कुतुबमीनार में पूजा की अनुमति पर फैसला सुरक्षित, आज कोर्ट में क्या-क्या हुआ, पढ़ें ये रिपोर्ट
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कुतुबमीनार में पूजा की अनुमति पर फैसला सुरक्षित, आज कोर्ट में क्या-क्या हुआ, पढ़ें ये रिपोर्ट

दिल्ली के साकेत कोर्ट ने कुतुब मीनार परिसर में पूजा की अनुमति देने की मांग

Written byPanchjanyaPanchjanya
May 24, 2022, 04:43 pm IST
inभारत, दिल्ली
कुतुबमीनार परिसर

कुतुबमीनार परिसर

साकेत कोर्ट ने कुतुब मीनार परिसर में पूजा की अनुमति देने की मांग करने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज निखिल चोपड़ा की अदालत 9 जून को फैसला सुनाएगी।

दिल्ली के साकेत कोर्ट ने कुतुब मीनार परिसर में पूजा की अनुमति देने की मांग करने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज निखिल चोपड़ा की अदालत 9 जून को फैसला सुनाएगी। कोर्ट ने सभी पक्षों को इस मामले में अपनी लिखित दलीलें एक सप्ताह में दाखिल करने का निर्देश दिया।

सुनवाई के दौरान कोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से वकील हरिशंकर जैन ने कहा कि पिछले 800 वर्षों से इस परिसर का इस्तेमाल मुस्लिमों ने नहीं किया है। जब मस्जिद के काफी पहले यहां मंदिर था तो पूजा की अनुमति क्यों नहीं दी जा सकती है। हरिशंकर जैन ने एंशियंट मॉनुमेंट्स एंड आर्कियोलॉजिकल साइट्स एंड रिमेंस एक्ट की धारा 16 का हवाला दिया, जिसमें पूजा स्थल की सुरक्षा का प्रावधान किया गया है। उन्होंने अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र किया, जिसमें कहा गया है कि देवता हमेशा देवता रहेंगे और ध्वस्तीकरण से उसका चरित्र या उसकी गरिमा नहीं खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा कि मैं एक पूजा करने वाला व्यक्ति हूं। वहां के चित्र अभी भी दिखाई देते हैं। अगर देवता हैं तो पूजा करने का अधिकार भी है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि याचिकाकर्ता को कौन से कानूनी अधिकार हैं। कोर्ट ने कहा कि मूर्ति के होने पर कोई विवाद नहीं है, लेकिन पूजा करने के अधिकार पर विवाद है। कोर्ट ने कहा कि सवाल है कि क्या पूजा का अधिकार एक स्थापित अधिकार है। क्या ये एक संवैधानिक अधिकार है या दूसरे तरह का अधिकार। क्या याचिकाकर्ता को पूजा के अधिकार से रोका जा सकता है। अगर ये मान लिया जाए कि मुसलमान कुतुब मीनार का मस्जिद के रूप में उपयोग नहीं करते हैं तो इससे याचिकाकर्ता को पूजा करने का अधिकार किस आधार पर मिल जाता है? आठ सौ साल पहले हुए किसी घटना के आधार पर आपको कानूनी अधिकार कैसे मिल सकता है।

आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) ने कोर्ट में जवाब दाखिल कर कहा है कि जब एएसआई ने स्मारक पर नियंत्रण लिया था, तब वहां पूजा नहीं होती थी। कानूनन संरक्षित स्मारक में पूजा का कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए याचिका खारिज की जाए। गौरतलब है कि 3 अप्रैल को कोर्ट ने एएसआई को निर्देश दिया था कि वह कुतुब मीनार परिसर में मौजूद कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद परिसर में रखी हुई भगवान गणेश की मूर्तियों को परिसर से न हटाए । इस मामले में पहले से ही पूजा अर्चना अधिकार को लेकर याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ता ने नई अर्जी में कहा है कि गणेश जी की मूर्तियों को नेशनल म्युचुअल अथॉरिटी के दिये सुझाव के मुताबिक नेशनल म्यूजियम या किसी दूसरी जगह विस्थापित नहीं किया जाना चाहिए। इसकी बजाय उन्हें परिसर में ही पूरे सम्मान के साथ उचित स्थान पर रखा जाए।

कुतुबुद्दीन ऐबक ने 27 हिंदू और जैन मंदिरों की जगह कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद बना दी। ऐबक मंदिरों को पूरे तरीके से नष्ट नहीं कर सका और मंदिरों के मलबे से ही मस्जिद का निर्माण किया गया। कुतुब मीनार परिसर के दीवारों, खंभों और छतों पर हिन्दू और जैन देवी-देवताओं
के चित्र बने हुए हैं

 

वकील विष्णु जैन के जरिये दायर मुख्य याचिका में कहा गया है कि हिंदुओं और जैनों के 27 मंदिरों को तोड़कर ये मस्जिद बनाई गई है। जैन तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव और भगवान विष्णु को इस मामले में याचिकाकर्ता बनाया गया था। उल्लेखनीय है कि 29 नवंबर, 2021 को सिविल जज नेहा शर्मा ने याचिका खारिज कर दी थी। सिविल जज के याचिका खारिज करने के आदेश को डिस्ट्रिक्ट जज की कोर्ट में चुनौती दी गई है।

याचिका में कहा गया है कि कुतुबुद्दीन ऐबक ने 27 हिंदू और जैन मंदिरों की जगह कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद बना दी। ऐबक मंदिरों को पूरे तरीके से नष्ट नहीं कर सका और मंदिरों के मलबे से ही मस्जिद का निर्माण किया गया। कुतुब मीनार परिसर के दीवारों, खंभों और छतों पर हिन्दू और जैन देवी-देवताओं के चित्र बने हुए हैं।

इन पर भगवान गणेश, विष्णु, यक्ष, यक्षिणी. द्वारपाल, भगवान पार्श्वनाथ, भगवान महावीर, नटराज के चित्रों के अलावा मंगल कलश, शंख, गदा, कमल, श्रीयंत्र, मंदिरों के घंटे इत्यादि के चिह्न मौजूद हैं। ये सभी बताते हैं कि कुतुब मीनार परिसर हिंदू और जैन मंदिर थे। याचिका में कुतुब मीनार को ध्रुव स्तंभ बताया गया था।

याचिका में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के उस संक्षिप्त इतिहास का जिक्र किया गया था, जिसमें कहा गया था कि 27 मंदिरों को गिराकर उनके ही मलबे से कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद का निर्माण किया गया। याचिका में मांग की गई थी कि इन 27 मंदिरों को पुनर्स्थापित करने का आदेश दिया जाए और कुतुब मीनार परिसर में हिंदू रीति-रिवाज से पूजा करने की इजाजत दी जाए।

Topics: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभागकुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिदकुतुब मीनार परिसर में पूजाकुतुबुद्दीन ऐबकआर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडियाअयोध्या मामले सुप्रीम कोर्ट
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