सौर क्रांति के लिए तैयार भारत
June 4, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम Archive

सौर क्रांति के लिए तैयार भारत

Written byArchiveArchive
Mar 26, 2018, 12:00 am IST
in Archive

दिंनाक: 26 Mar 2018 12:12:12

शशांक द्विवेदी

 
पिछले दिनों राष्ट्रपति भवन में जलवायु परिवर्तन के खिलाफ अस्तित्व में आए अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) के पहले सम्मलेन से यह साफ हो गया है कि भारत दुनिया में सौर क्रांति का नेतृत्व करेगा। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के प्रणेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सम्मेलन की मेजबानी करते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन समेत 23 राष्ट्राध्यक्षों और 121 देशों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में कहा कि सौर गठबंधन ‘मानवता के लिए जीवनदायी’ के रूप में काम करेगा।
ऊर्जा के गहराते संकट के दौर में आज सौर ऊर्जा यानी सोलर एनर्जी हर किसी की उम्मीदों की न खत्म होने वाली किरण साबित हो रही है। दरअसल, धरती को जितनी ऊर्जा की आवश्यकता है, वह सूर्य ही पूरी कर सकता है। इसलिए अब दुनिया को ऐसी सौर क्रांति की जरूरत महसूस हो    रही है जिससे पर्यावरण को बिना     नुकसान पहुंचाए हम अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी कर सकें।
अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के पहले सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत 100 गीगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन करना चाहता है। विश्व में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को लेकर यह एक बड़ी पहल है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत परिवर्तनीय ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों से 2022 तक 175 गीगावॉट बिजली बना लेगा। एक गीगावॉट का अर्थ एक अरब वॉट होता है। बिजली बनाने की भारत की यह क्षमता पहली बार यूरोपीय संघ के परिवर्तनीय ऊर्जा के विस्तार को भी पीछे छोड़ देगी। भारत इसमें सबसे बड़े लक्ष्य को हासिल करेगा। 175 गीगावॉट के कुल लक्ष्य में 100 गीगावॉट ऊर्जा सौर से और 60 गीगावॉट ऊर्जा पवन से मिलेगी। भारत  पहले ही 20 गीगावॉट सौर ऊर्जा हासिल कर चुका है। एक आकलन के अनुसार भारत  को 175 गीगावॉट के लक्ष्य के लिए वित्त वर्ष 2018 से 2022 के बीच 83 अरब अमेरिकी डॉलर की जरूरत पड़ेगी। जबकि मौजूदा समय में देश में सौर और पवन ऊर्जा का शुल्क अब तक का सबसे कम यानी प्रति इकाई क्रमश: 2.44 रुपये और 3.46 रुपये है। फिलहाल प्रधानमंत्री मोदी ने सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए सस्ती वित्तीय सहायता का आह्वान करते हुए कहा कि इससे ही ऊर्जा के टोकरे में सौर ऊर्जा का हिस्सा बढ़ेगा। इससे न सिर्फ बिजली सस्ती होगी बल्कि पर्यावरण प्रदूषण का जिम्मेदार कार्बन उत्सर्जन भी कम होगा।
आईएसए को सौर संसाधन संपन्न देशों के गठबंधन के रूप में जाना जाता है।  इस गठबंधन का निर्माण इसलिए किया गया है ताकि वह अपनी विशेष ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर सकें। यह गठबंधन कर्क रेखा और मकर रेखा के बीच आने वाले 121 संभावित सदस्य देशों के लिए खुला हुआ है। करीब 60 देशों ने आईएसए के रूपरेखा समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं और 30 देशों  ने सत्यापन दस्तावेज जमा किए हैं। उम्मीद है, इस साल के अंत तक दायरे में
आने वाले अधिकतर देश इसके सदस्य बन जाएंगे।
अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन में शामिल सभी देशों में से कुछ देश अफ्रीका के हैं। ये देश गरीब और पिछड़े हुए हैं। भारत ने इन देशों में सौर ऊर्जा संयंत्रों समेत स्वच्छ ऊर्जा से संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए दो अरब डॉलर की राशि खर्च करने का निर्णय लिया है। दुनियाभर में चल रहे बड़े सौर संयंत्रों  में भारत अपनी तकनीक और क्षमताओं की भागीदारी करना चाहता है। इस ओर भारत लगातार आगे भी बढ़ रहा है, साथ ही उसकी कई देशों से बातचीत भी चल रही है। कई देश भारत की तकनीक और क्षमताएं इस्तेमाल करने के लिए इच्छुक भी हैं। इनमें तंजानिया, टोगो, बेनिन, कांगो, चाड और सेशेल्स शामिल हैं। इस सम्मेलन में करीब 14 देशों में भारत की ऐसी 24 परियोजनाओं पर समझौते भी हुए हैं।

भारत की पहल है आईएसए
अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) की स्थापना भारत की पहल के बाद हुई थी। इसकी शुरुआत संयुक्त रूप से पेरिस में 30 नवम्बर, 2015 को संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन के दौरान कोप-21 से अलग भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रास्वां ओलांद ने की थी। संगठन का सचिवालय हरियाणा के गुरुग्राम स्थित राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान के परिसर में स्थापित किया गया है। भारत ने आईएसए कोष के लिये 175 करोड़ रुपए का योगदान दिया है। भारत ने सचिवालय के शुरू के 5 वर्ष का खर्च वहन करने का भी प्रस्ताव दिया है। आईएसए सचिवालय ने 25 जनवरी, 2016 को काम करना शुरू कर दिया था। इसके तहत कृषि के क्षेत्र में सौर ऊर्जा का प्रयोग, व्यापक स्तर पर किफायती ऋण, सौर मिनी ग्रिड की स्थापना जैसे कार्यक्रम प्रारंभ किए गए हैं। इन कार्यक्रमों से सदस्य देशों में सौर ऊर्जा की बढ़ती मांग को पूरा करने एवं आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी। तीन मौजूदा कार्यक्रमों के अलावा आईएसए के दो और कार्यक्रम—छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्रों को बढ़ावा देना, सौर ऊर्जा भंडारण तथा ई-गतिशीलता-शुरू करना है। भारत आईएसए सदस्य देशों को सौर ऊर्जा से घरेलू प्रकाश, किसानों के लिये सौर पंप और अन्य सौर उपकरण संबंधी परियोजनाओं के लिये समर्थन     भी देगा। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन दुनिया का शायद पहला संगठन है जो इतने कम समय में अंतरराष्ट्रीय पटल पर छा गया है। इसमें भारत एवं फ्रांस ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। अब दिल्ली में आयोजित पहले स्थापना सम्मेलन के बाद संगठन का काम काफी तेजी से बढ़ेगा, सभी सदस्य देश आपसी सहयोग और प्रोत्साहन की नीति के साथ काम करेंगे। यही नहीं, दायरे में आने वाले सभी देशों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी। इससे जहां सौर क्रांति तेज होगी, वहीं रोजगार के साधन भी उपलब्ध होंगे। विश्व बैंक सहित कई बैंकों द्वारा सस्ती दर पर ऋण उपलब्ध होने से उद्यमियों का आकर्षण सोलर पैनल सहित कई सामानों के उत्पादन की तरफ बढ़ेगा। आईएसए न केवल सदस्य देशों के लिए योजनाएं तैयार करेगा बल्कि समय-समय पर किस देश में किस विषय पर काम चल रहा है, किस देश में क्या शोध चल रहा है, उसका अन्य देश किस प्रकार फायदा उठा सकते हैं, इस बारे में जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी। सोलर रोड के प्रति कई देशों का आकर्षण देखा जा रहा है। इसके लिए आईएसए उत्सुक देशों को जानकारी उपलब्ध कराएगा कि आखिर किस प्रकार सोलर रोड तैयार की जा सकती है। फ्रांस एवं नीदरलैंड सहित दुनिया के कई देश सोलर रोड बनाने पर काम कर रहे हैं। सोलर रोड न टूटे, इसके लिए सोलर टाइल्स बनाने पर जोर दिया जाएगा। छोटी-छोटी टाइल्स को आपस में जोड़ देने से उनके टूटने की संभावना न के बराबर रह जाएगी। एक तरीका और है कि नीचे सोलर पैनल बिछाकर ऊपर सड़क इस तरह से बनाई जाती है कि सूर्य की किरणें छिद्रों के माध्यम से पैनल पर पहुंच सकें।

संकट से निबटने के लिये सौर ऊर्जा
सस्ती व सतत ऊर्जा की आपूर्ति किसी भी देश की तरक्की के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है। देश में ऊर्जा के दो प्रमुख माध्यम, बिजली और पेट्रोलियम पदार्थों की कमी होने से वैज्ञानिकों का ध्यान पुन: ऊर्जा के अन्य स्रोतों की ओर गया है। किसी भी देश के लिए ऊर्जा सुरक्षा के मायने ये हैं कि वर्तमान और भविष्य की ऊर्जा आवश्यकता की पूर्ति इस तरीके से हो कि सभी लोग ऊर्जा से लाभान्वित हो सकें, पर्यावरण पर कोई कु-प्रभाव न पड़े, और यह तरीका स्थायी हो, न कि अल्पकालीन। इस तरह की ऊर्जा नीति अनेक तरह की वैकल्पिक ऊर्जा का मिश्रण हो सकती है जैसे कि, सूर्य ऊर्जा, पवन ऊर्जा, छोटे पानी के बांध, गोबर गैस इत्यादि। भारत में इसके लिए पर्याप्त  संसाधन उपलब्ध हैं, और वैकल्पिक ऊर्जा के तरीके ग्राम स्वराज्य या स्थानीय स्तर पर स्वावलंबन के सपने से भी अनुकूल हैं, इसलिए देश में उन्हें बड़े पैमाने पर अपनाने की जरूरत है, जिससे देश में उर्जा के क्षेत्र में बढ़ती  मांग और आपूर्ति के बीच अंतर को कम किया जा सके। हमें न केवल वैकल्पिक ऊर्जा बनाने के लिए पर्याप्त इंतजाम करना होगा, बल्कि सांस्थानिक परिवर्तन भी करना होगा जिससे कि लोगों के लिए स्थायी और स्थानीय ऊर्जा के संसाधनों से स्थानीय ऊर्जा की जरूरत पूरी हो सके।

समझौते के लिए प्रतिबद्ध भारत
‘ग्लोबल वार्मिंग’ से मुकाबला करने और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती के मोर्चे पर काम शुरू करने के लिए दिसंबर 2015 में पेरिस में जलवायु परिवर्तन सम्मेलन हुआ था जिसमें 150 से ज्यादा देश ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती पर सहमत हुए थे। भले ही अब अमेरिका पेरिस जलवायु सम्मेलन के तहत हुए समझौते से अलग हो गया हो लेकिन पर्यावरण और धरती के बढ़ते तापमान को लेकर चिंतित भारत इसके तहत हुए समझौते को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही विकासशील देशों के अगुआ के तौर पर भारत ने बड़ी जिम्मेदारी लेते हुए 2030 तक अपनी कार्बन उत्सर्जन तीव्रता को 2005 के मुकाबले 33-35 फीसदी तक कम करने का लक्ष्य रखा है।
पेरिस समझौते के तहत भारत सहित समस्त देश 2020 के बाद से ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन पर रोक लगाने या कम करने की दिशा में कदम उठाएंगे तथा औसत वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी दो डिग्री सेल्सियस से कम, 1.5 डिग्री सेल्सियस के लिए प्रयास करेंगे। भारत कार्बन उत्सर्जन के कड़े मानकों को स्वीकार करने के लिए वचनबद्ध है और इस बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए ही भारतीय नेतृत्व ने वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की मदद से 2022 तक अपनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को चार गुना बढ़ाकर 175 गिगावाट करने की घोषणा की थी जिसमें 100 गीगाबाइट बिजली सौर ऊर्जा से उत्पन्न करने का लक्ष्य है।  वास्तव में कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए आने वाला वक्त नवीकरणीय ऊर्जा का ही होगा, जिसमें सौर उर्जा सबसे प्रमुख है।
(लेखक राजस्थान के मेवाड़ विश्वविद्यालय में उपनिदेशक हैं और टेक्निकल टुडे पत्रिका के संपादक हैं)

पर्यावरण की दिशा में बड़ा कदम  
भारत द्वारा अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) के पहले सम्मलेन का सफल आयोजन दुनिया भर में पर्यावरण संरक्षण के लिए एक बड़ा कदम साबित होगा, क्योंकि सौर ऊर्जा पर जोर देकर हम अपनी ऊर्जा जरूरतों के साथ-साथ ग्लोबल वार्मिंग पर काबू कर सकतें है। वास्तव में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए आयोजित यह  सौर गठबंधन पर्यावरण संरक्षण के लिए भी एक बड़ा कदम है।

किफायती सौर ऊर्जा की जरूरत 
देश के टेलीकॉम टॉवर प्रतिवर्ष लगभग 5 हजार करोड़ का तेल जला रहे हैं। यदि वे अपनी आवश्यकता  की पूर्ति सौर ऊर्जा से करते हैं तो बड़ी मात्रा में डीजल बचाया जा सकता है। सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए लोगों को इसकी ओर आकर्षित करना जरूरी है। लोग इसको समझने तो लगे हैं लेकिन इसका प्रयोग करने से कतराते हैं । छोटे स्तर पर सोलर कूकर, सोलर बैटरी, सौर ऊर्जा से चलने वाले वाहन, मोबाइल फोन आदि का प्रयोग देखने को मिल रहा है लेकिन ज्यादा नहीं। विद्युत के लिए सौर ऊर्जा का प्रयोग करने से लोग अभी भी बचते हैं जिसका कारण सौर ऊर्जा का किफायती न होना  है। सौर ऊर्जा अभी महंगी है और इसके प्रति आकर्षण बढ़ाने के लिए जागरूकता जरूरी है।

उत्पादन और संभावनाएं
सूरज से ऊर्जा प्राप्त करने के लिए फोटोवोल्टेइक सेल प्रणाली का प्रयोग किया जाता है। फोटोवोल्टेइक सेल सूरज से प्राप्त होने वाली किरणों को ऊर्जा में तब्दील कर देता है। भारत में सौर ऊर्जा की काफी संभावनाएं हैं क्योंकि देश के अधिकतर हिस्सों में साल में 250-300 दिन सूरज अपनी किरणें बिखेरता है।
फोटोवोल्टेइक सेल के जरिए सूरज की किरणों से ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है। भारत में पिछले 25-30 वर्षों से सौर ऊर्जा पर काम हो रहा है लेकिन पिछले तीन साल के दौरान इसमें गति आई है। सरकार ने सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन का अनुमोदन भी किया है जिसका उद्देश्य 2022 तक ग्रिड विद्युत शुल्क दरों के साथ समानता लाने के लिए देश में सौर ऊर्जा प्रौद्योगिकियों का विकास और संस्थापन करना है।

ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

भांगर बम विस्फोट मामले में एनआईए ने शौकत मोल्ला के आवास पर मारा छापा

भांगर बम विस्फोट: पूर्व तृणमूल विधायक शौकत मोल्ला के घर एनआईए का छापा

Ghaziabad Dasna Madarsa Buldozed

गाजियाबाद: डासना में सरकारी जमीन पर बने अवैध मदरसे पर चला बुलडोजर, कोर्ट ने ठोंका 1.23 करोड़ का जुर्माना

प्रतीकात्मक तस्वीर

मानसून आज दस्तक दे सकता है: केरल-तमिलनाडु में पहले पहुंचने के आसार, 17 राज्यों में IMD अलर्ट

Muzaffarpur Hospital fire

Muzaffarpur Hospital fire: प्रसाद अस्पताल में आईसीयू में लगी भीषण आग, 20 मरीजों की मौत की खबर

Donald trump gulf War

ईरान नीति पर ट्रंप को बड़ा झटका: हाउस ने 215-208 से पास किया वॉर पावर्स रेजोल्यूशन, क्या लगेगी मनमानी पर रोक?

आज का श्लोक : सन्तः सन्तप्यन्ते न दुःखेषु

Load More

ताज़ा समाचार

भांगर बम विस्फोट मामले में एनआईए ने शौकत मोल्ला के आवास पर मारा छापा

भांगर बम विस्फोट: पूर्व तृणमूल विधायक शौकत मोल्ला के घर एनआईए का छापा

Ghaziabad Dasna Madarsa Buldozed

गाजियाबाद: डासना में सरकारी जमीन पर बने अवैध मदरसे पर चला बुलडोजर, कोर्ट ने ठोंका 1.23 करोड़ का जुर्माना

प्रतीकात्मक तस्वीर

मानसून आज दस्तक दे सकता है: केरल-तमिलनाडु में पहले पहुंचने के आसार, 17 राज्यों में IMD अलर्ट

Muzaffarpur Hospital fire

Muzaffarpur Hospital fire: प्रसाद अस्पताल में आईसीयू में लगी भीषण आग, 20 मरीजों की मौत की खबर

Donald trump gulf War

ईरान नीति पर ट्रंप को बड़ा झटका: हाउस ने 215-208 से पास किया वॉर पावर्स रेजोल्यूशन, क्या लगेगी मनमानी पर रोक?

आज का श्लोक : सन्तः सन्तप्यन्ते न दुःखेषु

आज का राशिफल

4 जून का राशिफल : किस्मत देगी साथ या आएगी चुनौती, जानें क्या कहते हैं आपके सितारे

ऑपरेशन डेल्टा हंट के बारे में मीडिया को जानकारी देते उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी

बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ गुजरात में ‘ऑपरेशन डेल्टा हंट’, 72 घंटे में 362 गिरफ्तार

कोर्ट का फैसला

‘प्राइड मंथ’ से पहले ऑस्ट्रेलिया से आया एक चौंकाने वाला फैसला

RSS Karyakarta Vikas Varg Kumar Mangalam Birla

नागपुर: RSS के ‘कार्यकर्ता विकास वर्ग-द्वितीय’ का 4 जून को भव्य समापन, उद्योगपति कुमार मंगलम बिरला होंगे मुख्य अतिथि

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies