वह थके कदमों से खिड़की की ओर बढ़ जाता है और बेमन से कभी लोगों और कभी आसमान की ओर देखने लगता है। उसका सिर धीरे से पीछे की ओर झुक जाता है। इस स्थिति में भी सड़क पर दौड़ते घोड़े, उनकी बग्घियों की खड़खड़ और शोरगुल उसे अपनी ओर खींच लेंगे और अंततः वह जीवन-धारा से जुड़ ही जाएगा। फ्रैंज काफ्का की हिंदी में छपी प्रमुख रचनाएं ‘कायापलट’, ‘जांच’, ‘एक भूखा कलाकार’, और ‘महल’ आदि हैं।

प्राग में काफ्का से जुड़ी दो प्रतिमाएं सैलानियों का ध्यान खासतौर पर खींचती हैं। एक सूट पहने एक बिना चेहरे के आदमी के कंधे पर सवार काफ्का। मूर्तिकार जार्सोल्वा की इस ब्रांस प्रतिमा का आइडिया काफ्का की कहानी ‘डिस्क्रिप्शन ऑफ स्ट्रगल’ से लिया गया है। दूसरी चर्चित लेकिन अजीबो गरीब प्रतिमा काफ्फा म्यूजिम के बाहर दो युवाओं की है। काफ्का ने तीन जुलाई 1924 को इस फानी दुनिया को अलविदा कहा।

महत्वपूर्ण घटनाचक्र
1661: पुर्तगाल ने बॉम्बे को ब्रिटिश राजा चार्ल्स द्वितीय को उपहार में दिया।
1720: स्वीडन और डेनमार्क ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए।
1778: प्रशा ने ऑस्ट्रिया के विरुद्ध युद्ध की घोषणा की।
1876: मांटनीग्रो ने तुर्किए के खिलाफ युद्ध का एलान किया।
1884: स्टॉक एक्सचेंज डाउ जोंस ने अपना पहला स्टॉक इंडेक्स जारी।
1908: ब्रिटिश सरकार ने बाल गंगाधर तिलक को गिरफ्तार किया।
1928: जेएल बेयर्ड ने लंदन में पहली बार रंगीन टेलिविजन का प्रसारण किया।
1947: सोवियत संघ ने मार्शल योजना में भाग लेने से मना किया।
1972: भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद शिमला समझौते पर हस्ताक्षर।
1992: रियो डि जेनरो (ब्राजील) में पृथ्वी सम्मेलन की शुरुआत।
2000: लायसेनिया करासे फिजी के अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त।
2004: रूस की मारिया शारापोवा महिला विम्बलडन चैम्पियन बनीं।
2005: महेश भूपति और मेरी पियर्स ने विंबलडन टेनिस का मिश्रित युगल खिताब जीता।
2006: कैरेबियाई द्वीप पर 35 साल बाद भारतीय क्रिकेट टीम ने पहली बार जीत दर्ज की।
2006: स्पेन ने भारत के विश्व की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की उम्मीद जताई।
2008: न्यूयार्क में दलितों का सम्मेलन शुरू।
2017: अचल कुमार ज्योति भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त।
2018: मलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री नजीब रज्जाक को गिरफ्तार किया गया।

Topics: historyHistory of today3 जुलाई का इतिहासकाफ्काकाफ्का का साहित्यHistory of 3rd JulyKafkaLiterature of Kafkaइतिहासआज का इतिहास
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

आज का इतिहास

13 अगस्त का इतिहास: लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की पुण्यतिथि

आज का इतिहास

9 अगस्त का इतिहास: परमाणु संधि से अग्नि-2 परीक्षण तक, भारत की अहम ऐतिहासिक घटनाएं

आज का इतिहास

8 अगस्त का इतिहास: परमाणु शक्ति से रक्षा तकनीक तक, जानिए इस दिन की बड़ी घटनाएं

आज का इतिहास

7 अगस्त का इतिहास: आज ही के दिन हुई थी WHO की स्थापना, भारत ने भी रचा था खेलों में इतिहास

आज का इतिहास

5 अगस्त का इतिहास: अनुच्छेद 370, ऑपरेशन जिब्राल्टर और राम मंदिर भूमिपूजन तक

आज का इतिहास

3 अगस्त का इतिहास: जब भारत ने मिसाइल निर्माण में निजी क्षेत्र के लिए खोले नए द्वार

Load More

ताज़ा समाचार

Gen-Z के लिए भारतीय और पश्चिमी सांस्कृतिक विचारधाराओं के बीच अंतर समझना क्यों है जरुरी

विभाजन की विभीषिका : हमेशा रहा उजड़ने का दर्द

Enforcement Directorate

ईडी का बड़ा दावा: टीएमसी ने केयरवेल एविएशन को दिए 160 करोड़, खरीदे जेट और हेलीकॉप्टर

CJI Suryakant on NCERT

NALSAR के छात्रों के विरोध पर बोले CJI- ‘जब स्वीकार ही नहीं किया, तो जाने का सवाल ही नहीं’

Ebola outbreaks india Africa summit cancelled

कांगो में इबोला के बंडीबुग्यो स्ट्रेन का घातक प्रकोप: 2325 मौतें, 4945 मामले दर्ज; हर 30 मिनट में एक मौत

आज का श्लोक : अराष्ट्रियकराक्रान्तं तद् राष्ट्रं जायते ध्रुवेम्।

सौरव दास

Fact Check: PM मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ बयान को CJP के सौरव दास ने भ्रामक तरीके से पेश किया

P Chidambaram congress

कांग्रेस नेता पी चिदंबरम बोले ‘मुझे गर्व है कि मैं दिमागी नक्सली हूं’

अटल गौरव स्मृति समारोह में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को प्रतीक चिह्न भेंट करते मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

अमित शाह ने अटल जी की अष्टधातु प्रतिमा का किया अनावरण, कहा- कांग्रेस ने वोट बैंक के लालच में वंदे मातरम को भुलाया

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू

प्रधानमंत्री ने विपक्षी नेताओं को नहीं, अलगाव और पूर्वोत्तर को अलग करने वालों को कहा ‘दिमागी नक्सल’: किरेन रिजिजू

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies