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होम भारत

… समिधा सम हम जलें

सेवा संगम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पीरामल समूह के अध्यक्ष अजय पीरामल ने संघ के स्वयंसेवकों के सेवा कार्यों की सराहना की। प्रस्तुत हैं उनके वक्तव्य के संपादित अंश :

अश्वनी मिश्रअरुण कुमार सिंहWritten byअश्वनी मिश्रandअरुण कुमार सिंह
Apr 19, 2023, 04:50 pm IST
in भारत, संघ @100

स्वयंसेवकों ने नि:स्वार्थ भाव से भारत माता की सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित किया है। यह जानकर गर्व होता है कि इतना विशाल संगठन समाज सेवा के क्षेत्र में अग्रिम पंक्ति में काम कर रहा है। कोविड के दौरान संघ के कार्यकर्ताओं ने हर तरीके से समाज की मदद की और हजारों लोगों के जीवन को बचाते हुए नि:स्वार्थ भाव से आपूर्ति की।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों ने नि:स्वार्थ भाव से भारत माता की सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित किया है। यह जानकर गर्व होता है कि इतना विशाल संगठन समाज सेवा के क्षेत्र में अग्रिम पंक्ति में काम कर रहा है। कोविड के दौरान संघ के कार्यकर्ताओं ने हर तरीके से समाज की मदद की और हजारों लोगों के जीवन को बचाते हुए नि:स्वार्थ भाव से प्रत्येक आवश्यक चीजों की आपूर्ति की। भारत-चीन युद्ध की बात हो या फिर करगिल युद्ध की, जरूरतमंद, कमजोरों की सेवा के लिए चाहें जम्मू-कश्मीर हो या फिर पूर्वोत्तर, हर जगह आपात स्थिति में संघ के स्वयंसवेक सबसे पहले पहुंचते दिखाई दिए हैं।

यह संघ के स्वयंसेवकों का मूल स्वभाव है। पूर्वोत्तर के भाई-बंधु वर्षों से हमारे होकर भी अलग-थलग थे, लेकिन संघ के प्रयासों से वे हमारे निकट आ गए हैं। इस एकीकरण में संघ का बहुत बड़ा योगदान रहा है। संघ द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य, आत्मनिर्भरता के दुर्गम से दुर्गम क्षेत्रों में सेवा के जो हजारों प्रकल्प चलाए जा रहे हैं, मैं इन सभी कार्यों की मुक्तकंठ से सराहना करता हूं। साथ ही सेवा भारती से जुड़े प्रत्येक कार्यकर्ता की प्रशंसा करता हूं, क्योंकि ये स्वयंसेवक मत-पंथ, जात-पात की सीमा को पारकर राष्ट्र को सुरक्षित और स्वस्थ रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

हम समाज जीवन में परिवर्तन लाएंगे। हमारी मार्गदर्शक श्रीमद्भगवद्गीता है। हम सभी को मनुष्य के रूप में जन्म लेने का सौभाग्य मिला है। ऐसे में हमारे पास जो कुछ भी है या जो भी करने में सक्षम हैं, वह जरूर करें, क्योंकि सेवा से बड़ा अन्य कोई पुण्य काम नहीं है। सेवा वह ऋण है जो आप इस दुनिया में रहने के लिए चुकाते हैं। आप पर मां, प्रकृति का कर्ज है। प्रकृति हमें बिना शर्त प्रचुर मात्रा में संसाधन देती है। इसलिए हमें उसका भी ऋण चुकाना है।

भारत दुनिया के लिए निस्वार्थ सेवा और करुणा का आदर्श रूप है। हमारा पीरामल फाउंडेशन भी 15 साल पहले शुरू हुआ था। देश के 27 राज्य और दो केंद्र शासित राज्यों में इसका काम है। हमारा ध्येय लोगों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाना है। वनवासी समाज की शिक्षा और उनके स्वास्थ्य को ठीक करने की दिशा में हम लगातार काम कर रहे हैं। यह सत्य है कि भारत के युवा ही उसकी अनमोल निधि और भविष्य के नेतृत्व की नींव है। हमारे फाउंडेशन ने ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं, महिलाओं को डिजिटल कौशल से युक्त करके उन्हें सशक्त बनाने के लिए फैलोशिप की स्थापना की है।

हम आज जो कुछ भी हैं, उसके पीछे अहर्निश सेवा करने वाली 5,000 से अधिक लोगों की टीम है। ऐसी टीम के साथ कार्य करते हुए हम समाज जीवन में परिवर्तन लाएंगे। हमारी मार्गदर्शक श्रीमद्भगवद्गीता है। हम सभी को मनुष्य के रूप में जन्म लेने का सौभाग्य मिला है। ऐसे में हमारे पास जो कुछ भी है या जो भी करने में सक्षम हैं, वह जरूर करें, क्योंकि सेवा से बड़ा अन्य कोई पुण्य काम नहीं है। सेवा वह ऋण है जो आप इस दुनिया में रहने के लिए चुकाते हैं। आप पर मां, प्रकृति का कर्ज है। प्रकृति हमें बिना शर्त प्रचुर मात्रा में संसाधन देती है। इसलिए हमें उसका भी ऋण चुकाना है।

Topics: समाज जीवन में परिवर्तनराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघस्वयंसेवक मत-पंथRashtriya Swayamsevak Sanghजात-पातस्वास्थ्यसंघ द्वारा शिक्षासेवा भारतीsocial serviceश्रीमद्भगवद्गीताservice to mother IndiaHealthSwayamsevak sectआत्मनिर्भरताcaste systemSelf-relianceeducation through Sanghसमाज सेवाभारत-चीन युद्ध की बातSeva Bhartiकरगिल युद्ध कीभारत माता की सेवा
अश्वनी मिश्र
अश्वनी मिश्र
@kashmirashwaniअश्वनी मिश्र भारत की सबसे पुरानी और व्यापक रूप से प्रसारित राष्ट्रवादी हिंदी साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं. देश के ज्वलंत मुद्दों की ग्राउंड रिपोर्ट करने के साथ ही मुख्य रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा एवं राजनीतिक मुद्दों के बारे में लिखते हैं. जम्मू—कश्मीर, पश्चिम बंगाल एवं आतंकरोधी घटनाक्रम विशेष रुचि के क्षेत्र हैं. देश की विभिन्न राजनीतिक घटनाओं पर तीक्ष्ण नजर रखते हुए उनका समग्र विश्लेषण पत्रकारिता जगत में एक विशिष्ट स्थान रखता है। भारतीय राजनीति, समाज, खेल, मानवाधिकार क्षेत्र की विशिष्ट विभूतियों से निरंतर साक्षात्कार और चर्चा उनके पत्रकारीय अनुभव को मजबूत बनाती हैं. उनके अनेक आलेखों पर देश के राजनीतिक गलियारों में एक नरैटिव खड़ा हुआ. विभिन्न प्रासंगिक विषयों की रिपोर्ट और आलेखों को संसद के पुस्तकालय में संग्रहणीय तौर पर शामिल किया गया. बंगाल की चुनावी हिंसा की ग्राउंड रिपोर्ट एवं उसके पहले की अनेक हिंसाओं में पीड़ितों के जीवंत साक्षात्कार देशभर में सराहे गए. सोशल मीडिया पर उनकी उपस्थित विशेष दर्जा रखती है. [Read more]
अरुण कुमार सिंह
अरुण कुमार सिंह
समाचार संपादक, पाञ्चजन्य | अरुण कुमार सिंह लगभग 25 वर्ष से पत्रकारिता में हैं। वर्तमान में साप्ताहिक पाञ्चजन्य के समाचार संपादक हैं। [Read more]
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