वक्फ कानून, 1995: मजहब और मनमानी
June 24, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

वक्फ कानून, 1995: मजहब और मनमानी

वक्फ कानून 1995 से वक्फ बोर्ड को असीमित अधिकार मिले हैं। इसकी आड़ में बोर्ड मनमाने ढंग से जमीनें अपने कब्जे में ले रहे हैं। इस कानून से न सिर्फ भू जिहाद को बढ़ावा दिया जा रहा है बल्कि इस संस्था को एकाधिकार प्रदान कर भारत भू संसाधन पर मुस्लिमों का वर्चस्व स्थापित किया जा रहा है

Written byसंदीप त्रिपाठीसंदीप त्रिपाठी
Sep 27, 2022, 12:02 pm IST
in भारत, विश्लेषण, तमिलनाडु

कानून यदि किसी एक मजहबी संस्था को इतना मजबूत बना दे कि अन्य पंथों के लोग उसके सामने मजबूर होने लगें तो क्या उस कानून को पंथनिरपेक्ष कहेंगे? तमिलनाडु के त्रिची जिले के हिंदू बहुल गांव तिरुचेंदुरई के लोग इंसाफ मांग रहे हैं परंतु कानून आड़े आ रहा है।

कोई कानून यदि किसी एक मजहबी संस्था को इतना मजबूत बना दे कि अन्य पंथों के लोग उसके सामने मजबूर होने लगें तो क्या उस कानून को पंथनिरपेक्ष कहेंगे? तमिलनाडु के त्रिची जिले के हिंदू बहुल गांव तिरुचेंदुरई के लोग इंसाफ मांग रहे हैं परंतु कानून आड़े आ रहा है। इस गांव की सारी जमीन तमिलनाडु वक्फ बोर्ड ने अपने नाम कर ली है और असल जमीन मालिकों को पता भी नहीं। इतना ही नहीं, इस गांव में स्थित 1500 वर्ष पुराने मंदिर की जमीन भी वक्फ बोर्ड के नाम हो गई है।

दरअसल इसकी जड़ में कांग्रेस सरकार द्वारा 22 नवंबर, 1995 में लागू एक कानून है- वक्फ कानून। इस कानून के जरिए वक्फ बोर्ड को असीमित अधिकार मिल गए। बोर्ड जिस जमीन को अधिसूचित कर दे कि वह जमीन वक्फ की है तो उस जमीन के असल मालिक को साबित करना पड़ेगा कि वह जमीन वक्फ की नहीं है। और, जमीन के असल मालिक को यह साबित करने के लिए वक्फ बोर्ड के ही ट्रिब्यूनल में जाना होगा, वह सिविल कोर्ट में नहीं जा सकता। वक्फ ट्रिब्यूनल का फैसला आखिरी होगा। इसी कानून के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने याचिका दायर की है जिस पर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई चल रही है।

 

मनमोहन सरकार ने बोर्ड को सौंपी थीं 123 संपत्तियां

कांग्रेस ने अपनी तुष्टीकरण नीति और मुस्लिम वोटबैंक हथियाने के लिए न सिर्फ 1995 में वक्फ कानून में संशोधन कर वक्फ बोर्डों को असीमित अधिकार दिए बल्कि बड़ी मात्रा में सरकारी जमीन भी वक्फ बोर्ड के हवाले करने में भी कोई कोताही नहीं की। डॉ. मनमोहन सिंह नीत यूपीए सरकार ने 2014 के लोकसभा चुनाव से ऐन पहले दिल्ली भू एवं विकास विभाग और दिल्ली विकास प्राधिकरण की 123 सरकारी संपत्तियों को वक्फ बोर्ड के हवाले कर दिया।

चुनाव से ठीक पहले मनमोहन सरकार ने 5 मार्च, 2014 को एक सरकारी गजट निकाला। इस गजट में कहा गया कि दिल्ली में भू एवं विकास कार्यालय की 61 और दिल्ली विकास प्राधिकरण की 62 संपत्तियां वक्फ बोर्ड को सौंप दी जाएंगी। यह गजट तब निकला, जब देश में चुनाव आचार संहिता लागू थी।

इस अधिसूचना के पहले बिंदु में कहा गया कि इन संपत्तियों के संदर्भ में सरकार, या डीडीए या किसी अन्य सरकारी विभाग की ओर से कोई मुआवजा नहीं दिया जाएगा।

दूसरे बिंदु में कहा गया कि सरकार या दिल्ली विकास प्राधिकरण के विरुद्ध दिल्ली वक्फ बोर्ड द्वारा किसी भी न्यायालय में दाखिल उक्त संपत्तियों से संबंधित वाद को पहले वापस लिया जाएगा।

यानी दिल्ली वक्फ बोर्ड ने सरकार पर संपत्तियों के लिए मुकदमा किया और मुकदमा वापस लेने के नाम पर सरकार वे संपत्तियां वक्फ बोर्ड को सौंप देती है। देश की जनता को दिखाने के लिए कहती है सरकार कोई मुआवजा नहीं देगी।

सरकारी जमीनों को वक्फ बोर्ड को सौंपने के फैसले के खिलाफ विहिप ने ने दिल्ली उच्च न्यायालय में अपील की थी, लेकिन उसकी अपील ये कहकर ठुकरायी गई थी कि सभी संबंधित पक्षों से बातचीत कर केंद्र सरकार फैसला करे। 2016 में डीडीए ने इस पर एक सदस्यीय समिति भी बनाई थी। अब ये मामला सर्वोच्च न्यायालय में है और सरकार का पक्ष मांगा गया है। इन 123 संपत्तियों में 29/1, जे पी हॉस्पिटल के भीतर पक्का मजार, 49/1, मस्जिद और कब्रिस्तान, तुर्कमान गेट, रामलीला ग्राउंड, इंडिया गेट के पास मान सिंह रोड पर 7/1 जपटा गंज मस्जिद, 4/1, इरविन रोड पर हनुमान मंदिर के पास मस्जिद, संसद भवन के पास 60/1 शामिल है।

अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि अंग्रेजों ने इस देश को लूटने और बांटने के लिए बहुत से कानून बनाए थे। स्वतंत्रता के पश्चात कांग्रेस ने भी राज करने, लूटने और बांटने के लिए बहुत से कानून बनाए। ऐसा ही एक कानून है 1995 में बना वक्फ कानून। वक्फ बोर्ड में सारे के सारे सदस्य मुस्लिम होते हैं। इस बोर्ड को इतने असीमित अधिकार दे दिए गए हैं कि अगर बोर्ड किसी भू स्वामी को एक आदेश या नोटिस दे दे तो वह उसके विरुद्ध नजदीकी न्यायालय में भी नहीं जा सकता। उसके विरुद्ध वक्फ के ट्रिब्यूनल में ही जाना होगा और अपनी सफाई उसी वक्फ को देनी होगी जिसने कहा कि जमीन उनकी है। यानी बोर्ड ही चोर, बोर्ड ही जांचकर्ता, बोर्ड ही वकील, बोर्ड ही जज। कांग्रेस सरकार ने अन्य किसी पंथ के लिए ऐसा कानून नहीं बनाया।

अपनी असीमित शक्तियों की आड़ में वक्फ बोर्ड कैसे भूमि जिहाद कर रहा है, यह बताने के लिए एक छोटा सा आंकड़ा पर्याप्त होगा। वर्ष 2009 में वक्फ बोर्ड की संपत्तियां चार लाख एकड़ जमीन पर फैली थीं। वक्फ मैनेजमेंट सिस्टम आफ इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक इस वक्त वक्फ बोर्डों पास कुल 8 लाख 54 हजार 509 संपत्तियां हैं जो आठ लाख एकड़ से ज्यादा जमीन पर फैली हैं। यानी 13 वर्षों में वक्फ बोर्ड की संपत्तियां दोगुनी हो गई। कैसे?

वकील अश्विनी उपाध्याय बताते हैं कि वक्फ बोर्ड को इतना अधिकार दे दिया गया कि नोटिस जारी करने से पूर्व उसे जांच करने की भी आवश्यकता नहीं है। वक्फ बोर्ड देशभर में जहां भी कब्रिस्तान की घेरेबंदी करवाता है, उसके आसपास की जमीन को भी अपनी संपत्ति करार दे देता है। अवैध मजारों, नई-नई मस्जिदों की भी बाढ़ सी आ रही है। इन मजारों और आसपास की जमीनों पर वक्फ बोर्ड का कब्जा हो जाता है। उसे जिससे उगाही करनी होती है, उसे धमकाता है कि उसकी जमीन को वक्फ संपत्ति घोषित कर दी जाएगी।

डर के मारे वह व्यक्ति वक्फ अधिकारियों की जी-हुजूरी करने लगता है और फिर मनमाने शर्त मानने को मजबूर होता है। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड अपने असीमित अधिकारों के दुरुपयोग से गरीबों का कन्वर्जन करवा रहा है। वह आदिवासी इलाकों में लोगों की जमीन पर नोटिस देता है और जब व्यक्ति परेशान होता है तो उसे कहा जाता है कि अगर वह इस्लाम अपना ले तो जमीन बच जाएगी।

सेना और रेलवे के बाद सबसे ज्यादा जमीन वक्फ बोर्ड्स के पास है। सेना के पास करीब 18 लाख एकड़ जमीन पर संपत्तियां हैं जबकि देश में रेलवे की चल-अचल संपत्तियां करीब 12 लाख एकड़ में फैली हैं। इसे और अच्छे से समझना है तो मनन कीजिए इस बात पर कि वक्फ की संपत्तियों का फैलाव उत्तर प्रदेश के 17 जिलों जितना है।

उत्तर प्रदेश में मनमानी पर रोक

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने वक्फ बोर्ड की मनमाने ढंग से कब्जा की गई संपत्तियों पर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। योगी सरकार ने प्रदेश के वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की जांच का आदेश दिया है। आदेश में कहा गया है कि एक माह के भीतर वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की जांच करके रिपोर्ट शासन को प्रेषित की जाए। इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि प्रदेश के सभी जनपदों में वक्फ बोर्ड की जितनी भी भूमि है, उसे वक्फ के नाम से राजस्व अभिलेख में दर्ज कराया जाए। जानकारी के अनुसार, जांच रिपोर्ट में वक्फ बोर्ड की सभी संपत्तियों का पूरा विवरण शासन को उपलब्ध कराना होगा। इस जांच के बाद वक्फ संपत्ति के बारे में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। इसके साथ ही वक्फ संपत्ति पर अवैध कब्जे के बारे में स्थिति साफ हो जाएगी। अगर कोई वक्फ की संपत्ति को गलत ढंग से बेचता है तो उस पर रोक लगाई जा सकेगी। सरकार ने राजस्व विभाग के वर्ष 1989 के शासनादेश को निरस्त कर दिया है और कहा है कि जांच एक माह में ही पूरा करें। इससे वक्फ के नाम पर बंजर, ऊसर, भीटा जैसी सार्वजनिक सम्पत्ति को हथियाने वालों की मनमानी अब नहीं चल पाएगी। शासनादेश में कहा गया है कि ‘शासन के संज्ञान में यह तथ्य आया है कि राजस्व विभाग के 7 अप्रैल 1989 के एक शासनादेश के आधार पर प्रदेश में सामान्य भूमि जैसे-बजंर, ऊसर, भीटा आदि को भी वक्फ सम्पत्ति के रूप में दर्ज करके राजस्व रिकार्ड में दर्ज करवाने की अनियमितताएं हो रही हैं’।

विहिप के विनोद बंसल कहते हैं कि भारत में हमारे अनगिनत मंदिर, मठ, गुरुद्वारे, गांव, घर, खेत-खलिहान को कब्जाने के लिए विभिन्न प्रकार के षड्यंत्र के तहत वक्फ बोर्ड काम कर रहा है। यदि इस कानून को ध्यान से अध्ययन करेंगे तो पता चलेगा कि वक्फ बोर्ड को असीमित अधिकार हैं। यह ऐसा षड्यंत्र है जिसके आड़ में भारत को पुन: कब्जाने का हथियार दिया हुआ है।

अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि 1995 के कानून में बड़ी चालाकी से संशोधन करके पर्सन इंटेरेस्टेड को 2013 में पर्सन एग्रीड कर दिया गया। पर्सन इंटेरेस्टेड में शिया और सुन्नी आते हैं जबकि पर्सन एग्रीड में हिंदू एवं अन्य गैर मुस्लिम भी आते हैं। सेक्शन 40 में यह कहता है कि वक्फ बोर्ड किसी ट्रस्ट की संपत्ति को वक्फ संपत्ति घोषित कर सकता है। यह शक्ति सर्वोच्च न्यायालय के बराबर है।

सेक्शन 55 और 56 के तहत किसी की भी संपत्ति को अवैध घोषित कर सकता है। सेक्शन 89 में लिखा है कि वक्फ बोर्ड के खिलाफ कोई मामला दायर करना है तो आपको दो महीने पहले नोटिस देनी पड़ेगी। जो ब्रिटिश सरकार के समय कानून था वही वक्फ कानून में है। वक्फ कानून के सेक्शन 104 में कहा गया है कि जो इस्लाम नहीं मानता, वो भी वक्फ कर सकता है और यह कन्वर्जन को बढ़ावा देता है। इस समय पूरा पंजाब और हरियाणा वक्फ की समस्या से जूझ रहा है।

अंकुर शर्मा ने कहा कि वक्फ कानून जमीनों को हथियाने का हथियार है। यह भारतवर्ष के इस्लामीकरण का एक तंत्र है। जम्मू संभाग में वक्फ बोर्ड के जरिए हिन्दुओं की जमीन हथियाने का काम किया गया। 31 अगस्त 1985 में सरकार के साथ मिलकर यहां के वक्फ बोर्ड ने पुंछ में कुछ जगहों पर नोटिफाई कर दिया था। आप मान कर चलें कि पुंछ की आधा शहर वक्फ की संपत्ति घोषित कर दिया।

असल में वक्फ अधिनियम, 1995 जैसे काले कानून के रूप में न सिर्फ भू जिहाद को बढ़ावा दिया जा रहा है बल्कि इस संस्था को एकाधिकार प्रदान कर भारत भू संसाधन पर मुस्लिमों का वर्चस्व स्थापित किया जा रहा है। इसके साथ साथ इस अधिनियम के बहुतेरे प्रावधान ऐसे भी हैं, जिनका धर्मनिरपेक्ष भारत में कोई स्थान नहीं है।

वक्फ कानून 1995

सेक्शन 40 : अगर वक्फ बोर्ड को लगता है कि कोई संपत्ति उसकी है तो वो उसकी जांच कर सकता है और अगर बोर्ड ये मान ले कि ये संपत्ति उसकी है तो वो उस संपत्ति को वक्फ की संपत्ति घोषित कर सकता है ।

सेक्शन 54 : वक्फ बोर्ड सिर्फ किसी संपत्ति को वक्फ संपत्ति ही नहीं घोषित कर सकता, बल्कि वो उस संपत्ति पर अतिक्रमण को हटाने के लिए डीएम को भी कह सकता है। डीएम को ऐसी संपत्ति को खाली करवाना होगा।

सेक्शन 83 : वक्फ ट्रिब्यूनल के पास वैसे ही शक्तियां होंगी जैसे सिविल कोर्ट के पास होती है। ट्रिब्यूनल का फैसला फाइनल होगा। उसे सभी पक्षों को मानना होगा। ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ कोई अपील नहीं की जा सकती। सिर्फ उच्च न्यायालय को यह शक्ति होगी कि अगर कोई अपील करे या खुद से वो ट्रिब्यूनल के फैसले की वैधता जांच सकता है।

सेक्शन 85 : इसके तहत अगर कोई मामला वक्फ से जुड़ा हुआ है तो उसे किसी सिविल, राजस्व कोर्ट या किसी अन्य प्राधिकरण में चुनौती नहीं दे सकते। अगर आपकी संपत्ति को वक्फ घोषित कर दिया जाए तो आपको वक्फ ट्रिब्यूनल में जाना होगा।

सेक्शन 85 : अगर वक्फ बोर्ड ट्रिब्यूनल को आप संतुष्ट नहीं कर पाते कि ये आपकी ही जमीन है तो आपको जमीन खाली करने का आदेश दे दिया जाएगा। ट्रिब्यूनल का फैसला ही अंतिम होगा। कोई सिविल कोर्ट, वक्फ ट्रिब्यूनल कोर्ट के फैसले को बदल नहीं सकती है।

Topics: हिंदू बहुल गांवसेक्शन 40सेक्शन 54सेक्शन 83सेक्शन 85वक्फ कानून 1995जम्मू संभाग में वक्फ बोर्डभू जिहाद को बढ़ावाभारतवर्ष के इस्लामीकरणतमिलनाडु के त्रिची जिले
संदीप त्रिपाठी
संदीप त्रिपाठी
पाञ्चजन्य में सहयोगी संपादक [Read more]
Share7TweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

सर्वोच्च न्यायालय

#वक्फ बोर्ड: माननीय की ‘चोट’ मनमानी पर

नई दिल्ली में अशोक रोड स्थित चुनाव आयोग के मुख्य दरवाजे के पास बनी अवैध मजार। फुटपाथ पर बनी यह मजार आज नहीं, तो कल वैध हो जाएगी।

वक्फ बोर्ड : जमीन हथियाने का हथियार

Load More

ताज़ा समाचार

मिडफील्डर मनप्रीत सिंह को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया।

एफआईएच प्रो लीग : हॉकी में भारत की शानदार जीत, पाकिस्तान को 4-3 से हराया

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

UCC : मप्र में 90 फीसद से अधिक नागरिक यूसीसी के पक्ष में, अल्पसंख्यक समुदाय का भी बड़ी संख्या में समर्थन

देवेंद्र फडणवीस

UCC : उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद महाराष्ट्र में भी लागू होगा यूनिफार्म सिविल कोड, सरकार ने शुरू की प्रक्रिया

ख्वाजा आसिफ, पाकिस्तानी रक्षा मंत्री

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री की धमकी पर भारत का करारा जवाब, PoJK का जिक्र कर लगाई लताड़

आप विधायक चैतर बसावा

गुजरात: AAP विधायक को 7 साल की सजा, बने कैदी नंबर 90888, नहीं लड़ पाएंगे 6 साल तक चुनाव

भगवंत मान, मुख्यमंत्री, पंजाब

भगवंत मान के वीडियो को फर्जी साबित करने के लिए 10 लाख रुपए में बनी थी फोरेंसिक रिपोर्ट, 2 आरोपी गिरफ्तार

Shyama Prasad Mukherjee की मौत की जांच से Nehru क्यों डरे?

dr Shyama prasad Mukharjee mystirious death

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की रहस्यमयी मौत की अबूझ पहेली

गिरफ्तारी, अत्याचार और भय के माहौल में गुजरती थी रातें – hitler gandhi

महबूबा मुफ्ती

खीर भवानी मंदिर में महबूबा मुफ्ती: क्या उन कुछ लोगों के नाम बताएंगी,  जिन्होंने हिंदुओं के खिलाफ मस्जिदों से नारे लगवाए

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies