श्रीकृष्ण सर्किट-धार्मिक पर्यटन का अभिनव आयाम
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श्रीकृष्ण सर्किट-धार्मिक पर्यटन का अभिनव आयाम

‘‘मैं कुरुक्षेत्र की यात्रा करूंगा तथा कुरुक्षेत्र में निवास करूंगा, जो व्यक्ति इस प्रकार निरंतर कथन करता है, वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है।’’

Written byडॉ. राजेश चौहानडॉ. राजेश चौहान
Jul 8, 2022, 08:30 am IST
in धर्म-संस्कृति, हरियाणा

हरियाणा में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है। श्रीकृष्ण सर्किट इसी की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इस योजना में श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा और द्वारिका को भी शामिल किया गया है। परियोजना पूरी होने के बाद धर्मनगरी कुरुक्षेत्र को धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी

कुरुक्षेत्रं गमिष्यामि कुरुक्षेत्र वसाम्यहम्।
य एवं सततं ब्रूयात् सर्वपापै: प्रमुच्यते।।

महाभारत के वन पर्व के उपरोक्त श्लोक का अर्थ है, ‘‘मैं कुरुक्षेत्र की यात्रा करूंगा तथा कुरुक्षेत्र में निवास करूंगा, जो व्यक्ति इस प्रकार निरंतर कथन करता है, वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है।’’ दक्षिण-पूर्व लाओस में मिले एक प्राचीन शिलालेख में भी कुरुक्षेत्र को त्रिलोक का सर्वोत्तम तीर्थ स्थल कहा गया है। जिस भूमि पर जाने के विचार भर से पापों से मुक्ति और पुण्य का बोध होता हो, कोई वहां क्यों नहीं जाना चाहेगा? ऐसा महात्म्य बहुत कम स्थानों का होता है। कुरुक्षेत्र मानव इतिहास की महानतम घटना का पुण्य साक्षी है, जिसका कण-कण आस्था को प्रतिपुष्ट करता है।

आज से 5,156 वर्ष पूर्व द्वापर युग में श्रीकृष्ण ने इसी भूमि को गीता के महान संदेश के लिए चुना। भगवान के श्रीमुख से निश्रित वाणी श्रीमद्भगवद्गीता के रूप में सर्वकालिक प्रतिष्ठापित होकर पूरी मानव जाति को सारगर्भित जीवन दर्शन दे रही है। देश-दुनिया के लोग इस पवित्र भूमि के दर्शन करें और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिले, इस दृष्टि से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीकृष्ण सर्किट परियोजना की शुरुआत की। हालांकि इस योजना के अंतर्गत श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा और द्वारिका को भी शामिल किया गया है, लेकिन महाभारत की भूमि के प्रति विश्व समुदाय में भिन्न जिज्ञासा है। गीता की जन्मस्थली के दर्शन की अभिलाषा प्रत्येक सनातनी की आकांक्षाओं में समाहित है।

केंद्र सरकार ने श्रीकृष्ण सर्किट के माध्यम से हरियाणा में धार्मिक पर्यटन की प्रतिबद्धता दर्शाई है। केंद्र ने श्रीकृष्ण सर्किट के पहले चरण के अंतर्गत कुरुक्षेत्र को 97.5 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इससे कुरुक्षेत्र के तीर्थ स्थलों ब्रह्मसरोवर, नरकातारी, भीष्मकुंड, सन्निहित सरोवर, ज्योतिसर और शहर का विकास किया जाएगा। इन तीर्थों पर सीसीटीवी कैमरे, वाई-फाई और सुरक्षा प्रणाली लगाई जाएगी। गीता स्थली ज्योतिसर में तो 35 करोड़ रुपये की लागत से 7,580 वर्ग मीटर में महाभारत थीम पर एक विशाल संग्रहालय बनाया जा रहा है। इसे 31 दिसंबर, 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इस संग्रहालय में महाभारत के दृश्यों को आधुनिक मल्टीमीडिया प्रणाली से दर्शाया जाएगा। वहीं दूसरे चरण के लिए 100 करोड़ रुपये जारी किए जाने हैं।

ज्योतिसर तीर्थ का कायाकल्प
श्रीकृष्ण सर्किट की परिकल्पना साकार होने के बाद धर्मनगरी कुरुक्षेत्र को धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी। महाभारत का युद्ध 48 कोस के धर्मक्षेत्र में लड़ा गया था। वर्तमान भौगोलिक स्थितियों के अनुसार, यह 48 कोस भूमि कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद, करनाल और पानीपत सहित 5 जिलों में आती है। इस धर्मक्षेत्र में प्राचीन काल में 360 से भी अधिक तीर्थ हुआ करते थे। इन तीर्थों का पौराणिक महत्व है। परियोजना के पहले चरण में उन चार प्रमुख तीर्थों को विकसित किया जा रहा है, जहां श्रद्धालुओं का सबसे ज्यादा आवागमन रहता है। इसमें कुरुक्षेत्र के ज्योतिसर तीर्थ को प्राथमिकता दी जा रही है। महाभारत का युद्ध शुरू होने से पूर्व यहीं पर श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश दिया था।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्योति सरोवर के तट पर आज भी गीता का साक्षी वट वृक्ष आस्था का केंद्र है। श्रीकृष्ण सर्किट के पहले चरण के अंतर्गत ज्योतिसर पर 32 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा बताते हैं कि श्रीकृष्ण सर्किट के अतिरिक्त राज्य सरकार भी यहां बड़ी राशि खर्च कर रही है। इस परियोजना पर केंद्रीय अनुदानों के साथ राज्य सरकार भी लगभग 150 करोड़ रुपये ज्योतिसर तीर्थ के विकास पर खर्च करेगी। यानी लगभग 200 करोड़ रुपये से ज्योतिसर तीर्थ का कायाकल्प होगा। गीता उद्गम स्थली ज्योतिसर तीर्थ परिसर के लिए भव्य प्रवेश द्वार निर्माणाधीन है। यहां महाभारत युद्ध और श्रीमद्भगवद्गीता से संबंधित लाइटिंग नजर आएगी। ज्योतिसर में प्राचीन झील क्षेत्र में श्रीकृष्ण सर्किट परियोजना के तहत काम हो रहा है।

5 थीम पर गैलरी
ज्योतिसर में 5 थीम पर अलग-अलग गैलरी (वीथिका) निर्माणाधीन हैं। इन सबके लिए अलग-अलग भव्य
भवन बनाए जा रहे हैं। इनका 90 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। छाबड़ा बताते हैं कि पहली गैलरी में
48 कोस भूमि के तीर्थों एवं उनके महत्व को दर्शाया जाएगा। दूसरी में महाभारत युद्ध के 18 दिन की प्रमुख घटनाएं प्रदर्शित होंगी। त्रिआयामी चित्रांकन के माध्यम से दर्शक महाभारत की घटनाओं का जीवंत आभास कर पाएंगे। इसी प्रकार गीता खंड में श्रीमद्भगवद्गीता, अर्जुन के विषाद और विराट रूप को दर्शाया जाएगा।

तीर्थराज सन्निहित सरोवर पर भी श्रीकृष्ण सर्किट के अंतर्गत सौंदर्यीकरण किया गया है। इसके अलावा 9 करोड़ रुपये सिटी सर्विलांस पर खर्च किए जाएंगे। इससे कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे और स्क्रीन लगाई जाएंगी। कुछ दिन पहले ही हरियाणा सरकार ने ब्रह्मसरोवर के जल को प्रवाहमान बनाने के लिए अलग से 27 करोड़ रुपये की परियोजना पूरी की है। करोड़ों रुपये की लागत से तीर्थों का जीर्णोद्धार करने के बाद अब यह श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को आकर्षित करने लगा है।

तीसरी वीथिका श्रीकृष्ण के जीवन को समर्पित होगी, चौथी में श्रीमद्भगवद्गीता के विविध आयाम होंगे, जबकि पांचवीं गैलरी विश्व गुरु भारत की थीम पर होगी। इसमें सरस्वती के इतिहास, महत्व एवं वैज्ञानिक साक्ष्य संजोये जाएंगे। यहां सरस्वती खंड भी बनाया जा रहा है, जिसमें श्रद्धालु भारत के गौरवशाली इतिहास पर दृष्टिपात कर सकेंगे। यहां सृष्टि के प्रारम्भ से लेकर वर्तमान तक का इतिहास दिखेगा। महाभारत भूमि के इसी क्षेत्र में सरस्वती नदी का प्रवाह स्थल विद्यमान है। यहां से सरस्वती की प्राचीनता और महानता के असंख्य साक्ष्य मिले हैं। इसी भूमि पर सरस्वती के तट पर पुराणों और शास्त्रों की रचना हुई। यह इतिहास भी सरस्वती खंड का हिस्सा होगा। ये वीथिकाएं 3डी मैपिंग, होलोग्राफिक तस्वीरों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आदि से सुसज्जित होंगी।

श्रीकृष्ण का विराट स्वरूप
छाबड़ा बताते हैं कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल राज्य सरकार के माध्यम से मल्टी मीडिया पर बड़ी राशि खर्च कर रहे हैं, ताकि युवा पीढ़ी को नव तकनीक के माध्यम से अपनी संस्कृति के साथ जोड़ा जा सके। ज्योतिसर तीर्थ पर 6 करोड़ रुपये की लागत से एक लाइट एण्ड साउंड शो भी लगाया गया है। इसके माध्यम से तीर्थयात्री गीता उपदेश के क्षणों का महत्व लाइट एण्ड साउंड के जरिए समझ सकते हैं। श्रीकृष्ण सर्किट से इतर मुख्यमंत्री ने ज्योतिसर में श्रीकृष्ण का 40 फीट ऊंचा विराट स्वरूप भी स्थापित किया है। इसका शिलान्यास राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन राव भागवत ने किया था और 30 जून को उनके कर कमलों से ही इसका लोकार्पण भी हुआ। बारिश के कारण प्रतिमा अनावरण गीता ज्ञान संस्थानम से ऑनलाइन माध्यम से किया गया। इसमें मोहन भागवत के अलावा राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय और मुख्यमंत्री मनोहर लाल भी मौजूद रहे।

छाबड़ा बताते हैं कि श्रीकृष्ण सर्किट के तहत गीता के साक्षी वट वृक्ष के संरक्षण के अलावा 23 एकड़ में गीता पार्क, ज्योतिसर में 5,000 लोगों की क्षमता वाला खुला थियेटर भी बनाया जाएगा। गीता पार्क में पांच आभासी संग्रहालय होंगे। कुछ अन्य इमारतों का निर्माण कार्य 90 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है। बजट का एक हिस्सा आधुनिक तरीके से महाभारत युद्ध और 48 कोस तीर्थों को यहां दिखाने पर खर्च होगा। इसके अलावा लैंड स्केपिंग से लेकर तमाम व्यवस्थाएं इस बजट से की जाएंगी। साथ ही, एक वैदिक पुस्तकालय और इंटरेक्टिव लैब भी बनाया जाएगा। इसमें दर्शक प्राचीन श्लोकों का सही उच्चारण करना सीख सकेंगे। केंद्रीय चतुर्भुज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंडलों द्वारा महाभारत आधारित शो आयोजित किया जाएगा।

विश्व मानचित्र पर होगा 48 कोस तीर्थ
मदन मोहन छाबड़ा बताते हैं कि केंद्र और हरियाणा सरकार महाभारत की 48 कोस भूमि के तीर्थों व दर्शनीय स्थलों को विश्व मानचित्र पर लाना चाहती हैं। कुरुक्षेत्र और ज्योतिसर की भूमि के असल गौरव से देश-दुनिया
रू-ब-रू होगी। इससे इस तीर्थ की अपनी एक अलग पहचान होगी। भीष्म कुंड नरकातारी को भी श्रीकृष्ण सर्किट के अंतर्गत विकसित किया जा रहा है। यह वही स्थान है, जहां अर्जुन ने बाण से गंगा की धारा निकालकर शरशैया पर लेटे भीष्म पितामह को तृप्त किया था। इस तीर्थ का सौंदर्यीकरण किया गया है और ध्यान के लिए एक हॉल बनाया गया है।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने तीर्थ दर्शन कार्यक्रम के अंतर्गत यहां आने पर शरशैया पर लेटे भीष्म पितामह व पास में खड़े अर्जुन की प्रतिमा लगवाने की घोषणा की थी। लगभग ढाई करोड़ रुपये की लागत से यहां प्रतिमा स्थापित कर दी गई है। श्रीकृष्ण सर्किट के तहत कुरुक्षेत्र के सबसे विशाल और प्राचीन तीर्थ ब्रह्म सरोवर का भी सौंदर्यीकरण किया गया है। पहले चरण में यहां 38 करोड़ रुपये खर्च होने थे, जिसमें से अभी तक 22 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। यह राशि प्रकाश, प्रवेश द्वार और शिखर बनाने पर खर्च की गई है, जबकि 16 करोड़ रुपये की लागत से यहां पर एक लेजर लाइट एण्ड साउंड शो जल्द लगने वाला है।

इसी प्रकार तीर्थराज सन्निहित सरोवर पर भी श्रीकृष्ण सर्किट के अंतर्गत सौंदर्यीकरण किया गया है। इसके अलावा 9 करोड़ रुपये सिटी सर्विलांस पर खर्च किए जाएंगे। इससे कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे और स्क्रीन लगाई जाएंगी। कुछ दिन पहले ही हरियाणा सरकार ने ब्रह्मसरोवर के जल को प्रवाहमान बनाने के लिए अलग से 27 करोड़ रुपये की परियोजना पूरी की है। करोड़ों रुपये की लागत से तीर्थों का जीर्णोद्धार करने के बाद अब यह श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को आकर्षित करने लगा है। तीर्थों के सौंदर्यीकरण के साथ यहां तमाम सुविधाएं भी बढ़ गई हैं। यह धार्मिक पर्यटन का एक अनोखा सर्किट साबित होगा।

Topics: श्रीमद्भगवद्गीतामहाभारत के वन पर्वश्रीकृष्ण सर्किटगीता के साक्षी वट वृक्ष
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