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पंजाब: सिद्धू के सलाहकारोें की देश-विरोधी शरारत

Written byPanchjanyaPanchjanya
Sep 2, 2021, 05:11 pm IST
inभारत, पंजाब
नवजोत सिंह सिद्धू अपने सलाहकार मालविंदर सिंह माली के साथ

नवजोत सिंह सिद्धू अपने सलाहकार मालविंदर सिंह माली के साथ

मनोज वर्मा


पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के सलाहकार अपने बयानों से देश की एकता और अखंडता के साथ कर रहे हैं खिलवाड़। इस पर कांग्रेस की चुप्पी और भी चौंकाने वाली है।


वर्तमान मेें पंजाब प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू उस राज्य में रहते हैं जिसके एक बड़ा हिस्से को1947 में भारत से अलग कर पाकिस्तान में मिला दिया गया था। सिद्धू बंटवारे का दर्द झेलने वाले पंजाब के हिंदू-सिखों की पीड़ा को भी जानते होंगे। सिद्धू ने भारत के बंटवारे से लेकर आतंकवाद को बढ़ावा देने में पाकिस्तान की भूमिका के बारे में भी जरूर सुना होगा। ऐसे में यदि सिद्धू के पाकिस्तानी प्रेम को लेकर सवाल उठते हैं तो उसके पीछे कोई और नहीं, बल्कि खुद सिद्धू और उनके सलाहकारों का आचरण रहा है। इस बार सिद्धू अपने करीबी सलाहकारों के कारण विवादों में हैं। इतने कि पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के मंत्री ही सिद्धू के सलाहकारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पंजाब के पांच मंत्रियों और विधायकों के एक गुट ने कहा है कि सिद्धू के दो नव-नियुक्त सलाहकारों मालविंदर सिंह माली और प्यारे लाल गर्ग के बयान भारत के हितों के विरुद्ध और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक हैं।

बता दें कि माली ने कुछ दिन पहले फेसबुक पर लिखा था, ‘‘कश्मीर, कश्मीरी के लोगों का देश है। 1947 में भारत को छोड़ते समय हुए समझौते के अनुसार और यूएनओ के फैसले का उल्लंघन करते हुए ‘कश्मीर देश’ के दो टुकड़े कर दिए गए, जिस पर पाकिस्तान और भारत ने अवैध कब्जा किया हुआ है।’’ माली के इस बयान पर राजनीति गरमा गई और विपक्ष ने इसे शहीदों का अपमान बताते हुए राहुल गांधी से सवाल करना शुरू कर दिया। अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा, ‘‘राहुल गांधी को बताना चाहिए कि माली का बयान शहीदों के परिवारों का अपमान है या नहीं? अगर राहुल गांधी इससे सहमत हैं तो फिर कांग्रेस का असली चेहरा सबके सामने आ जाएगा और अगर ऐसा नहीं है तो फिर वे सिद्धू के खिलाफ क्या कार्रवाई करेंगे।’’ वहीं, कैप्टन सरकार में कैबिनेट मंत्री ब्रह्म महिंद्रा, विजय इंदर सिंगला, भारत भूषण आशु, बलबीर सिंह सिद्धू और साधु सिंह धर्मसोत, विधायक राज कुमार वेरका ने कहा कि सिद्धू के इन दोनों नव-नियुक्त सलाहकारों के बयान स्पष्ट तौर पर भारत के हितों के विरुद्ध और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक हैं।

इन नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री कैप्टन की पाकिस्तान के प्रति आलोचना का विरोध करने वाले गर्ग का बयान भी पाकिस्तान समर्थित झुकाव को दर्शाता है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सांसद मनीष तिवारी ने भी सलाहकारों के बयान को लेकर सिद्धू को घेरा। तिवारी ने अपने एक ट्वीट में कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को इस पर आत्ममंथन करने की जरूरत है।

इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सिद्धू पर 9 नवंबर, 2019 के एक वीडियो को लेकर निशाना साधा। इसी दिन श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर का उद्घाटन हुआ था। पुरी ने ट्वीट कर कहा, ‘‘आश्चर्य की बात है कि सिद्धू के सलाहकार, जिन्होंने अब कश्मीर पर आश्चर्यजनक बयान दिए हैं, उन्होंने 9 नवंबर, 2019 को श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर के उद्घाटन पर जप्पी-पप्पी भाषण से प्रेरणा ली है, जिसमें सिद्धू ने अपने मित्र पीएम इमरान खान के गुणों की प्रशंसा की थी।’’

वैसे विवाद के बाद सिद्धू ने अपने दोनों सलाहकारों को पटियाला में अपने घर बुलाया था। इसके बाद माली ने कहा, ‘‘मुझे जो कुछ भी कहना था, मैंने उसे सोशल मीडिया पर कह दिया है, और वह अंतिम है। अगर कोई गलती करता है, तो उसे प्रतिबंधित करना चाहिए। हमें पंजाब के कल्याण के लिए काम करना जारी रखना चाहिए।’’ माली यहीं नहीं रुके। उन्होंने एक और पोस्ट लिखी। इसमें माली ने मुख्यमंत्री कैप्टन और पाकिस्तानी पत्रकार आरुसा आलम को लेकर बहुत कुछ लिख दिया। माली ने लिखा, ‘‘कैप्टन ने नवजोत सिद्धू के सलाहकारों के साथ सियासी लड़ाई शुरू कर साबित कर दिया है कि अब आपकी सियासी औकात कितनी रह गई है। आपके राष्ट्रीय सुरक्षा व पंजाब प्रशासन के सलाहकार बीबी आरुसा आलम हैं। मैं पहले इसे आपका निजी मामला समझता था और कभी यह सवाल नहीं उठाया। अब आपने सिद्धू के सलाहकारों का मुद्दा कांग्रेस पार्टी की सियासत व देश की सुरक्षा के साथ जोड़ लिया है तो कुछ भी निजी नहीं होता। इस वजह से मैं यह पोस्ट डालने के लिए मजबूर हुआ हूं।’’ इससे साफ है कि माली के विरुद्ध सिद्धू ने कोई कार्रवाई नहीं की है।

असल में पाकिस्तान को लेकर मुख्यमंत्री कैप्टन और सिद्धू के राजनीतिक दृष्टिकोण अलग-अलग दिखाई देते हैं। सिद्धू पर जहां पाकिस्तान-परस्त आचरण करने का आरोप लगता रहा है, वहीं कैप्टन आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे पर पाकिस्तान के खिलाफ बोलते हैं।

सिद्धू की जब पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद पद ताजपोशी हुई थी उस समय भी कैप्टन ने सिद्धू की मौजूदगी में पाकिस्तान को लेकर कहा था, ‘‘हमारा 600 किलोमीटर का बॉर्डर पठानकोट से लेकर फाजिल्का तक पाकिस्तान से जुड़ा हुआ है। वहां पर रोजाना हथियार पहुंचते हैं। किसलिए पहुंच रहे हैं फिर दंगा फसाद यहां पर करना चाहते हैं।’’

दरअसल, ऐसा माना जा रहा है कि अपने भाषण में पाकिस्तान का जिक्र करके कैप्टन, सिद्धू को संकेत दे रहे थे, क्योंकि  सिद्धू ने ही पाकिस्तानी जनरल बाजवा को गले लगाया था और इमरान खान की तारीफ की थी, जिसकी पूरे देश में आलोचना हुई थी।  

वैसे माली का कश्मीर पर दिए गए बयान का विवाद
अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि उन्होंने फेसबुक पर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का विवादित कार्टून लगा दिया और इस पर विवादित टिप्पणी कर डाली। माली ने फेसबुक के आवरण पर 1990 के आसपास प्रकाशित होने वाली एक पत्रिका ‘जनतक पैगाम’ के मुख्य पृष्ठ का फोटो लगाया। इसमें पूर्व प्रधानमंत्री
स्व. इंदिरा गांधी को हाथ में बंदूक लिए दिखाया गया है, जिसके एक सिरे पर खोपड़ी लटक रही है। इंदिरा गांधी के पीछे भी खोपड़ियों का ढेर लगा हुआ है। इस पेज पर पंजाबी में लिखा है, ‘‘हर जबर दी इही कहाणी, करना जबर ते मुंह दी खाणी’’ यानी ‘‘हर जुल्म करने वाले की यही कहानी है, अंत में उसे मुंह की खानी पड़ती है।’’

माली शुरू से ही विवादों में रहे हैं। 1993 में पंजाब पुलिस ने उनके विरुद्व नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (एनएसए) और आतंकवाद निरोधी अधिनियम (टाडा) के तहत मामला दर्ज किया था। उस समय वे लगातार भड़काऊ बातें लिख रहे थे। इस बीच सांसद परनीत कौर ने सिद्धू पर निशाना साधते हुए कहा कि वे पार्टी की राज्य इकाई के अध्यक्ष हैं और उन्हें अपने सलाहकार पार्टी के भीतर से ही चुनने चाहिए, न कि बाहर से।

गांधी परिवार के हस्तक्षेप के बाद लगने लगा था कि पंजाब में कांग्रेस पार्टी की अंदरूनी लड़ाई का अंत हो जाएगा और पार्टी एकजुट होकर अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट जाएगी, लेकिन अब वह भ्रम टूट गया है। कैप्टन और सिद्धू के खेमों में उठापटक बढ़ती ही जा रही है। सिद्धू खेमा कैप्टन को मुख्यमंत्री पद से हटाने की मुहिम में लगा हुआ है। हालांकि पार्टी के पंजाब प्रभारी हरीश रावत ने कहा है कि पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव कैप्टन के नेतृत्व में लड़ा जाएगा। जाहिर तौर पर पंजाब कांग्रेस में खींचतान कोई नई बात नहीं है। कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व भी कह सकता है कि कांग्रेस में खींचतान कोई चिंता की बात नहीं है, सब ठीक हो जाएगा। पर चिन्ता की बात इसलिए जरूर है क्योंकि  सिद्धू के सलाहकार देश की एकता और अखंडता के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।   (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

 
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