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सरहद पर जिहादी शरारत

भारत—नेपाल सीमा पर विभाजन करती शारदा और अन्य सहायक नदियों के किनारे बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी की बसावट दोनों देशों के लिए चिंता की बात। इनमें अधिकतर रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठिए

Written byदिनेश मानसेरादिनेश मानसेरा
Apr 25, 2022, 08:00 am IST
inभारत, उत्तराखंड
नेपाल-भारत के सीमावर्ती इलाकों में घुसपैठियों की बसाहट बन रही चिंता का विषय

नेपाल-भारत के सीमावर्ती इलाकों में घुसपैठियों की बसाहट बन रही चिंता का विषय

नेपाल-भारत सीमा पर विभाजन करती शारदा और अन्य सहायक नदियों के किनारे बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी की बसावट हो रही है। खबर है कि ये सब म्यांमार और बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं और इन्हें बसाने में नेपाल की मुस्लिम संस्थाएं अति सक्रिय हैं।

भारत-नेपाल के उत्तराखंड और यूपी से लगते बॉर्डर पर रोहिंग्या मुसलमानों की बसावट किए जाने की जानकारी सामने आ रही है। खबर है कि खनन कार्य करने वाले ये मजदूर रोहिंग्या हैं और ये यहां झुग्गी—झोंपड़ी डालकर ‘नो मेंस लैंड’ पर बस रहे हैं। जब नदी में खनन नहीं होता तो ये नेपाल जाकर फसल, सब्जी आदि बेचते हैं या फिर मजदूरी करते हैं। ये अब फिर धीरे-धीरे वहीं डेरा डालकर बसे जा रहे हैं। अपनी असल पहचान छिपाकर ये लोग हिन्दू नामों का सहारा लेते हैं।

गौरतलब है कि कुछ माह पहले सीमावर्ती इलाकों में रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुस्लिमों की एक बस्ती होने की खबर का पता चला था। नेपाल के खुफिया अधिकारियों ने इस बारे में जब जांच पड़ताल की तो जानकारी में आया कि ये बंगाल और बिहार के रास्ते नेपाल में आकर बसे थे। नेपाल ने इन सभी को अपने यहां से खदेड़ दिया था। बताते हैं कि ये लोग भारत-नेपाल के बीच बहने वाली नदियों में नो मेन्स लैंड पर झोंपड़ियां बनाकर रहने लगे। इसी तरह उत्तर प्रदेश के इलाकों से नेपाल के क्षेत्रों में भी ऐसे लोग 2019 से लगातार आकर बस रहे हैं। ये लोग पहले मजदूरी करने या बाग—बगीचों की फसल को खरीदने के बहाने नेपाल आते हैं, फिर यहीं टीन शेड डालकर बस जाते हैं।

उत्तराखंड से ताजा जनसंख्या आंकड़े, गोरखाओं आबादी में 2012 से 2022 के दौरान कमी आ गई है और मुस्लिम आबादी में करीब चार प्रतिशत की वृद्धि सामने आई है। 

संदिग्धों पर नजर
नेपाल प्रशासन ने उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थ नगर की पुलिस और जिला प्रशासन 22 सदिंग्ध मुस्लिमों की सूची साझा की है। खबर है कि ये लोग 2015 में दिहाड़ी मजदूरी करने नेपाल जाते थे और अब ये नेपाल और भारत में आलीशान कोठियों और संपत्ति के मालिक बन गए हैं। डीएम सिद्धार्थनगर ने आयकर विभाग से इन संदिग्ध लोगों के बारे में सूचनाएं साझा की हैं। खबर है कि ये लोग नेपाल और भारत में मजदूरों को काम दिलाने के नाम पर मुस्लिम लेबर को बसाने का धंधा कर रहे हैं।

नेपाल में सक्रिय कट्टरपंथी
नेपाली पुलिस ने रोहिंग्या समुदाय के लोगों की भी पहचान की है। अब वह इन्हें म्यांमार वापस भेजती है तो इनकी जटिल कानूनी अड़चने उन्हें झेलनी पड़ रही हैं। क्योंकि म्यांमार में सैनिक हुकूमत है और वहां की फौजी सरकार खुद ही रोहिंग्या मुस्लिमों को देश से बाहर करने के काम में लगी हुई है। खबर है कि नेपाल में इस्लामी संघ नेपाल नाम की संस्था, मुस्लिम वर्ल्ड लीग और आर्गेनाइजेशन वर्ल्ड असेम्बली आफ मुस्लिम यूथ नाम की ये तीन संस्थाएं सक्रिय हैं, जो योजनाबद्ध तरीके से नेपाल-भारत की नदियों के दोनों तरफ रोहिंग्या आबादी को बसाने में लगी हुई हैं।

खबर यह भी है कि इसके पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई भी मदद कर रही है। ये संस्थाएं नो मेन्स लैंड पर मुस्लिमों को बसाकर मस्जिद और मदरसे स्थापित करने का काम भी साथ-साथ कर रही है। बता दें कि उत्तराखंड से लगे कंचनपुर और कैलाली जिलों में ताजा जनसंख्या आंकड़े, आंखे खोल देने वाले हैं। यहां के मूल निवासी माने जाते गोरखाओं आबादी में 2012 से 2022 के दौरान कमी आ गई है और मुस्लिम आबादी में करीब चार प्रतिशत की वृद्धि सामने आई है।

Topics: रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुस्लिमों
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