निष्कलंक महादेव मंदिर: जहां पापों से मुक्त हुए थे पांडव, जानें क्या है मान्यता
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निष्कलंक महादेव मंदिर: जहां पापों से मुक्त हुए थे पांडव, जानें क्या है मान्यता

गुजरात का निष्कलंक मंदिर, जो अरब सागर में मौजूद है। प्रकृति स्वयं इन दिव्य शिवलिंगों का अभिषेक करती है।

Written byMasummba ChaurasiaMasummba Chaurasia
May 20, 2023, 05:53 pm IST
in भारत, यात्रा

महादेव का एक ऐसा मंदिर जो आज भी समुद्र में डूब जाता है। गुजरात का निष्कलंक मंदिर, जो अरब सागर में मौजूद है। इस मंदिर में एक नहीं बल्कि 5 शिवलिंग है। शिव लिंग के यहां होने के पीछे एक बहुत बड़ा रहस्य छुपा है। तो चलिए आपको बताते हैं, कि वो रहस्य क्या है।

माना जाता है कि महाभारत के विनाशकारी युद्ध के बाद पांडव को अपने ही सगे-संबंधियों के वध का पाप लगा था। इस पाप से मुक्ति पाने के लिए श्रीकृष्ण के आदेश पर पांचों पांडव ने इसी स्थान पर भगवान शिव की तपस्या की थी। जिसके बाद महादेव ने पांचों भाइयों को पांच अलग-अलग शिवलिंग के रूप में दर्शन दिए, और तभी से 5 दिव्य शिवलिंग यहां पर विराजमान हैं। इस स्थान पर भगवान शिव ने पांचों पांडवों को निष्कलंक बनाया था। यही कारण है कि यहां स्थापित शिवलिंग को निष्कलंक महादेव के नाम से जाना जाता है, यहां स्थापित शिवलिंग 5 स्वयंभू शिवलिंग हैं।

निष्कलंक महादेव मंदिर में 5 हजार साल से विराजमान हैं स्वयंभू शिवलिंग
कहा जाता है, महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका था। तब पांडव बहुत दुःखी थे, क्योंकि उनके द्वारा अपने ही सगे-संबंधियों की हत्या का पाप उन पर लगा था। इस पाप से मुक्त होने के लिए उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से सहायता मांगी, और मार्गदर्शन करने की गुजारिश की। तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें एक काली गाय और काला ध्वज दिया। जिसके बाद उन्होंने पांडवों से कहा कि इस ध्वज को लेकर काली गाय का अनुसरण करों, और जहां भी गाय और ध्वज दोनों का रंग सफेद हो जाएगा, उसी स्थान को समझ लेना कि यह उनकी पाप से मुक्ति का स्थान है।

श्रीकृष्ण की आज्ञा से पांडवों ने की तपस्या
श्रीकृष्ण की आज्ञा पाकर पांचों भाई कई दिनों तक उस काली गाय का अनुसरण करते हुए अलग-अलग स्थानों में घूमते रहे, लेकिन इस दौरान गाय और ध्वज दोनों का ही रंग नहीं बदला। पांडव बस गाय का अनुसरण कर रहे थे, इसी दौरान जब पांडव गुजरात राज्य के कोलियाक तट पर पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि ध्वजा और गाय दोनों सफेद रंग के हो गए हैं। तब पांडव समझ गए कि ये वहीं स्थान है, जिसका जिक्र श्रीकृष्ण ने किया था, फिर पांडवों ने इसी स्थान पर भगवान शिव की तपस्या करना शुरू कर दिया।

महादेव ने पांचों भाइयों को बनाया निष्कलंक 
जिसके बाद महादेव ने पांचों भाइयों की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें 5 अलग-अलग शिवलिंग के स्वरूप में दर्शन दिए थे, और तभी से 5 स्वयंभू शिवलिंग यहां पर विराजमान हैं, क्योंकि पांडवों को भगवान शिव ने इस स्थान पर पाप से मुक्त किया था, उन्हें निष्कलंक बनाया था, इसलिए इस स्थान को निष्कलंक महादेव मंदिर कहा गया।

समुद्र की तेज लहरों में डूब जाता है मंदिर
अरब सागर में स्थित यह मंदिर तट से करीब 1 किलोमीटर अंदर पानी में स्थित है। श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पानी से होकर गुजरते हैं। यह मंदिर एक चौकोर चबूतरे पर स्थित है। यहां 5 स्वयंभू शिवलिंग विराजमान हैं, वहीं प्रत्येक शिवलिंग के पास एक नंदी भी बैठे हैं।

प्रकृति स्वंय दिव्य शिवलिंगों का करती है अभिषेक
सुमद्र की तेज लहरों के बीच ये मंदिर आधे दिन के लिए समुद्र में समा जाता है, और आधे दिन के बाद भक्तों को दर्शन देने के लिए बाहर आ जाता है। जिसके बाद श्रद्धालु इस मंदिर में पूजा करते हैं। सबसे बड़ी रहस्य की बात तो ये है, कि समुद्र की ताकतवर लहरों के बीच सदियों से यह मंदिर बिना किसी नुकसान के वैसा का वैसा खड़ा है। अद्भुत है ये मंदिर जहां प्रकृति स्वयं इन दिव्य शिवलिंगों का अभिषेक करती है।

कैसे पहुंचें निष्कलंक महादेव मंदिर ?
अगर आप भी निष्कलंक महादेव मंदिर जाना चाहते हैं, तो सबसे पास भावनगर एयरपोर्ट है। जिसकी दूरी यहां से करीब 180 किलोमीटर है। उसके बाद आप ऑटो या कैब से मंदिर तक पहुंच सकते हैं, वहीं अगर आप ट्रेन से सफर करना चाहते हैं, तो भावनगर टर्मिनस महादेव मंदिर का सबसे पास रेलवे स्टेशन है जो करीब सभी बड़े-बड़े शहरों से जुड़ा है। भावनगर टर्मिनस से मंदिर की दूरी करीब 25 किलोमीटर है। इसके अलावा अगर आप सड़क मार्ग से जाना चाहते हैं, तो भावनगर से करीब सभी शहर जुड़े हैं। आप आसानी से निष्कलंक महादेव मंदिर पहुंच सकते हैं।

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