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होम भारत

आज का इतिहास : बहादुरी का दूसरा नाम गोरखा रेजिमेंट

Written byPanchjanyaPanchjanya
Apr 24, 2023, 08:30 am IST
inभारत

देश-दुनिया के इतिहास में 24 अप्रैल की तारीख तमाम अहम वजह से दर्ज है। इस तारीख का महत्व भारत की गोरखा रेजिमेंट से भी है। अपनी बहादुरी के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध गोरखा 24 अप्रैल, 1815 को ईस्ट इंडिया कंपनी से जुड़े थे। ब्रिटिश सरकार ने कुछ समय बाद गोरखा योद्धाओं की अलग रेजिमेंट बनाई और आजादी के बाद गोरखा भारतीय सेना का हिस्सा बने। भारतीय सेना के फील्ड मार्शल जनरल मानेकशॉ कहा करते थे- “अगर कोई व्यक्ति कहता है कि उसे मौत से डर नहीं लगता, तो वह या तो झूठ बोल रहा है या फिर गोरखा है।”

दरअसल बात 1814 की है। भारत अंग्रेजों के कब्जे में था। अंग्रेज चाहते थे कि नेपाल पर भी उनका कब्जा हो जाए। इसलिए अंग्रेजों ने नेपाल पर हमला कर दिया। करीब डेढ़-दो साल युद्ध चलता रहा। आखिरकार सुगौली की संधि हुई और युद्ध थमा। पूरे युद्ध में ब्रिटिश जनरल डेविड ओक्टलोनी गोरखा सैनिकों की बहादुरी से खासे प्रभावित हुए। उन्होंने सोचा कि इतने बहादुर सैनिकों को क्यों न ब्रिटिश सेना में भर्ती किया जाए? नेपाल से समझौते के बाद 24 अप्रैल, 1815 को नई रेजिमेंट बनाई गई जिसमें गोरखाओं को भर्ती किया गया। इसके बाद से गोरखा ब्रिटिश सेना में भर्ती होते रहे।

साल 1947 में भारत ब्रिटिश हुकूमत से आजाद हुआ। आजादी के वक्त तक ब्रिटिश सेना में 10 गोरखा रेजिमेंट थी। अंग्रेजों ने फैसला किया कि 10 में 6 रेजिमेंट भारत को दे दी जाएंगी और बाकी चार अंग्रेज अपने साथ ले जाएंगे। उन चार रेजिमेंट के गोरखाओं ने अंग्रेजों के साथ जाने से इनकार कर दिया। भारत ने 11वीं रेजिमेंट बनाई। 1950 में भारत गणराज्य बना तब इसका नाम गोरखा राइफल्स रखा गया। भारत, नेपाल और अंग्रेजों के बीच एक समझौता हुआ। उसके मुताबिक भारत की सेना में गोरखाओं की भर्ती होती रहेगी।

भारत के लिए गोरखा जवानों ने पाकिस्तान और चीन के खिलाफ हुई सभी लड़ाइयों में शत्रु को अपनी बहादुरी का लोहा मनवाया। गोरखा रेजिमेंट को इन युद्धों में कई परमवीर चक्र तथा महावीर चक्र मिले। गोरखा सैनिकों ने भारतीय शांति सेना के रूप में भी विभिन्न देशों में अपनी बहादुरी का परिचय दिया। इस रेजिमेंट का आदर्श वाक्य है “कायर हुनु भन्दा मर्नु राम्रो” यानी “कायर होने से मरना बेहतर है”। हालांकि, नेपाल से आने वाले सभी नेपाली बोलने वाले जवानों को गोरखा नहीं माना जाता। गोरखा वे हैं जो लिम्बू, थापा, मगर्स आदि जातियों से संबंध रखते हैं। इन सभी गोरखा जातियों की अपनी बोलियां हैं।

महत्वपूर्ण घटनाचक्र
1877 : रूस ने ओटोमन साम्राज्य के खिलाफ लड़ाई की घोषणा की।
1898 : स्पेन ने अमेरिका के खिलाफ युद्ध की घोषणा की।
1920 : पोलैंड की सेना ने यूक्रेन पर हमला किया।
1954 : ब्रिटिश सरकार ने कीनिया के विद्रोहियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आदेश दिया।
1954 : आस्ट्रेलिया और सोवियत संघ ने राजनयिक संबंध समाप्त किए।
1960 : दक्षिण पर्सिया में भूकंप, 500 लोगों की मौत।
1962 : एमआईटी ने पहली बार सेटेलाइट से टीवी सिग्नल भेजा।
1967 : सोवियत संघ के अंतरिक्ष यात्री व्लादिमीर कोमारोव अंतरिक्ष अभियान के दौरान दम तोड़ने वाले पहले व्यक्ति।
1970 : चीन का पहला उपग्रह डांग फांग हांग लॉन्च।
1982 : पंद्रह वर्ष के इजरायली आधिपत्य के बाद सिनाई प्राय:द्वीप क्षेत्र मिस्र को वापस।
1998 : क्लोन भेड़ डोली ने स्वस्थ मेमने बॉनी को जन्म दिया।
2002 : अर्जेन्टीना में बैंक अनिश्चितकाल के लिए बंद।
2003 : तमिल विद्रोहियों का थाइलैंड वार्ता में हिस्सा लेने से इनकार।
2006 : नेपाल में संसद बहाल।
2007 : हमास ने इजरायल पर हमला कर युद्धविराम को तोड़ा।
2013 : बांग्लादेश की राजधानी ढाका में इमारत गिरने से सैकड़ों लोगों की मौत।

Topics: इतिहासआज का इतिहासhistorytoday history24 अप्रैल का इतिहासगोरखा रेजिमेंटHistory of 24 AprilGorkha Regiment
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