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होम भारत

जब लोग बैंकों का पैसा लेकर भाग जाते हैं तो हर कोई बात करता है, जब मजबूत सरकार उसे वापस लाती है तो कोई चर्चा नहीं करता: पीएम

Written byPanchjanyaPanchjanya
Nov 18, 2021, 05:42 pm IST
inभारत
श्री नरेन्द्र मोदी, प्रधानमंत्री

श्री नरेन्द्र मोदी, प्रधानमंत्री

'बैंकों को अब ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की मदद के लिए आगे आना होगा, सरकारी सुधारों से बैंकिंग क्षेत्रों की स्थिति हुई मजबूत'

 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि पिछले कुछ सालों में सरकारी सुधारों ने बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत स्थिति में ला दिया है। उन्होंने कहा कि बैंकों को अब ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की मदद के लिए आगे आना होगा। प्रधानमंत्री ने 'निर्बाध ऋण प्रवाह और आर्थिक विकास के लिए तालमेल बनाना' विषय पर आयोजित सम्मेलन के समापन सत्र को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संबोधित करते हुए विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि हमारे देश में जब लोग बैंकों का पैसा लेकर भाग जाते हैं तो हर कोई इसके बारे में बात करता है, लेकिन जब एक मजबूत सरकार उस पैसे को वापस लाती है तो कोई भी चर्चा नहीं करता। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों के दौरान अवरुद्ध किए गए लाखों करोड़ रुपये में से 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की गई है।

बैंकिंग क्षेत्र की स्थिति मजबूत 
मोदी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार द्वारा पिछले 6-7 वर्षों में बैंकिंग क्षेत्र में शुरू किए गए सुधारों ने बैंकिंग क्षेत्र को हर तरह से समर्थन दिया, जिसके कारण आज देश का बैंकिंग क्षेत्र बहुत मजबूत स्थिति में है। उन्होंने कहा कि बैंकों की वित्तीय स्थिति अब काफी बेहतर स्थिति में है। 2014 से पहले की समस्याओं और चुनौतियों के समाधान के लिए एक-एक करके उनके समाधान के रास्ते खोजे गए। प्रधानमंत्री ने कहा, 'हमने नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए) की समस्या का समाधान किया, बैंकों का पुर्नपूंजीकरण किया और उनकी ताकत को बढ़ाया। हम आईबीसी जैसे सुधार लाए, अनेक कानूनों में सुधार किया और ऋण वसूली न्यायाधिकरण वसूली न्यायाधिकरण को सशक्त किया। कोरोना काल में देश में एक समर्पित स्ट्रेस्ड एसेट मैनेजमेंट वर्टिकल का भी गठन किया गया था।

जिन राज्यों में जनधन खाते ज्यादा, वहां क्राइम रेट हुआ कम 
प्रधानमंत्री ने कहा, 'भारतीय बैंक आज देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा प्रदान करने, एक बड़ा धक्का देने और भारत को आत्मनिर्भर बनाने में एक प्रमुख भूमिका निभाने के लिए पर्याप्त मजबूत हैं। मैं इस चरण को भारत के बैंकिंग क्षेत्र में एक प्रमुख मील का पत्थर मानता हूं।' उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में उठाए गए कदमों ने बैंकों के लिए एक मजबूत पूंजी आधार तैयार किया है। बैंकों के पास पर्याप्त तरलता है और एनपीए के प्रावधान के लिए कोई बैकलॉग नहीं है क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में एनपीए पिछले पांच वर्षों में सबसे कम है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा भारतीय बैंकों के दृष्टिकोण में सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि आज जब देश वित्तीय समावेशन पर इतनी मेहनत कर रहा है तब नागरिकों के उत्पादक क्षमता को अनलॉक करना बहुत जरूरी है। जैसे अभी बैंकिंग सेक्टर की ही एक रिसर्च में सामने आया है कि जिन राज्यों में जनधन खाते जितने ज्यादा खुले हैं, वहां क्राइम रेट उतना ही कम हुआ है। प्रधानमंत्री ने कहा कि एक मील का पत्थर होने के अलावा, यह चरण एक नया प्रारंभिक बिंदु भी है और उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र को धन सृजित करने वालों और नौकरी देने वालों का समर्थन करने के लिए कहा। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा, 'यह समय की आवश्यकता है कि अब भारत के बैंक अपनी बैलेंस शीट के साथ-साथ देश की संपत्ति को मजबूत करने के लिए सक्रिय रूप से काम करें।'

बैंकों को साझेदारी का मॉडल अपनाना होगा
प्रधानमंत्री ने ग्राहकों को सक्रिय रूप से सेवा देने की आवश्यकता पर जोर दिया और बैंकों से ग्राहकों, कंपनियों और एमएसएमई को उनकी जरूरतों का विश्लेषण करने के बाद अनुकूलित समाधान प्रदान करने के लिए कहा। प्रधानमंत्री ने बैंकों से इस भावना को छोड़ने का आग्रह किया कि वे अनुमोदक (स्वीकृति प्रदान करने वाले) हैं और ग्राहक एक आवेदक है, वे दाता हैं और ग्राहक याचक हैं। प्रधानमंत्री ने जोर दिया बैंकों को साझेदारी का मॉडल अपनाना होगा। उन्होंने जन धन योजना को लागू करने में उत्साह के लिए बैंकिंग क्षेत्र की प्रशंसा की। प्रधानमंत्री ने कहा कि बैंकों को सभी हितधारकों के विकास में हिस्सेदारी महसूस करनी चाहिए और विकास की कहानी में सक्रिय रूप से शामिल होना चाहिए। उन्होंने पीएलआई का उदाहरण दिया जहां सरकार भारतीय निर्माताओं को उत्पादन पर प्रोत्साहन देकर ऐसा ही कर रही है। पीएलआई योजना के तहत निर्माताओं को अपनी क्षमता कई गुना बढ़ाने और खुद को वैश्विक कंपनियों में बदलने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि बैंक अपने सहयोग और विशेषज्ञता के जरिए परियोजनाओं को व्यवहार्य बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में जो बड़े बदलाव हुए हैं और जो योजनाएं लागू की गई हैं, उनके कारण देश में आंकड़ों का एक बड़ा पूल तैयार हो गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र को इसका लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वामित्व और स्वानिधि जैसी प्रमुख योजनाओं द्वारा प्रस्तुत अवसरों को सूचीबद्ध किया और बैंकों से इन योजनाओं में भाग लेने और अपनी भूमिका निभाने के लिए कहा।

जिस पैमाने पर कॉरपोरेट और स्टार्ट-अप आगे आ रहे हैं वह अभूतपूर्व 
वित्तीय समावेशन के समग्र प्रभाव पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जब देश वित्तीय समावेशन पर इतनी मेहनत कर रहा है, तो नागरिकों की उत्पादक क्षमता को अनलॉक करना बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र द्वारा हाल ही में किए गए एक शोध का उदाहरण दिया जहां राज्यों में अधिक जन धन खाते खोले गए हैं, जिससे अपराध दर में कमी आई है।  इसी तरह प्रधानमंत्री ने कहा कि आज जिस पैमाने पर कॉरपोरेट और स्टार्ट-अप आगे आ रहे हैं वह अभूतपूर्व है। प्रधानमंत्री ने पूछा ऐसी स्थिति में, भारत की आकांक्षाओं को मजबूत करने, निधि देने, निवेश करने का इससे बेहतर समय क्या हो सकता है। प्रधानमंत्री ने बैंकिंग क्षेत्र से खुद को राष्ट्रीय लक्ष्यों और वादों से जोड़कर आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने मंत्रालयों और बैंकों को एक साथ लाने के लिए वेब आधारित प्रोजेक्ट फंडिंग ट्रैकर की प्रस्तावित पहल की प्रशंसा की। उन्होंने सुझाव दिया कि यह बेहतर होगा कि इसे गतिशक्ति पोर्टल में एक इंटरफेस के रूप में जोड़ा जाए। उन्होंने कामना की कि आजादी के 'अमृत काल' में भारतीय बैंकिंग क्षेत्र बड़ी सोच और नवोन्मेषी दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़े। वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग द्वारा यह दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में विभिन्न मंत्रालय, बैंक, वित्तीय संस्थान और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस अवसर पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी मौजूद रहीं।

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