दिल्ली में गूंजी हिन्दुत्व की हुंकार : शरीयत की सनक पर भारी संविधान की धमक
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दिल्ली में गूंजी हिन्दुत्व की हुंकार : शरीयत की सनक पर भारी संविधान की धमक

हिन्दू समाज की ओर से नई दिल्ली के मंडी हाउस से जंतर-मंतर तक संकल्प मार्च का आयोजन किया गया। विशाल संकल्प मार्च में दिल्ली-एनसीआर के 1,50,000 से अधिक हिन्दुओं ने भाग लिया

Written byअश्वनी मिश्रअश्वनी मिश्र
Jul 18, 2022, 12:33 pm IST
in भारत, दिल्ली
संकल्प मार्च में उमड़ा हिन्दू समाज

संकल्प मार्च में उमड़ा हिन्दू समाज

गत 9 जुलाई को समस्त हिन्दू समाज की ओर से नई दिल्ली के मंडी हाउस से जंतर-मंतर तक संकल्प मार्च का आयोजन किया गया। विशाल संकल्प मार्च में दिल्ली-एनसीआर के 1,50,000 से अधिक हिन्दुओं ने भाग लिया

पिछले कुछ समय से देश भर में कट्टरपंथियों द्वारा जान-बूझकर अराजकता की स्थिति उत्पन्न की जा रही है। जगह-जगह उन्माद फैलाया जा रहा है। हिन्दुओं को बात-बात पर डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है। ‘सिर तन से जुदा’ के जिहादी नारे लगाती पगलाई भीड़ यहीं नहीं रुक रही, वह उदयपुर और अमरावती जैसी घटनाओं को अंजाम देकर देश को शरिया कानून के तहत चलाने की साजिशें रचती दिखाई दे रही है। शायद ही ऐसा कोई दिन जाता हो, जब देश के अलग-अलग इलाकों से जिहादियों की ओर से हिंदुओं के ‘सिर तन से जुदा’ करने की धमकी न आती हो। यानी नूपुर शर्मा का जो भी समर्थन करता दिखाई देता है, उसे डराया-धमकाया जाता है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा, महाराष्ट्र और राजस्थान इसके उदाहरण हैं। जाहिर है, देश का हिन्दू समाज न केवल जिहादी घटनाओं से व्यथित है, बल्कि आक्रोशित है। इस बाबत एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए देश भर में अलग-अलग जगहों पर प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

इसी कड़ी में गत 9 जुलाई को समस्त हिन्दू समाज की ओर से नई दिल्ली स्थित मंडी हाउस से जंतर-मंतर तक संकल्प मार्च आयोजित किया गया। इस मार्च में दिल्ली-एनसीआर के 1,50,000 से अधिक हिन्दुओं ने भाग लिया। मजहबी उन्माद से आक्रोशित सभी लोगों का स्पष्ट कहना था कि ये देश संविधान से चलेगा, शरीयत या जिहाद से नहीं। इस दौरान बच्चों से लेकर युवा तक, महिलाओं से लेकर वृद्ध तक सभी ‘वंदे मातरम्’, ‘जय श्री राम’, ‘भारत माता की जय’, ‘जो हिन्दू हित की बात करेगा, वही देश पर राज करेगा’, ‘कन्हैया-उमेश के हत्यारों को फांसी दो-फांसी दो’, ‘जिहादी हिंसा नहीं सहेंगे’ जैसे नारे लगाए जा रहे थे।

 

‘कोई भीड़ निर्णय नहीं कर सकती कि नूपुर शर्मा दोषी है कि नहीं’

 

विश्व हिन्दू परिषद के कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने संकल्प मार्च में जिहादी अराजकता और हिन्दू समाज पर आए दिन हो रहे हमलों पर अराजक तत्वों को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर पाञ्चजन्य के साथ विस्तृत बात की। प्रस्तुत हैं, बातचीत के संपादित अंश:-

संकल्प मार्च का उद्देश्य क्या था?
पिछले कुछ दिनों में ऐसी घटनाएं हुईं, जो संविधान और कानून-सम्मत नहीं हंै। कुछ लोगों को नूपुर शर्मा के बयानों से आपत्ति हुई। प्राथमिकी लिखाई जा चुकी है। पुलिस जांच कर रही है। भारत की कानूनी प्रक्रिया में मजिस्ट्रेट के पास केस चलेगा। न्यायालय तय करेगा कि दोषी है कि नहीं। पर ऐसा नहीं माना गया। 100 से ज्यादा स्थानों पर जुमे की नमाज के बाद लोग निकले और मंच से कहा गया कि ‘जो आंख उठाएगा उसकी आंख फोड़ देंगे’। ‘जो जुबान निकालेगा उसकी जुबान काट देंगे’। ‘जो सिर उठेगा, उसके सिर को धड़ से अलग कर दिया जाएगा’। ये कानून तो शरिया का है। 1400 साल पुराना है, बर्बर है। यह भारत में लागू नहीं होता। तो क्या कोई भीड़ तय करेगी कि नूपुर शर्मा दोषी है? क्या भीड़ तय करेगी कि उसको क्या दंड मिलना चाहिए? नूपुर के समर्थन में कन्हैया के परिवार ने एक फेसबुक पोस्ट डाली। एफआईआर हुई। पुलिस ने उससे माफी मंगवाई गई। पोस्ट को हटा लिया गया। लिखित समझौते में तय हुआ कि अब यह प्रकरण समाप्त हो गया। उसके बाद हत्या क्यों हुई? कोल्हे की हत्या क्यों हुई? अगर कोई हमसे असहमत है तो क्या हत्या करेंगे? ये सारी प्रवृत्तियां कानून और संविधान के राज को चुनौती दे रही हैं। भारत की अखंडता और एकता को तोड़ने के षड्यंत्र हो रहे हैं। इसलिए हमने भारत की जनता का संकल्प घोषित किया है कि भारत एक रहेगा। अखंड रहेगा। देश संविधान और कानून से चलेगा। इस सब शक्तियों को परास्त करके हम विकास और समृद्धि के मार्ग पर आगे बढ़ेंगे और भारत को विश्व गुरु बनाकर विश्व को शांति और प्रसन्नता का मार्ग दिखाएंगे।

नूपुर शर्मा के विषय पर सर्वोच्च न्यायालय के दो न्यायाधीशों की ओर से जो टिप्पणी की गई, क्या उससे जिहादियों के हौसले बुलंद हुए हैं?
देखिए, सर्वोच्च न्यायालय के सामने यह विषय नहीं था कि नूपुर दोषी है कि नहीं, क्योंकि ये मामला मजिस्ट्रेट तय करेगा। प्रक्रिया पूरी करके तय करेगा। पहले गवाहियां होंगी। फिर बहस होगी। तब तय होगा। सर्वोच्च न्यायालय के जज यह घोषणा करते हंै तो यह लक्ष्मण रेखा के बाहर है। पर सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणियां मौखिक हैं। सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों ने हमें बताया है कि मौखिक टिप्पणियां सर्वोच्च न्यायालय का आदेश नहीं होतीं। मैं समझता हूं कि न्यायपालिका इस तरह की टिप्पणियों से बचती तो अच्छा रहता। दूसरी बात, पत्रकार अर्नब गोस्वामी के मुकदमे में न्यायालय ने कहा था कि एक मामले में एक ही एफआईआर हो सकती है। बाकी सारी एफआईआर दिल्ली में स्ािानांतरित करें। नूपुर का मामला तो बहुत गंभीर है। उस समर्थन वाली पोस्ट को लेकर दो लोगों की हत्या हो गयी, तो नूपुर को मजबूर किया जाए कि वह बंगाल जाए या असम जाए? अगर अर्नब गोस्वामी के मामले में सभी एफआईआर इकट्ठी करना उचित है तो ऐसा नूपुर के मामले में उचित क्यों नहीं? इसलिए हमें सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से गहरी निराशा हुई है।

विहिप की ओर से हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। आखिर इसकी जरूरत क्यों पड़ी?
किसी भी व्यक्ति की सुरक्षा कानून से बढ़कर नहीं है। हमने यह राय दी है कि किसी को धमकी मिलती है तो वह पुलिस में रिपोर्ट लिखवाए और पुलिस को उस पर कार्रवाई करनी चाहिए। अब कहीं पर पुलिस रिपोर्ट नहीं लिखती या पुलिस कार्रवाई नहीं करती तो वह बजरंग दल को बताएगा। हमारे नौजवान उसके साथ थाने जाएंगे और थाने के अधिकारी को बताएंगे कि तुम्हारे लिए ये मजबूरी है कि तुम ये रिपोर्ट दर्ज करोगे। तुम इसको मना नहीं कर सकते। तुम जांच भी करो और रक्षा भी करो। कन्हैया और कोल्हे के मामले में पुलिस के पास विश्वसनीय सूचनाएं थीं कि उनके प्राणों पर संकट है। फिर कार्रवाई क्यों नहीं की? ये सब हो, कानून की एजेंसियां काम करें, इसमें उनकी मदद के लिए बजरंग दल काम करेगा।

नूपुर शर्मा का पक्ष कितना मजबूत है?
मैंने स्पष्ट कहा है कि कोई भीड़ यह निर्णय नहीं कर सकती कि नूपुर शर्मा दोषी है कि नहीं। वैसे मैं भी यह निर्णय नहीं कर सकता कि वह दोषी है कि नहीं। पर मैंने एक वकील के नाते उसकी फाइल पढ़ी है। मेरी समझ है कि उसका पक्ष बहुत मजबूत है। पर निर्णय मेरा नहीं चलेगा, न्यायालय का होगा। हम प्रतीक्षा करेंगे।

 

भगवामय हुईं दिल्ली की सड़कें
संकल्प मार्च के दौरान दिल्ली की सड़कें भगवामय थीं। पूरे दिल्ली-एनसीआर से हिन्दुओं की भागीदारी देखने को मिली। मंडी हाउस से लेकर जंतर-मंतर तक अगर कुछ दिखाई पड़ रहा था तो सिर्फ हाथों में तिरंगा और भगवा ध्वज लिए हुए लोग। ये कतारबद्ध लोग पूरे अनुशासन के साथ जंतर-मंतर पहुंच रहे थे। खास बात यह थी कि मार्च में सभी मत-संप्रदायों के लोग शामिल होकर जिहादी अराजकता के खिलाफ आवाज उठा रहे थे।

हिंदुओं को कोई डरा नहीं सकता
जंतर-मंतर पर मुख्य अतिथि के रूप मेें उपस्थित थे विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष श्री आलोक कुमार। संकल्प मार्च को संबोधित करते उन्होंने कहा,‘‘हिंदुओं पर हो रहे हमले ठीक नहीं हैं। हिंदुओं को न कोई विभाजित कर सकता और न ही डरा सकता है। देश में नूपुर शर्मा का समर्थन करने वाले लोगों पर हमले हो रहे हैं। यह किसी भी तरीके से स्वीकार्य नहीं है। भारत देश संविधान से चलेगा। यहां जिहाद के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि उदयपुर में कन्हैयालाल की हत्या राज्य सरकार द्वारा सुरक्षा न देने की वजह से हुई है। इसके अलावा आए दिन अलग-अलग जगहों से जिहादियों द्वारा हिन्दुओं को धमकी दी जा रही है। इसे देखते हुए विहिप ने प्रांतवार हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। अगर किसी भी हिंदू को धमकी मिल रही है तो वह इन नंबरों पर फोन करे। उनकी मदद के लिए हमारे कार्यकर्ता हर संभव सुरक्षा के लिए तैयार हैं।

देश में सभी को अपनी बात कहने का हक है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि असहमति पर आप किसी का गला काट दें। निश्चित ही यह मानसिकता मुगलों के समय से चली आ रही है, जिसे कुचलना ही होगा

न्यायिक सुधार की जरूरत
संकल्प मार्च में शामिल सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि नूपुर शर्मा ने माफी मांग ली है। बावजूद इसके पूरे देश में अराजकता का वातावरण पैदा किया जा रहा है। जघन्य हत्याएं की गई हैं। इसे देखते हुए देशभर का हिन्दू समाज आक्रोशित है। सब चाहते हैं कि हत्यारों को फांसी की सजा मिले। लेकिन अगर आप देखें तो पिछले 50 साल में जिहादियों को फांसी नहीं हुई। दो चार आतंकवादियों को छोड़ दें तो ज्यादातर जिहादियों को फांसी नहीं होती। इसलिए हमारा कहना है कि इसके लिए तत्काल अलग से कानून बने। न्यायिक सुधार हो ताकि एक साल के अंदर हत्यारों को फांसी हो सके। उन्होंने कहा कि एक के बाद एक हत्याएं होती जा रही हैं और जिहादियों को फांसी नहीं हो रही। इसीलिए उनके मन में खौफ नहीं है। दूसरा, पूरी दुनिया को पता है कि मदरसों में जिहाद सिखाया जा रहा है। इसलिए मदरसे बंद हों, और समान शिक्षा लागू हो। इस दौरान भाजपा नेता कपिल मिश्र ने कहा कि देश में कानून बिगाड़ने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। कानून बचाने के लिए हिंदू समाज सड़क पर उतरा है। संकल्प मार्च तो अभी एक संदेश है उन लोगों के लिए जो जिहाद फैला रहे हैं।

जिहादी मानसिकता को कुचलना होगा
संकल्प यात्रा में शामिल सिख समाज के रविन्दर सिंह का कहना था कि कन्हैया की हत्या गंदी मानसिकता दिखाती है। देश में सभी को अपनी बात कहने का हक है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि सहमत न होने पर आप किसी का गला काट देंगे। निश्चित ही यह मानसिकता मुगलों के समय से चली आ रही है, जिसे कुचलना होगा। इन लोगों ने ही गुरु तेग बहादुर साहब का सिर कलम किया था। आज भी ये उसी मानसिकता पर चल रहे हैं। इसी तरह चरणजीत सिंह ने कहा कि सिख समाज पूरी दमदारी के साथ हिन्दू समाज के साथ खड़ा है। यहां तालिबानी राज चलने नहीं दिया जाएगा। मार्च में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुईं।

विकासपुरी की मीना खन्ना ने कहा कि हिन्दू समाज सड़क पर उतरकर यह संदेश दे रहा है कि कोई भी हिन्दुओं को दबा हुआ ना समझे। देश में कहीं भी हिन्दुओं पर अत्याचार होगा तो हम सब चुप नहीं बैठेंगे। ईंट का जवाब पत्थर से दिया जाएगा। इसी तरह दिल्ली विश्वविद्यालय की शिक्षिका प्रेरणा मल्होत्रा ने कहा, ‘‘पिछले कुछ समय से देश में जिहादी तत्व बौखलाए हुए हैं। इसी के चलते वे हिन्दुओं को निशाना बना रहे हैं। उदयपुर और अमरावती की घटनाएं इसका उदाहरण हैं। इस सबके पीछे पीछे नूपुर शर्मा के एक बयान को जिम्मेदार माना जा रहा है।

मेरा कहना है कि हो सकता है किसी को नूपुर की टिप्पणी का अंदाज पसंद नहीं आया हो, लेकिन मैं चुनौती देकर कह सकती हूं कि उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा जो उनकी ही किताब में गलत हो।’’ राजनीतिक विश्लेषक के रूप में उपस्थित अवनिजेश अवस्थी ने कहा, ‘‘उदयपुर और अमरावती में जो घटनाएं हुई हैं, वे पूरे देश के लिए बहुत ही चिंताजनक हैं। जिहादी और आतंकवादी मानसिकता के लोगों ने जिस तरीके से क्रूर, जघन्य अपराधों को अंजाम दिया है, उसे देखते हुए हम सभी भारतवासियों को एकजुट होकर प्रतिकार करना होगा।’’ मार्च का एक ही संदेश था कि जिहादी मानसिकता को जड़ से मिटाने के लिए हिन्दू एकजुट हों।

Topics: हिन्दुत्व की हुंकारशरीयत की सनकसंविधान की धमक
अश्वनी मिश्र
अश्वनी मिश्र
@kashmirashwaniअश्वनी मिश्र भारत की सबसे पुरानी और व्यापक रूप से प्रसारित राष्ट्रवादी हिंदी साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं. देश के ज्वलंत मुद्दों की ग्राउंड रिपोर्ट करने के साथ ही मुख्य रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा एवं राजनीतिक मुद्दों के बारे में लिखते हैं. जम्मू—कश्मीर, पश्चिम बंगाल एवं आतंकरोधी घटनाक्रम विशेष रुचि के क्षेत्र हैं. देश की विभिन्न राजनीतिक घटनाओं पर तीक्ष्ण नजर रखते हुए उनका समग्र विश्लेषण पत्रकारिता जगत में एक विशिष्ट स्थान रखता है। भारतीय राजनीति, समाज, खेल, मानवाधिकार क्षेत्र की विशिष्ट विभूतियों से निरंतर साक्षात्कार और चर्चा उनके पत्रकारीय अनुभव को मजबूत बनाती हैं. उनके अनेक आलेखों पर देश के राजनीतिक गलियारों में एक नरैटिव खड़ा हुआ. विभिन्न प्रासंगिक विषयों की रिपोर्ट और आलेखों को संसद के पुस्तकालय में संग्रहणीय तौर पर शामिल किया गया. बंगाल की चुनावी हिंसा की ग्राउंड रिपोर्ट एवं उसके पहले की अनेक हिंसाओं में पीड़ितों के जीवंत साक्षात्कार देशभर में सराहे गए. सोशल मीडिया पर उनकी उपस्थित विशेष दर्जा रखती है. [Read more]
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